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…जब घंटाघर में गरजे आरिफ मोहम्मद खान तब चल पड़ा मजदूरों का शहर

1980 में कांग्रेस के टिकट पर जीते थे चुनाव, चमनगंज स्थित ससुराल को बनाया था अपना दफ्तर, गंगा-जमुनी की बनें मिशाल।

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...जब घंटाघर में गरजे आरिफ मोहम्मद खान तब चल पड़ा मजदूरों का शहर

...जब घंटाघर में गरजे आरिफ मोहम्मद खान तब चल पड़ा मजदूरों का शहर

कानपुर। लंबे समय तक सक्रिय राजनीति से दूर रहे कांग्रेस नेता व कानपुर के पूर्व सांसद आरिफ मोहम्मद खान को Former MP Arif Mohammad Khan राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद President Ramnath Kovind ने केरल का राज्यपाल Governor of Kerala बनाया है। इसकी जानकारी जैसे ही मजदूरों के शहर को हुई तो लोग खासे गदगद नजर आए। कई सालों तक पूर्व सांसद के साथ काम कर चुके कलमकार व फिल्म गीतकार मोहम्मद असलम खान Mohammad aslam khan बताते हैं, जब पहली बार आरिफ मोहम्मद खान Arif Mohammad Khan कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में कानपुर पहुंचे तो उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उन्हें फूलबाग में रैली करने को कहा। लेकिन सैकड़ों लोगों की धड़कन घंटाघर ghantaaghar को उन्होंने रैलीस्थल के लिए चुना। उस वक्त उन्होंने बेहद क्लिष्ट हिंदी में भाषण दिया था। उन्होंने कहा था कि गंगा की इस पावन धरती पर मैं इंदिरा गांधी का भेजा सिपाही हूं। मुझे पता है कि देश का ये शहर अपनी गंगा-जमुनी तहजीब के लिए जाना जाता है और जब तक खान रहेगा तब तक मजदूरों के शहर में आपसी भाईचारा कायम रहेगा। खान की ये बात लोगों के दिल में बस गई और वो यहां से जीतकर संसद पहुंचे।

कौन है केरल के राज्यपाल
बुलंदशहर Bulandshahr के स्याना तहसील के बारीजोत गांव के मूल निवासी आरिफ मोहम्मद खान 1980 के दशक में कांग्रेस के टिकट से पहली बार कानपुर से लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज कर संसद पहुंचे थे। मोहम्मद असलम बताते हैं, कानपुर में उस वक्त मजदूर यूनियनों का बोलबाला था और आरिफ मोहम्मद खान ने अपनी पहचान कांग्रेस के बजाए एक मजदूर नेता के रूप में बनाई। रविवार का दिन था। मिले बंद थीं। आरिफ मोहम्मद खान ने जैसे ही घंटाघर चैराहे पर भाषण देना शुरू किया, वैसे सैकड़ों लोग मौन हो गए और करीब एक घंटे तक उन्हें सुनते रहे। आरिफ मोहम्मद खान ने कई मुद्दों पर खुलकर बोले थे। जिसका नतीजा रहा कि कानपुर की जनता ने उन्हें वोट देकर अपना जनप्रतिनिधि चुना।

चमनगंज में ससुराल
मोहम्मद असलम बताते हैं कि आरिफ मोहम्मद खान की ससुराल चमनगंज में है। मौलाना इसहाक इल्मी बड़ी बेटी रेशमा आरिफ से उनका विवाह हुआ है। असलम बताते हैं कि शादी के बाद उन्होंने कानपुर को अपना सियासी घर बनाया। उन्होंने ससुरालवाले एक घर खरीदा। कांग्रेस ने 1980 में आरिफ मोहम्मद खान को टिकट दे दिया। असलम बताते हैं, 1980 के दौर में कानपुर में कांग्रेस की स्थित बहुत कमजोर थी। कोई मजदूर नेता नहीं होने के चलते पार्टी ने एक युवा मुस्लिम चेहरे पर दांव लगाया। नई सोच पर शहर के लोगों ने जमकर वोट दिया और वह करीब 68 हजार वोटों से कांग्रेस के सांसद चुने गए थे।

संजय गांधी के करीबी
कांग्रेसी नेता व ग्रामीण सचिव सौरभ श्रीवास्तव बताते हैं कि उनके पिता और केरल के राज्यपाल के बीच गहरी दोस्ती है। पिता कांग्रेसी थे और संजय गांधी के करीबियों ने उनकी गिनती होती थी तो वहीं पूर्व सांसद संजय गांधी के मित्र थे। सौरभ बताते हैं, संजय गांधी कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव थे और आरिफ खान उनके साथ संयुक्त सचिव के रूप में अटैच थे। कानपुर में दलहन संस्थान उन्हीं की देन है और यहां उन्होंने एनटीपीसी की स्थापना का भी प्रयास किया था, जिसका स्थानीय स्तर पर विरोध हो गया, इसलिए यह काम नहीं हो पाया।

आर्यनगर से चुनी गईं थीं विधायक
सौरभ श्रीवास्तव बताते हैं कि आरिफ मोहम्मद खान जब कांग्रेस छोडने के बाद जनता दल के टिकट पर 1989 में बहराइच से सांसद चुने गए थे। उसी के साथ हुए विधानसभा चुनाव में उनकी पत्नी रेशमा आरिफ आर्यनगर से जनता दल के ही टिकट पर विधायक चुनी गई थीं। आरिफ मोहम्मद खान पिछले साल कानपुर आए थे और पिता जी मिलने के लिए घर भी आए। खान साहब को तुअर की दाल और तबे की रोटी बहुत पसंद हैं। इसके अलावा वह अक्सर शाम के वक्त नवाबगंज थाने के पास स्थित 60 साल पुरानी चाय की दुकान हर्रे तिवारी के यहां जाते और चाय की चुस्कियां लेकर लोगों से सीधे रूबरू हुआ करते थे।

मंत्री पद से दे दिया था इस्तीफा
आरिफ मोहम्मद खान ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम का उर्दू अनुवाद भी किया था। साल 1984 में राजीव गांधी की सरकार में आरिफ मोहम्मद को केंद्रीय मंत्री का दायित्व दिया गया था। लेकिन साल 1986 में शाहबानो मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को संसद में कानून बनाकर पलटे जाने का विरोध करते हुए उन्होंने केंद्रीय मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया और फिर कभी कांग्रेस से नहीं जुड़े। मोहम्मद असलम बताते हैं कि, आरिफ मोहम्मद ने केंद्र सरकार के तीन तलाक को समाप्त करने और जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने के फैसले का समर्थन भी किया था और मोदी सरकार की तारीफ की थी।

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