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75 साल पहले ठहर गया था मजदूरों का शहर, रंगबाजों के आगे अंग्रेजों को करना पड़ा था सरेंडर

1942 में हटिया में फहराया था तिरंगा, 45 क्रांतिकारियों की गिरफ्तारी के बाद घरों से बाहर निकले थे लोग

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 1942 में हटिया में फहराया था तिरंगा, 45 क्रांतिकारियों की गिरफ्तारी के बाद घरों से बाहर निकले थे लोग

कानपुर। जब भारत गुलामी की जंजीरो से आजाद होने के लिए संघर्ष कर रहा था, तब कानपुर के बिठूर से विद्रोह की ज्वाला धधकी। नानराव, तात्या टोपे, रानी लक्ष्मबाई, भगतसिंह राजगुरू और पंडित चंद्रशेखर ने गोरों के छक्के छुड़ा दिए तो हटिया के रंगबजों ने अंग्रेजी हुक्मरानों के मना करने के बावजूद होली के दिन ना केवल जमकर होली खेला था, बल्कि हटिया बाज़ार के पार्क में तिरंगा भी लहरा दिया था। इससे गुस्साए अंग्रेज सैनिक ने करीब 45 क्रांतिकारी युवाओं को होली के दिन ही गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया था। जिसे छुड़ाने के लिए मजदूरों की शहर खड़ा हो गया। कारखानें, दुकानें और सरकारी दफ्तारों में तले पढ़ गए। जिसके चलते अंग्रेज हुक्मरान डर गए और रंगबाजों को छोड़ा। जेल से बाहर आते ही भैंसों के ठेलों पर उन्हें बैठाकर पूरे शहर में घुमाया गया और गंगाघाट में जाकर होली बनाई गई। मजहबी, ऊंच, जाति व गोत्र के बंधन से मुक्त लाखों की संख्या में कनपुरिया रंगों की धार में तार - तार हो गए । कोई धर्म, जाति या अन्य धार्मिक संगठन नहीं होगा दो आज इस गंगा मेला में भागीदार न बना हो ।
45 रंगबाजों को किया था गिरफ्तार
हटिया बाजार के कैलाश नाथ ने बताया कि गंगा मेले की आयोदन की नींव 1942 को पड़ी थी, तब से लगातार गंगा मेले का आयोजन किया जाता है। इस मेले में सभी धर्म के लोग एक ही रंग में रंगे होते है। बताया, होली के दिन हटिया बाजार में मौजूद रज्जन बाबू पार्क में यहां के नौजवानों ने अंग्रेजी हुकूमत की परवाह किए बगैर तिरंगा फहराकर गुलाल उड़ाकर नाच गा रहे थे। तभी इसकी भनक अंग्रेजी हुक्मरानों को लग गई। इसके बाद करीब एक दर्जन से भी ज्यादा अंग्रेज सिपाही घोड़े पर सवार होकर आए और झंडा उतारने लगे। नौजवानों ने किया झंडा उतारने को विरोध किया तो अंग्रेज सिपाहियों ने उन नौजवानों को इस पार्क में घेरकर बुरी तरह से पीटा। तिरंगा फहराने और होली मनाने के विरोध में उन दिनों गुलाब चंद्र सेठ, बुद्धूलाल मेहरोत्रा, नवीन शर्मा, विश्वनाथ टंडन, हमीद खान और गिरिधर शर्मा सहित करीब 45 लोगों को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया।
बापू से लेकर नेहरू तक उतर आए थे सड़क पर
अंग्रेजों का ये कदम उनके लिए गले की हड्डी बन गई। गिरफ्तारी के विरोध में कानपुर का पूरा बाजार बंद हो गया। कानपुर के मजदूर, साहित्यकार, व्यापारी और आम जनता ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया। समूचा कानपुर का बाजार बंद हो गया। मजदूरों ने फैक्ट्री में जाने से मना कर दिया। ट्रांस्पोटरों ने ***** जाम कर दिया। सरकारी कर्मचारियों ने भी काम बंद कर दिया। शहर के एक-एक दूकान में कारोबारियों ने ताला जड़ दिया। इतना ही नहीं, उस समय लोगों ने अपने- अपने चेहरे के रंग नहीं उतारे। लोगों के इस आंदोलन को देख अंग्रेज हुक्मरानों की नींद उड़ गई।इस आंदोलन में गणेश शंकर विद्यार्थी, दयाराम मुंशी, हशरत मोहानी जैसे क्रांतिकारी अगुवाई करने लगे। पंडित जवाहर लाल नेहरू और महात्मा गांधी ने भी कानपुर के आंदोलन का पूरा समर्थन किया।
बाहर आकर छुड़ाया था चेहरे से रंग
अंग्रेजों ने हटिया बाजारर के रहने वाले पारस शर्मा के मुताबिक, हड़ताल के चौथे दिन अंग्रेज का एक वरिष्ठ अफसर ने यहां आकर लोगों से बात की। इसके बाद होली के पांचवें दिन अनुराधा नक्षत्र के दिन सभी पकड़े गए युवकों को रिहा किया गया। अनुराधा नक्षत्र के दिन जब नौजवानों को जेल से रिहा किया जा रहा था, तब पूरा शहर उनके लेने के लिए जेल के बाहर इकठ्ठा हो गए थे। जेल से रिहा हुए क्रांतिवीरों के चहरे पर रंग लगे हुए थे। रिहा होने के बाद जुलूस पूरा शहर घूमते हुए हटिया बाजार में आकर खत्म हुआ। इनके रिहाई को लेकर यहां जमकर होली खेली गई। इसके बाद यहां होली के दिन से अनुराधा नक्षत्र तक लगातार पांच दिनों तक होली मनाये जाने की परंपरा बरकरार है।
पुलिस ने कमर कसी
गंगा मेला के आयोजन को शांतिपूर्वक संपन्न कराने के लिए पुलिस ने कमर कस ली है। ं सीओ अजय कुमार ने होली मेला कमेटी के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर कार्ययोजना पर चर्चा की। हटिया में निकलने वाले रंग के ठेले, सरसैया घाट पर मेले व बिरहाना रोड पर मटकी फोड़ आयोजनों में सुरक्षा की भी रूपरेखा बनाई गई। सीओ ने कहा कि प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। मिश्रित आबादी वाले इलाकों में रूफटॉप ड्यूटी भी लगाई जाएगी। मीटिंग में महोत्सव कमेटी के संरक्षक मूलचंद्र सेठ, ज्ञानेंद्र विश्नोई, अरुण अग्रवाल, शरद दुबे आदि पदाधिकारी व कोतवाली, मूलगंज, छावनी और फीलखाना थाने के निरीक्षक मौजूद रहे। महोत्सव कमेटी के संरक्ष मूलचंद्र सेठ ने बताया कि गंगा मेला में सभी जाति, धर्मो के लोग बड़चड़ का हिस्सा लेते हैं। 75 साल से बदस्तूर गंगा मेले का आयोजन चला रहा है और यहां कभी विवाद नहीं हुआ।

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