
अंग्रेजों ने जिस स्वतंत्रता सेनानी को भेजा था जेल, उनकी अंतिम विदाई पर रो पड़ा सारा क्षेत्र
अरविन्द वर्मा
कानपुर देहात. देश को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने के लिये देश के जाने कितने वीर सपूतों ने अपनी कुर्बानी दी थी। तब जाकर सोने की चिड़िया कहा जाने वाला भारत देश सुख चैन की सांसे ले रहा है। ऐसे ही झींझक निवासी 91 वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी राजाराम श्रीवास्तव ने देश को आजाद कराने में अहम भूमिका निभाई थी। जो अब इस दुनिया से विदा हो गए। उनके पार्थिव शरीर को समूचे क्षेत्र के लोगों ने भीगी पलकों से विदाई दी। वहीं राजकीय सम्मान के साथ गार्ड ऑफ ऑनर देते हुये उनके पैतृक गांव भंदेमऊ मे उनका अंतिम संस्कार किया गया। बताया गया कि आजादी की जंग में राजाराम ने महात्मा गांधी के साथ अंग्रेजों के खिलाफ जंग छेड़ी थी। जिस पर अंग्रेजों ने उन्हें जेल भेजा था। बीमारी के चलते उनके निधन पर समूचे जिले मे शोक की लहर दौड़ गई।
लंबी बीमारी के बाद राजाराम ने ली अंतिम सांस
जिले के संदलपुर ब्लाक के भंदेमऊ गांव निवासी स्वतंत्रता सेनानी राजाराम श्रीवास्तव वर्तमान में झींझक नगर के स्टेशन रोड पर ओमनगर में निवास करते थे। लम्बे अरसे से वह बीमार चल रहे थे, 91 वर्ष की अवस्था में अब वह
चलने फिरने में असमर्थ हो चुके थे। उल्टी दस्त होने के चलते अचानक उनकी हालत बिगड़ गयी। उनका नाती प्रखर उन्हें सीएचसी ले गया, जहां डाक्टर ने इलाज किया, लेकिन इस दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। डॉक्टर द्वारा मौत
की पुष्टि के बाद परिजन शव लेकर घर आ गये। जिसके बाद समूचे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गयी।
आजादी की जंग मे अछल्दा स्टेशन पर उखाड़ी थी पटरी
बात उस समय की है जब अंग्रेजी हुकूमत की बर्बरता से पूरे देश में हाहाकार मचा हुआ था। लोग गुलामी की जंजीरों में जकड़े हुए थे। आजादी की चिंगारी फूट चुकी थी। देश के सपूत घरों से निकलकर अंग्रेजों से मोर्चा लेने को तैयार थे। 11 जुलाई 1927 में जन्मे राजाराम श्रीवास्तव में भी आजादी की लौ भड़क उठी थी और 1942 के आंदोलन में वे जंग में कूद पड़े थे। परिजनों के अनुसार इस दौरान उन्होंने अंग्रेजी सेना को रोकने के लिये अछल्दा स्टेशन पर लाव लश्कर के साथ पहुंचकर पटरी उखाड़ दी थी। तभी वहां पहुंचे अंग्रेजी अफसरों ने उन्हें गिरफ्तार कर इटावा जेल में डाल दिया था। 6 महीने बाद जेल से छूटने पर वह गांधी जी से मिलकर आजादी की लड़ाई में जोरदार तरीके से शामिल हो गये थे। देश आजाद होने के बाद से वह अनवरत समाज सेवा में लीन हो गये थे और अब देश की इसी मिट्टी में विलीन हो गए।
राष्ट्रध्वज में गार्ड आफ ऑनर के साथ दी गयी अंतिम विदाई
उनके निधन के बाद सूचना मिलते ही सैकडों की संख्या में लोग उनके निजी आवास पर एकत्रित हो गये। समूचे क्षेत्र वासियों की आंखे छलक उठीं। इसके बाद परिजन उनके पार्थिव शरीर को पैतृक गांव भंदेमऊ ले गये, जहां गार्ड आफ ऑनर देकर राजकीय सम्मान के साथ अफसरों व गणमान्य लोगों ने स्वतत्रता संग्राम सेनानी को अंतिम विदाई दी। वहीं पुलिस के जवानों ने सलामी दी। इसके बाद पुत्र अजय ने मुखाग्नि देकर उन्हें मुक्ति दी।
Published on:
28 Nov 2017 08:35 am

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