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सिर के बालों से बनेगी जैविक खाद और कीटनाशक, शहर में लगाया जाएगा प्लांट

सैलून से ४० रुपए किलो के भाव पर खरीदे जाएंगे कटे हुए बालनाई जगह-जगह नहीं फेकेंगे बाल, सफाई को मिलेगा बढ़ावा

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सिर के बालों से बनेगी जैविक खाद और कीटनाशक, शहर में लगाया जाएगा प्लांट

कानपुर। हमारे सिर के बाल कहां-कहां काम आ सकते हैं, कभी सोचा है? अब इन बालों की मदद से जैविक खाद और कीटनाशक तैयार किए जा सकेंगे। इसके अलावा सैलून संचालकों की भी अतिरिक्त कमाई हो सकेगी। खादी, ग्रामोद्योग मंत्री सत्यदेव पचौरी के प्रयास से शहर से अमीनो एसिड बनाने का प्लांट लगाया जाएगा।

सैलून वालों की बढ़ेगी आय
हमलोग सैलून में बाल छोटे करा कर चले आते हैं। सैलून वाले भी ये बाल फेंक देते हैं। कानपुर समेत यूपी के कई शहरों में अब ऐसा नहीं होगा। यहां सैलून वाला बाल काटने के पैसे तो लेगा ही, साथ ही इन्हें बेचकर भी मालामाल होगा। जी हां, शहर में बाल कलेक्शन सेंटर खोलने की तैयारी है। इसके तहत हरित खादी संस्था कलेक्शन सेंटरों के जरिए 40 रुपए किलो के हिसाब से बाल खरीदेगी।

तैयार होगा अमीनो एसिड
मानव बाल, गोबर और गौमूत्र के मिश्रण से अमीनो एसिड तैयार किया जाएगा। इसके लिए प्लांट भी लगाया जाएगा। हरित खादी के अफसरों का कहना है कि तीन मिश्रण (मानव बाल, गोबर, गौमूत्र) से तैयार होने वाला अमीनो एसिड मल्टीपरपज होगा। वैसे इस रयायन का सबसे अधिक उपयोग जैविक खाद बनाने में होगा। इसके अलावा कीटनाशक दवाइयां भी तैयार हो सकती हैं। इसका बहुआयामी उपयोग होगा। अमीनो एसिड बनाने का प्लांट लगाने का काम जल्द होगा।

कई शहरों में खुलेंगे कलेक्शन सेंटर
खादी, ग्रामोद्योग मंत्री सत्यदेव पचौरी ने बताया कि बाल खरीदने का सेंटर फरवरी या मार्च तक कानपुर सहित कई शहरों में खुल जाएंगे। इसके लिए समझौता भी हो चुका है। प्लांट लगाने वाली कंपनी को भी फायदा होगा। प्लांट में तैयार अमीनो एसिड 150 रुपए लीटर बिकेगी। यह राशि लागत मूल्य से कम है। अन्य जिलों, तहसील, ब्लाक फिर गांव स्तर पर भी बाल खरीद संकलन केंद्र खुलेंगे। इन बालों का उपयोग साफ-सफाई वाले ब्रश के अलावा अन्य चीजें बनाने में होगा। इसके लिए खादी, ग्रामोद्योग विभाग से समझौता हो चुका है।

सफाई को मिलेगा बढ़ावा
शहर में सैलून के अलावा कर्मकांड व धार्मिक स्थलों से करीब आठ कुंतल बाल निकलते हैं। ये बाल कूड़े में फेंके जाते हैं। हवा में उड़कर ये बाल इधर उधर जाते हैं और गंदगी फैलाते हैं। जिले में लगभग 1900 लोग बाल काटने के धंधे में है। धार्मिक, कर्मकांड व मुंडन संस्कारों में भी बाल निकलते हैं। अब ये बाल भी आमदनी का जरिया होंगे और स्वच्छता को बढ़ावा मिलेगा।

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