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कानपुर और बुंदेलखंड में क्यों पड़ती है रिकॉर्ड तोड़ गर्मी? जानिए 5 बड़े कारण

Extreme heat Uttar Pradesh:कानपुर-बुंदेलखंड में भीषण गर्मी के मुख्य कारण: कर्क रेखा से निकटता, समुद्र से दूरी वाली महाद्वीपीय जलवायु, राजस्थान से आने वाली लू, कम बारिश से सूखी जमीन और कानपुर में अर्बन हीट आइलैंड प्रभाव।

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सांकेतिक फोटो

Kanpur and Bundelkhand heat reasons : अगर आप यूपी के कानपुर या बुंदेलखंड में रहते हैं तो मई-जून की दोपहरी आपको याद होगी. पारा 45°C पार कर जाता है, सड़कें तपने लगती हैं और लू के थपेड़े सांस लेना मुश्किल कर देते हैं. मौसम विभाग भी हर साल यहां के लिए रेड अलर्ट जारी करता है. लेकिन आखिर इस इलाके में इतनी भीषण गर्मी पड़ती क्यों है? इसकी वजह सिर्फ सूरज नहीं, बल्कि भूगोल से लेकर शहरीकरण तक 5 बड़े फैक्टर हैं.

कर्क रेखा का सीधा असर

बुंदेलखंड का ज्यादातर हिस्सा कर्क रेखा यानी Tropic of Cancer के बेहद करीब है. 21 जून के आसपास सूरज इस रेखा पर लंबवत चमकता है. नतीजा: झांसी, महोबा, बांदा जैसे जिलों में धूप सीधे सिर पर पड़ती है. जमीन और हवा दोनों तेजी से तपते हैं. यही वजह है कि बुंदेलखंड अक्सर देश के सबसे गर्म इलाकों की लिस्ट में रहता है. झांसी

समुद्र से दूरी बनी काल:महाद्वीपीय जलवायु

कानपुर समुद्र से सैकड़ों किलोमीटर दूर है. समुद्र का ठंडा असर यहां तक पहुंच ही नहीं पाता. इसे 'कॉन्टिनेंटल क्लाइमेट' कहते हैं. इसका नियम सीधा है: गर्मी में हद से ज्यादा गर्मी और सर्दी में हड्डी गला देने वाली ठंड. नमी न होने से गर्मी शरीर को और ज्यादा चुभती है।

राजस्थान से आने वाली 'लू' का पहला पड़ाव

अप्रैल-मई में राजस्थान का थार रेगिस्तान भट्टी बन जाता है. वहां से चलने वाली गर्म-शुष्क पछुआ हवाएं यानी 'लू' सबसे पहले बुंदेलखंड और कानपुर मंडल से टकराती हैं. ये हवाएं 45-48°C तापमान लेकर आती हैं. खुले मैदान और कम पेड़ होने से लू को रोकने वाला कुछ नहीं होता. इसलिए दोपहर 12 बजे के बाद बाहर निकलना खतरे से खाली नहीं.

कम बारिश और सूखी जमीन

बुंदेलखंड को अर्ध-शुष्क क्षेत्र माना जाता है. यहां औसत बारिश बाकी यूपी के मुकाबले कम होती है. जमीन में नमी न होने से मिट्टी 2 मिनट में तवा बन जाती है. सूखी मिट्टी सूरज की गर्मी को रिफ्लेक्ट करने की बजाय सोख लेती है. इससे जमीन से लगकर चलने वाली हवा का तापमान 2-3°C और बढ़ जाता है.

कानपुर का 'अर्बन हीट आइलैंड' इफेक्ट

कानपुर एक बड़ा औद्योगिक शहर है. कंक्रीट की इमारतें, तारकोल की सड़कें और गाड़ियों का धुआं मिलकर 'अर्बन हीट आइलैंड' बनाते हैं. दिन में कंक्रीट गर्मी सोख लेता है और रात को धीरे-धीरे छोड़ता है. इसलिए रात का तापमान भी 32-34°C से नीचे नहीं गिरता. AC और वाहनों से निकलने वाली गर्मी इसे और बढ़ा देती है.

मौसम विशेषज्ञ की सलाह

मौसम विभाग के अनुसार, कानपुर-बुंदेलखंड की गर्मी से बचने का एक ही तरीका है: दोपहर 12 से 4 बजे तक घर में रहें, सूती कपड़े पहनें और पानी-ORS लेते रहें. आने वाले सालों में शहरीकरण और पेड़ों की कटाई से यह समस्या और बढ़ सकती है.