कानपुर में दशानन मंदिर है। दशानन मंदिर के कपाट आज विजयदशमी के दिन सूर्योदय के साथ खोला गया और सूर्यास्त के पहले ही बंद कर दिए गए। सुबह भक्तों ने गंगाजल से स्नान कर भव्य श्रृंगार किया। मनोकामना पूरी करने के लिए तेल के दीये जलाए। भक्तों ने कहा सबकी मनोकामना पूरी होती है। जनाब दशानन मंदिर कानपुर रेलवे स्टेशन से सड़क मार्ग से जुड़ा है और आसानी से पहुंचा जा सकता है।
विजयदशमी के अवसर पर जहां रावण के पुतले को फूटने की परंपरा है। वहीं उत्तर प्रदेश के कानपुर में रावण का एक ऐसा मंदिर है। जहां आज उनकी आरती होती है। सियापति रामचंद्र की जय के नारे लगते हैं, लंकापति नरेश की जय के भी नारे लगते हैं। दशहरा के दिन सुबह रावण के मंदिर को खोला जाता है। पूजा अर्चना होती है और भक्तगण तेल के दीए जलाकर अपनी इच्छा को पूरी करने का आशीर्वाद लेते हैं। बड़ी संख्या में आज भक्तगण पूजा अर्चना के लिए दशानन मंदिर पहुंचे। शाम को मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं।
कानपुर के शिवाला में 100 साल पुराना दशानन मंदिर है। जिसे विजय दशमी के दिन खोला जाता है। आज सुबह भी परंपरा के अनुसार दशानन मंदिर के पट खोले गए। जहां भक्तों ने उन्हें गंगाजल से स्नान कराया और भव्य श्रृंगार किया। दशानन मंदिर में तेल का दिया जलाने की परंपरा है। जहां भक्तगण मनोकामना पूरी करने की इच्छा को लेकर तेल के दीपक जलाते हैं। रावण की विद्वता की चर्चा सभी के जवान पर है। आज के दिन नीलकंठ पंछी के दर्शन करना भी शुभ माना जाता है। भक्तों के अनुसार दशानन मंदिर में विजयदशमी के दिन नीलकंठ पंछी के दर्शन भी भी होते हैं। उल्लेखनीय है दशानन का मंदिर शिवाला में मां छिन्नमस्तिका देवी के निकट स्थापित है। मंदिर के पट विजयदशमी के दिन सूर्योदय के साथ खुलते हैं और सूर्यास्त के पहले ही बंद कर दिया जाता है।
कैसे पहुंचा जाए दशानन मंदिर
दशानन मंदिर बड़े चौराहा के पास स्थित शिवाला में है। जहां आने के लिए सड़क मार्ग से सुगम साधन उपलब्ध है। कानपुर शहर के किसी भी कोने से आसानी से पहुंचा जा सकता है। झकरकटी बस अड्डे से भी दशानन मंदिर आने के लिए साधन उपलब्ध है।
भारी बारिश ने रावण दहन में डाला व्यवधान
आज पूरा देश विजयदशमी मना रहा है। जगह जगह रावण का पुतला दहन किया जा रहा है। कानपुर के रामलीला मैदान सहित कई स्थानों पर भारी भरकम रावण का पुतला बनवाया गया था। लेकिन बारिश के कारण कार्यक्रम में व्यवधान उत्पन्न हो गया। रावण का पुतला भी खराब हो गया। जगह जगह रावण के पुतले को एक बार फिर से दुरुस्त किया जा रहा है।