जलपरी कहलाने वाली श्रद्धा एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने के लिए भरी गंगा में छलांग लगा चुकी है। वो भी कोई छोटी मोटी यात्रा नहीं बल्की बरसात में उफनाती गंगा में कानपुर से बनारस तक का सफर। उफनाती गंगा में 570 किमी की तैराकी के लिए श्रद्धा पानी में उतर चुकी है। मैस्कर घाट जिसे अब नानाराव घाट के नाम से जाना जाता है, से बनारस तक की दूरी वह सत्तर घंटे में तय करने वाली है। इस पूरी यात्रा में श्रद्धा छह स्थानों पर आराम करेगी और नियत समय में आपने इस अभियान को पूरा करेंगी। श्रद्धा के पिता ललित शुक्ला के अनुसार श्रद्धा चार साल की उम्र से गंगा मे तैराकी कर रही है। इस हुनर के साथ उसने कई कीर्तिमान बनाए हैं। श्रद्धा हर साल अपनी क्षमता के आकलन और सरकारी व्यवस्था को आईना दिखाने के लिए गंगा की उफनाती लहरों में छलांग लगाती हैं। श्रद्धा के पिता और बाबा गोताखोर रहे हैं। लेकिन उनकी आंखों में श्रद्धा के लिए ओलम्पिक में गोल्ड मेडल जीतते देखने का सपना है।