
गरीबों की सेवा के नाम पर टैक्स चोरी का बड़ा खेल
कानपुर। समाजसेवा की आड़ में टैक्सचोरी का खेल खेलने वालों पर आयकर विभाग सख्त हो गया है। ट्रस्ट और एनजीओ के पास बड़ी मात्रा में कालाधन होने के संकेत मिले हैं। शहर में ही ट्रस्ट और एनजीओ ने 500 करोड़ रुपए समाजसेवा के नाम पर खर्च कर दिए। इतनी बड़ी रकम पर टैक्स छूट की रिपोर्ट ने आयकर विभाग के कान खड़े कर दिए हैं। अब ट्रस्ट-सोसाइटी की जांच सर्वोच्च प्राथमिकता पर की जाएगी।
नेक काम की आड़ में किया खेल
प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त (आयकर छूट) प्रमोद कुमार गुप्ता ने बताया कि समाजसेवा करने वालों को टैक्स छूट देने की अवधारणा बहुत अच्छी है क्योंकि हर काम सरकार नहीं कर सकती। गरीबों और जरूरतमंदों की मदद के लिए समाज को प्रोत्साहित करने के लिए इसे लाया गया था। लेकिन अब इस नेक काम में टैक्स चोरों ने सेंध लगा दी है। आजादी के 70 साल बाद भी हजारों संस्थान लगातार टैक्स में छूट ले रहे हैं। इस तरफ किसी का ध्यान ही नहीं गया। सोसाइटी और ट्रस्ट की आड़ में टैक्स चोरी के खेल की जांच की जाएगी।
पकड़ा जा चुका बड़ा गोलमाल
टैक्स छूट लेने वालों में पहले नंबर पर शिक्षण संस्थान हैं। दूसरे नंबर पर धर्मार्थ संस्थान और ट्रस्ट हैं। तीसरे नंबर पर स्वास्थ्य से जुड़े ट्रस्ट हैं। पिछले वित्तवर्ष में सोसाइटी और ट्रस्ट की जांच हुई तो भारी गोलमाल पकड़ा गया। ऐसे संस्थानों पर कार्यवाही कर 4000 करोड़ रुपए का टैक्स वसूला गया। कानपुर में 260 से ज्यादा संस्थान संदिग्ध श्रेणी में हैं। हर साल 500 करोड़ से ज्यादा की कमाई पर टैक्स चोरी का संदेह है।
छूट के जरिए हो रही टैक्स चोरी
प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त प्रमोद कुमार गुप्ता का कहना है कि आयकर छूट को टैक्स चोरी का जरिया बना लिया गया है। समाजसेवा के नाम पर गठित संस्थान हर साल करीब 30 लाख करोड़ से भी ज्यादा की रकम पर टैक्स छूट ले रहे हैं। मगर सोचने वाली बात यह है कि अगर इतनी बड़ी रकम केवल गरीबों के कल्याण पर खर्च की जा रही हो तो फिर गरीबों की स्थिति में जरूर कुछ न कुछ सुधार देखने को मिलता पर ऐसा नहीं है। यानि गरीबों के नाम पर से संस्थान अपना कल्याण कर रहे हैं।
Published on:
27 Apr 2019 02:13 pm
बड़ी खबरें
View Allकानपुर
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
