
रोड के किनारे लगे मील पत्थर के रंगों का जाने राज
कानपुर। जब आप अपने घर से बाहर निकलते हैं तो सड़क के किनारे आपको पत्थर लगे हुए मिलते हैं। जिनमें शहर का नाम, दूरी समेत कई जानकारियां लिखी होती हैं। ये पत्थर अगल-अगल रंग के होते हैं, जिनका एक अहम राज होता है। पीले और सफेद रंग का पत्थर केंद्र सरकार लगवाती है, जबकि जबकि सफेद और हरे रंग के पत्थर राज्य सरकार, तो वहीं काले और सफेद रंग के पत्थर जिलों के नगर निकाय के अलावा पत्थर के ऊपर का हिस्सा लाल और नीचे का सफेद हो तो आप यह समझ लेना चाहिए इसका निर्माण प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत कराया गया है। सड़कों के खराब होने पर इन्ही के आधीन आने वाले विभाग दुरूस्तीकरण करवाते हैं।
--तो समझें केंद्र सरकार की सड़क
सड़कों के निर्माण की जानकारी अलग-अलग अथॉरिटी के पास होती है। नेशनल हाइवे अथारिटी ऑफ इंडिया-यह विभाग मूल रूप से केंद्र सरकार द्वारा निंयंत्रित होता है इसका संचालन मिनिस्ट्री ऑफ ट्रांसपोर्ट एंड हाइवे करता है। जब आप एक शहर से दूसरे शहर प्रस्थान कर रहे होते है तो सड़क के किनारे आपको पीले और सफेद रंग का पत्थर दिखाई दे तो आपको यह समझ लेना चाहिए कि या राष्ट्रीय राजमार्ग है। इस तरह के सड़कों के निर्माण व रख-रखव की पूरी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होती है।
ये राज्य सरकार के रंग
स्जिन सड़कों को बनाने की जिम्मेदारी राज्य सरकार करती है उसे स्टेट हाइवे कहते हैं। इसका नियंत्रण पूरा नियंत्रण राज्य सरकार के पास होता है। सड़के के किनारे यदि आपको सफेद और हरे रंग के पत्थर दिखाई दें तो समझ जाएं कि इनका निर्माण राज्य सरकार के द्धारा कराया गया है। ऐसे में यदि सड़क खराब मिले तो उसकी शिकायत राज्य सरकार के अधीन संस्थाओं में की जाती है। पीडब्ल्यूडी के रिटायर्ड इंजीनियर रविकांत तिवारी बताते हैं कि सड़क के किनारे लगे पत्थर दूरी के साथ ही किस संस्था ने हाईवे का निर्माण कराया है, उसकी जानकारी भी इसी के जरिए दी जाती है।
चार रंगों के जाने राज
रोड के किनारे यदि आपको काले और सफेद रंग के पत्थर दिखाई पड़े तो आप समझ जाएं कि यह जिला व सिटी रोड है। जिसका निर्माण उस शहर के निकाय के जरिए कराया जाता है। यदि आपको जाते हुए किसी सड़क के किनारे कोई पत्थर लगा दिखाई दे जिसका ऊपर का हिस्सा लाल और नीचे का सफेद हो तो आप यह समझ लेना चाहिए इसका निर्माण प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत कराया गया है। इन सड़कों के खराब होने पर इसकी जिम्मेदारी ग्रामीण विकास मंत्रालय की होती है।
Published on:
15 Dec 2018 07:33 pm

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