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कानपुर एेसा शहर जहां इतिहास के धरोहरों के बारे में मिलती है जानकारी

श्री राधाकृष्ण मंदिर, जैन मंदिर, द्वारका मंदिर, मक्का मस्जिद, कानपुर मेमोरियल चर्च आदि एेसे दर्शनीय स्थल हैं जहां जाकर आपको बार-बार आने का मन करेगा।

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Ashish Kumar Pandey

Jul 22, 2016

kanpur

kanpur

कानपुर.
वैसे तो हर शहर अपने आप में अलग ही होता है। उस शहर की अपनी विशेषताएं भी
होती हैं। यूपी में कानपुर का अलग ही महत्व है। कभी यह शहर अपने
उद्योग-धंधों के लिए जाना जाता था। इसे यूपी का मैनचेस्टर भी कहा जाता है।
एक समय था यहां लोग रोजगार के लिए आते थे।


एेसा नहीं है कि इस शहर में लोग
रोजगार के लिए ही आते थे या आते हैं। यह शहर पर्यटन की दृष्टि से भी काफी
अच्छा है। आप देश के कर्इ हिस्सों में घूमने भले ही गए हो लेकिन कानपुर में
भी घूमने के लिए एक बार आएं। यहां आने वाले पर्यटक निराश नहीं होंगे। यहां
पर्यटन के लिहाज से कर्इ स्थान एेसे हैं। जहां आप जा सकते हैं और देश की
धरोहर के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं। यह शहर अपने आप में काफी कुछ
समेटे हुए है। तो आइए इस बार चलते हैं इस शहर के उन स्थानों पर जहां शायद
आप कभी गए नहीं होंगे।



श्री राधाकृष्ण मंदिर

इस मंदिर को जेके
मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर बेहतरीन वास्तुकला का एक
अद्भुत नमूना है। यह मंदिर पूरे शहर में दर्शनीय है। यहां पांच मुख्य देवता
विराजमान हैं। मध्य में राधा कृष्ण की प्रतिमा है। दूसरे चार देवताओं में
श्री लक्ष्मी नारायण, श्री अर्द्धनारीश्वर, श्री नर्मदेश्वर और श्री हनुमान
की प्रतिमा स्थापित है। यहां भक्तों की काफी भीड़ रहती है।



जैन
मंदिर
radha krishan tample
यह मंदिर कमला टॉवर के नजदीक महेश्वरी मोहाल के पास स्थित है।
पूरा मंदिर कांच का बना है। यह मंदिर एक अलग ही दृश्य प्रस्तुत करता है।
जैन समुदाय को समर्पित इस मंदिर में भगवान महावीर और दूसरे 23 तीर्थंकरों
की आराधना की जाती है। इसकी छतों, दीवारों और फर्श पर आप कांच की बेहतरीन
नक्काशी देख सकते हैं। यहां आने वाला भक्त इस मंदिर की सुंदरता को देखकर
उसकी काफी तारीफ करता है।


द्वारका मंदिर

यह मंदिर पूरी तरह भगवान
कृष्ण को समर्पित है। सावन में यहां झूला फेस्टिवल का आयोजन किया जाता है।
इस महीने में यहां श्रद्धालुओं की काफी भीड़ उमड़ती है। द्वारका मंदिर
दर्शनीय है।


कानपुर मेमोरियल
चर्च

1875 में बने इस गिरजाघर को आल सोल्स कैथेडरल भी कहा जाता है। इस
चर्च के भवन की बेहतरीन वास्तुकला यहां आने वाले हर किसी को अपनी ओर
आकर्षित करती है। इस भवन को लाल चटकीले ईटों से बनाया गया है। साथ ही
रंग-बिरंगे ईंटों से बनाया गया है। इसमें रंग-बिरंगे ईंटों का भी बेहतरीन
तरीके से इस्तेमाल किया गया है। चर्च के अंदर उन सैनिकों की याद में कुछ
टेबल रखे गए हैं, जिन्होंने देश के लिए अपनी जान दे दी थी। इन टेबलों पर उन
शहीदों के नाम भी लिखे हैं। इस चर्च की खुबसुरती देखते ही बनती है। इसकी
नक्काशी बरबस ही लोगों को अपनी आेर खींचती है।


बिठूर

कानपुर से
20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस जगह को ब्रह्यव्रत भी कहा जाता है। रामायण
में भी महर्षि वाल्मीकि ने इस जगह के बारे में वर्णन किया है। उनके अनुसार
लव-कुश का जन्म बिठूर में ही हुआ था। लक्ष्मीबाई, अजीमुल्ला खान, नानाराव
पेशवा, मैनावती और तात्या टोपे ने आजादी की लड़ाई यहां से ही शुरू की थी।
नानाराव किला यहां के ऐतिहासिक जगहों में शामिल है। यहां इतिहास की कर्इ
धरोहरें आपको देखते को मिलती हैं।


मक्का मस्जिद
Kanpur
इस मंदिर की बनावट काफी अच्छी है। इसकी
सुंदरता देखते ही बनती है। शहर से पंद्रह किलोमीटर दूर स्थित इस मशहूर
मस्जिद को देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं।


जाजमउ

कानपुर से सटे गंगा नदी
के किनारे है। यहां चमडे के छोटे-बड़े उद्योग भी देखे जा सकते हैं। पर्यटक
स्थल की बात करें, तो यहां सिद्धनाथ और सिद्धा देवी का मंदिर दर्शनीय है।
यहां रोजना हजारों भक्त मंदिर में दर्शन को आते हैं। साथ ही फिरोजशाह तुगलक
का बनवाया संत शाह अला.उल.हक का मकबरा और मस्जिद भी यहां पर काफी अच्छा
बना है। इसे भी देखी जा सकती है।


इसके अलावा भी कानपुर में काफी कुछ
देखने आैर घूमने को है। रेव.3, रेव मोती, साउथ एक्‍स और जेड स्‍क्‍वायर
माॅल भी कानपुर की शान बढाते हैं। आप नानाराव पार्क में घूमने जा सकते हैं
और फूलबाग में संग्रहालय भी देख सकते हैं। आप मोतीझील में पिकनिक मना सकते
हैं और कानपुर से 25 किलोमीटर दूर शोभन में झील अौर मंदिरों के दर्शन कर
सकते हैं।


कब जायें


वैसे तो कानपुर आने के लिए आप को कोर्इ
खास महीने या दिनों को नहीं चुनना है। मगर यहां आने के लिए अक्टूबर से
मार्च तक का समय बेहतर है। कानपुर सड़क मार्ग से या ट्रेन से पहुंचा जा
सकता है।



कैसे जाएं


अगर आप दिल्ली से आ रहे हैं तो यहां
से कानपुर के लिए कर्इ रेल गाड़ी है। दिल्ली से यहां आने के लिए बस की
सुविधा भी अच्छी है। यहां आने के लिए साधन काफी उपलब्ध हैं।


यहां आकर आपको अच्छा लगेगा। यहां आपको इतिहास के बारे में काफी कुछ जानने आैर समझने को मिलेगा।