1931 के बाद शहर में दूसरा सबसे बड़ा दंगा 1975 में तकिया पार्क में हुआ था। तकिया पार्क निवासी स्वदेश कुमार ने बताया कि पंद्रह अगस्त का दिन था। मोहल्ले के लोग पार्क में ध्वाजा रोहण के लिए इकठ्ठा हुए थे। तभी मोहल्ले के रमजानी सहित कई मुस्लिम समुदाय के लोग पार्क में आ धमके और ध्वाजा रोहण नहीं करने पर अड़ गए। हिन्दुओं ने जब जबरन तिरंगा फहराया तो सैकड़ों की तादात में ताकिया पार्क, शिवसहाय रोड, बजरिया, चमनगंज के मुस्लिम समुदाय के लोग पार्क में आ गए और दोनों तरफ से जमकर पत्थरबाजी हुई। प्रशासन ने तकिया पार्क में कफ्र्यू लगा दिया। एक माह तक पूरे इलाके पर कफ्र्यू लगा रहा, बावजूद जब दंगा नहीं शांत हुआ तो कैंट से आर्मी बुलानी पड़ी थी। इस दौरान दंगे की चपेट में आने से रमेश बाल्मीकि के बैटे कल्लू, गंगा साहू के भाई रघुबीर, अर्चना बाल्मीकि के पति दीपक बाल्मीकी की जान गई थी।