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अटल नववर्ष पर इस घाट पर आकर गंगा में लगाते थे डुबकी, शिवलिंग में चढ़ाते 51 बेलपत्र

डीएबी कॉलेज से डेढ़ किमी की दूरी पर स्थित बाबा घाट कभी गुलजार रहा करता था, लेकिन आज बदहाल है

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Ruchi Sharma

Jan 01, 2017

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कानपुर. डीएबी कॉलेज से डेढ़ किमी की दूरी पर स्थित बाबा घाट कभी गुलजार रहा करता था, लेकिन आज बदहाल है। इस घाट से पूर्व पीएम अटल बिहारी बाजपेयी ने खास लगाव रहा है। वह चार साल कानपुर में रहे और नए साल के दिन यहां पर आकर पहले गंगा में डुबकी लगाते और फिर मंदिर में जाकर शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाया करते थे। अटल दो बार नया साल यहीं पर आकर मनाया। वह कॉलेज के आठ दस मित्रों के साथ आते थे। पहले सभी मित्र आपस में कॉलेज और पढ़ाई के बारे में एक दूसरे से बात करते और फिर गंगा में छलांग लगाकर नए साल का जश्न मनाया करते थे। अटल को तैरना नहीं आता था इसी के चलते वह गंगा के नीचे उतरकर सिर्फ गिनती की 11 डुबकी लगाकर पानी से बाहर निककर दोस्तों की तैराकी का लुफ्त उठाया करते थे।

अटल ठंडाई पीसते व गीत सुनाते थे

गंगा किनारे बने बाबा घाट को शायद ही कोई जानता होगा, लेकिन एक समय था जब देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अपने दोस्तों के साथ इस घाट पर नववर्ष के दिन कई घंटे तक समय गुजारा करते थे। वो यहां दोस्तों के साथ मस्ती करते, गीत गाते और घंटो ठंडाई पीसते थे। बटेश्वर में 1924 में जन्मे अटल बिहारी वाजपेयी के पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी और माता कृष्णा देवी थी। उन्होंने 1947 में कानपुर के डीएवी कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस में एमए किया था। पूरे यूनिवर्सिटी की मैरिट में अटल दूसरा स्थान था।

अटल ने डीएबी ले राजनीति शास्त्र से एमए किया और अपने पिता के साथ इसी कॉलेज से एलएलबी की पढ़ाई की थी। अटल सबसे पहले बाबा घाट पर 1947 को जनवरी की पहली तारीख को आए और फिर वह अक्सर यहां कर खो जाया करते थे।

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ठंड और कोहरे के बीच भोले की भक्ति

कानपुर डीएवी कॉलेज होस्टल के पीछे करीब आधा किलोमीटर की दूरी पर गंगा किनारे बने बाबा घाट, अटल का सबसे पसंददीदा घाट हुआ करता था। इस घाट के पास रहने वाले रमेश मल्लाह (85) ने बताया, अटल जी नववर्ष की भोर पहर अपने दोस्तों के साथ आ धमके। घना कोहरा था और ठंडी अपने चरम पर थी। बावजूद वह कपड़े उतारकर गंगा में डुबकी लगाई और फिर गंगा जल लेकर मंदिर में विराजे भगवान शिव की पूजा अर्चना के बाद पूरे 51 बेलपत्र चढ़ाए थे।

नववर्ष पर पीसी थी अटल ने ठंडई

रमेश ने बताया कि उनदिनों मेरी उम्र करीब 15 साल की हुआ करती थी। इसलिए इन्हें बहुत कुछ तो याद नहीं है, लेकिन अटल अपने सभी दोस्तों में सबसे चंचल स्वभाव के हुआ करते थे। नये साल पर कॉलेज में छुट्टी होने के चलते अपने दोस्तों के साथ जब अटल आए तो सबने ठंडाई बनाने का फैसला किया। अपने दोस्त के घर से सिलबट्टा मांगा और 3 किलो दूध पैसा एक आना देकर लिया। उन सबके आते ही हम भी उनके पास पहुंच गए। उन्होंने हमसे चीनी मांगी और कहा कि इसके बदले दो गिलास ठंडाई देंगे। इस बुजुर्ग के अनुसार, उस दिन अटल जी ने पहली बार इस घाट पर ठंडाई पीसी थी। वो पूरा मूड में थे, खूब गीत गा रहे थे।

आज भी शिवलिंग है मैजूद

जिस घाट पर कभी अटल कई घंटे अपने मित्रों के साथ बैठकर समय बिताया था, आज वो बदहाल है। हांलाकि वर्तमान में इस घाट पर काफी बदलाव आ चुका है। यहां पर एक मोहल्ला बस चुका है, लेकिन उस समय का शिवलिंग आज भी यहां मौजूद है। रमेश बताते हैं कि जब अटल पीएम बने तब इनके दोस्तों को उनके साथ मस्ती करने वाला आज कामयाब हो चुका है। इस बात की खुशी हुई। राजेश ने कहा कि ये हम सबके लिए गौरव की बात है कि वो ना केवल देश के पीएम रहे हैं, बल्कि उन्हें भारत रत्न से भी सम्मानित किया जा चुका है।

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