
डीजीपी पद के रूप में मिला ईमानदारी का ईनाम
कानपुर। डीएम यानी दुर्गेश माधव अवस्थी के मां-बाप मां पदमा और पिता डॉ. प्रकाश नारायण अवस्थी कल्याणपुर के चंद्र विहार मकड़ीखेड़ा में अपने दुमंजिले मकान में रहते हैं. डॉ. प्रकाश नारायण नवाबगंज स्थित वीएसएसडी कॉलेज में हिंदी के विभागाध्यक्ष्ा रहे. वर्ष 1992 में सेवानिवृत होने के बाद से वह चंद्र विहार में रह रहे हैं.
ऐसी है जानकारी
वे कहते हैं कि ईमानदारी और जोखिम लेने का ईनाम छत्तीसगढ़ के डीजीपी के रूप में मिला. एमपी और छत्तीसगढ़ के कई नक्सलियों और बड़े अपराधियों पर कार्रवाई से वे कभी पीछे नहीं हटे. इसी का परिणाम है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने डीएम पर भरोसा जताकर पुलिस विभाग के सबसे बड़े ओहदे से नवाजा है. यह बताते हुए दोनों की आंखें भर आई. दोनों ने कहा कि अच्छे कर्मों का परिणाम है कि बड़ा बेटा डीजीपी बन गया. मां ने बताया कि 25 जनवरी को उनके पौत्र विश्रुत यानी डीएम अवस्थीके बेटे की शादी है.
नक्सलियों के लिए बने खौफ
डॉ. अवस्थी ने बताया कि दुर्गेश ने 100 से ज्यादा नक्सलियों को मुठभेड़ में मार गिराया है. रमन सिंह सरकार में उन्हें नक्सलियों के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन प्रहार की कमान सौंपी गई थी. दुर्गेश ने सतना, रायपुर, इंदौर, छिंदवाडा, उज्जैन समेत कई जिलों में कप्तान रहते हुए कई नक्सलियों को धराशाही किया.
किया ये भी बड़ा काम
इंदौर के बालादेव नाम के शातिर को पकड़ने को कोई अफसर तैयार नहीं था. तत्कालीन सीएम दिग्विजय सिंह के आदेश पर दुर्गेश ने बालादेव को गिरफ्तार किया था. उसे घर से थाने तक हथकड़ी लगाकर पैदल लेकर आए थे. इसके बाद जब छत्तीसगढ़ राज्य बना तो उन्होंने नक्सल प्रभावित होने की वजह से उसे ही चुना. दुर्गेश के पिता डॉ. प्रकाश नारायण अवस्थी कहते हैं कि मुझे अपने बेटे पर फक्र है. उन्होंने बताया कि बचपन से ही दुर्गेश के मन में देश के प्रति कुछ करने की ललक थी, इसके लिए उसने पुलिस की जॉब को चुना.
Published on:
22 Dec 2018 03:23 pm

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