10 अप्रैल 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

साइबर ठग्स के आगे कानपुर पुलिस के सभी ‘सॉफ्टवेयर’ हुए फेल

आज के समय में साइबर क्रिमिनल्स किस कदर शातिर हो चुके हैं इस बात का अंदाजा तो आईआईटी के खाते से रकम उड़ाने की घटना से लगाया ही जा सकता है. दुनिया में टेक्नोलॉजी का एक्सपर्ट माना जाने वाला आईआईटी साइबर फ्रॉड से नहीं बच सका तो आम आदमी के लिए यह कितना मुश्किल होगा, ज़रा सोचिए.

2 min read
Google source verification
Kanpur

साइबर ठग्स के आगे कानपुर पुलिस के सभी ‘सॉफ्टवेयर’ हुए फेल

कानपुर। आज के समय में साइबर क्रिमिनल्स किस कदर शातिर हो चुके हैं इस बात का अंदाजा तो आईआईटी के खाते से रकम उड़ाने की घटना से लगाया ही जा सकता है. दुनिया में टेक्नोलॉजी का एक्सपर्ट माना जाने वाला आईआईटी साइबर फ्रॉड से नहीं बच सका तो आम आदमी के लिए यह कितना मुश्किल होगा, ज़रा सोचिए. दूसरा पुलिस के पास साइबर क्राइम को रोकने के लिए कोई तैयारी नहीं है. टेक्नोलॉजी जहां साल दर साल अपडेट होकर जी, टूजी, थ्री जी से फोर जी तक पहुंच गई है. वहीं शहर की पुलिस अभी भी पुराने ढर्रे पर चलने को मजबूर है. न तो उनके पास साइबर एक्सपर्ट्स हैं और ना इसके लिए कोई बजट. इसी का पूरा फायदा उठाते हैं साइबर क्रिमिनल्स.

ऐसा हुआ साबित
शहर की पुलिस साइबर क्राइम के मामलों का खुलासा करने में फिसड्डी है. पुलिस शायद ही साइबर क्राइम के किसी मामले का खुलासा कर पाई है. ऐसे में अगर मामला चर्चित या बड़ा क्राइम होता है तो पुलिस मामले के ठंडा पड़ने तक उसकी जांच जारी रखती है. इसकी पुष्टि पुलिस रिकॉर्ड से हो सकती है. आइये आपको बताते है कि पुलिस क्यों साइबर क्राइम का खुलासा करने में असफल होती है.

हर रोज बढ़ रहा है ग्राफ
देश में नोटबंदी के बाद साइबर क्राइम का ग्राफ तीन से चार गुना बढ़ गया है. शहर में औसतन साइबर क्राइम का एक से दो मुकदमा हर दिन दर्ज होता है, जबकि इन मुकदमों की जांच के लिए पुलिस विभाग के पास विवेचक ही नहीं है. जो विवेचक हैं भी वो टेक्नोलॉजी में इतने एक्सपर्ट नहीं हैं किसी मामले में नतीजे तक पहुंच सकें. एक विवेचक के पास 15 से 20 मुकदमे हर समय रहते हैं. इन सबके बीच विवेचक पर मामले को निस्तारित करने का भी दबाव रहता है. दबाव बढ़ने पर विवेचक फाइनल रिपोर्ट लगाकर मुकदमे को ही बंद कर देते हैं.

अभी भी ऐसे होता है काम
रिटायर्ड पीपीएस अफसर जितेंद्र सिंह बताते हैं कि आईटी एक्ट के मामलों का खुलासा करने के लिए हैकर की जरूरत पड़ती है. पुलिस विभाग में हैकर की कोई पोस्ट नहीं है. विवेचक को ही अपने लेवल से प्राइवेट हैकर को ढूंढकर उससे संपर्क करना पड़ता है. पुलिस कर्मियों को ट्रेंड करने के लिए हैकर से वर्कशॉप तो करवाई जाती है, लेकिन नए-नए सॉफ्टवेयर आने से पुलिस अपडेट नहीं हो पाती है. वे सेट सॉफ्टवेयर और फार्मूले पर काम करते हैं. सफलता मिलती है तो ठीक, वरना फाइनल रिपोर्ट लगाकर केस बंद.