कानपुर से
20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस जगह को ब्रह्यव्रत भी कहा जाता है। रामायण
में भी महर्षि वाल्मीकि ने इस जगह के बारे में वर्णन किया है। उनके अनुसार
लव-कुश का जन्म बिठूर में ही हुआ था। लक्ष्मीबाई, अजीमुल्ला खान, नानाराव
पेशवा, मैनावती और तात्या टोपे ने आजादी की लड़ाई यहां से ही शुरू की थी।
नानाराव किला यहां के ऐतिहासिक जगहों में शामिल है। यहां इतिहास की कर्इ
धरोहरें आपको देखते को मिलती हैं।