
आईआईटी : प्रोफेसरों की पत्नियां उतरीं धरना-प्रदर्शन पर
कानपुर। आईआईटी में दलित असिस्टेंट प्रोफेसर के उत्पीड़न में चार वरिष्ठ प्रोफेसरों पर हुई एफआईआर के बाद विवाद लगातार बढ़ता ही जा रहा है. बुधवार को चारों प्रोफेसरों के पक्ष में जहां बड़ी संख्या में प्रोफेसरों ने असहयोग आंदोलन की शुरुआत कर प्रशासनिक कामकाज बंद कर दिया तो कई प्रोफेसरों की पत्नियों ने बच्चों के साथ निदेशक कार्यालय के बाहर धरना दिया. इस बारे में महिलाओं का कहना है कि जब जांच में प्रोफेसरों को एससी-एसटी को दोषी नहीं पाया गया है तो उनके खिलाफ एफआईआर क्यों की गई.
ऐसा आ रहा है चर्चा में
आईआईटी कानपुर पिछले कुछ माह से अपनी पढ़ाई और रिसर्च के बजाए विवाद को लेकर अधिक चर्चा में है.एयरोस्पेस विभाग के दलित असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सडरेला ने चार वरिष्ठ प्रोफेसर के खिलाफ़ दलित उत्पीड़न की शिकायत की थी. इसमें एक प्रोफेसर आईआईटी धनबाद के निदेशक भी हैं. इस मामले में जांच कमेटी गठित की गई है. इसमें चार प्रोफेसरों को दोषी पाया गया है. ये मामला एससी-एसटी आयोग तक पहुंचा. यहां कड़ी कार्रवाई कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए. इस पूरे मामले को बीओजी में भी रखा गया.
दिया गया ऐसा आदेश
बीओजी में इन चारों प्रोफेसरों के खिलाफ़ कार्रवाई का आदेश दिया गया, लेकिन उन्हें एससी, एसटी का आरोपी नहीं माना. इसके बावजूद कुछ दिन पहले डॉ. सडरेला ने कल्याणपुर थाना में एससी-एसटी उत्पीड़न का मामला दर्ज करा दिया. एफआईआर होते ही संस्थान में हड़कंप मच गया. चारों आरोपी प्रोफेसरों के पक्ष में फैकल्टी फोरम और स्टूडेंट फोरम ने आपातकालीन बैठक बुलाकर सपोर्ट करने का फैसला लिया. इसी के तहत सोमवार देर रात कई प्रोफेसरों ने निदेशक से मुलाकात की और कई मांगें सामने रखीं. निदेशक ने सभी मांगों को मानने से इंकार कर दिया.
इस धरना-प्रदर्शन को ठहराया गलत
निदेशक प्रो. अभय करंदीकर ने महिलाओं के धरना प्रदर्शन को गलत ठहराया. उन्होंने इस बारे में महिलाओं को सलाह दी कि आप विरोध करके इस मामले को उछाल रहे हैं. इससे इस मामले का निस्तारण सही ढंग से नहीं हो पाएगा. उन्होंने सभी को शांत करने की सलाह दी. इसके बाद निदेशक ने मामले को शांत कराने के लिए डींस के साथ बैठक शुरू कर दी है.
Published on:
22 Nov 2018 02:52 pm
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