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13 साल की बेटी तय करेगी 570 किलोमीटर उफनाती गंगा का सफर

जलपरी कहलाने वाली श्रद्धा एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने के लिए गंगा में छलांग लगा चुकी है। वो भी कोई छोटी मोटी यात्रा नहीं बल्की बरसात में उफनाती गंगा में कानपुर से बनारस तक का सफर। 

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vikas vajpayee

Aug 28, 2016

kanpur jalpari shradha swim 570 km in ganga

kanpur jalpari shradha swim 570 km in ganga

कानपुर। ओलम्पिक में लगातार शर्मनाक प्रदर्शन और हर बार अगले ओलम्पिक के लिए बड़े बड़े दावे। लेकिन ओलम्पिक के इतिहास में कभी सुनहरा दौर नहीं दिखा। जिसका कारण है देश में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की उपेक्षा। हालांकि सरकारी उपेक्षा और तिरस्कार के बावजूद देश और परिवार के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा यदि किसी के साथ हो तो मंजिल खुद-ब-खुद आसान हो जाती है। ऐसी ही उपेक्षा का शिकार है कानपुर की श्रद्धा शुक्ला।

जलपरी कहलाने वाली श्रद्धा एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने के लिए भरी गंगा में छलांग लगा चुकी है। वो भी कोई छोटी मोटी यात्रा नहीं बल्की बरसात में उफनाती गंगा में कानपुर से बनारस तक का सफर। उफनाती गंगा में 570 किमी की तैराकी के लिए श्रद्धा पानी में उतर चुकी है। मैस्कर घाट जिसे अब नानाराव घाट के नाम से जाना जाता है, से बनारस तक की दूरी वह सत्तर घंटे में तय करने वाली है। इस पूरी यात्रा में श्रद्धा छह स्थानों पर आराम करेगी और नियत समय में आपने इस अभियान को पूरा करेंगी। श्रद्धा के पिता ललित शुक्ला के अनुसार श्रद्धा चार साल की उम्र से गंगा मे तैराकी कर रही है। इस हुनर के साथ उसने कई कीर्तिमान बनाए हैं। श्रद्धा हर साल अपनी क्षमता के आकलन और सरकारी व्यवस्था को आईना दिखाने के लिए गंगा की उफनाती लहरों में छलांग लगाती हैं। श्रद्धा के पिता और बाबा गोताखोर रहे हैं। लेकिन उनकी आंखों में श्रद्धा के लिए ओलम्पिक में गोल्ड मेडल जीतते देखने का सपना है।

परिवार के सभी सदस्य केवल एक ही आसरा लगाये है कि बेटी के इस हुनर पर सरकार और अधिकारियों की कब नजर पड़ेगी जिससे उसका औलम्पिक में भारत के लिए पदक जीतने का सपना पूरा हो सके। श्रद्धा के इस हुनर को लिम्का बुक में स्थान मिल चुका है। हालांकि 570 किलोंमीटर के इस रिकार्ड़ के साथ घाट के किनारे बिना किसी सुविधा के रहने वाली 13 साल की श्रद्धा एक नया कीर्तिमान अपने नाम करने वाली है।

कक्षा नौ में पढ़ने वाली तेरह साल की श्रद्धा सालों से गंगा की लहरों पर अपने हुनर के हाथ पैर चला रही है। चार साल की उम्र से गंगा में छलांग लगा रही श्रद्धा ने कई उपलब्धियां हासिल की लेकिन उनको अभी तक नजर अंदाज किया। लेकिन उसका इरादा मजबूत है। भले ही उसे सरकारी मदद नहीं मिल रही हो लेकिन उसका सपना ओलम्पिक में मेडल जीतना है। जिसके लिए वह कोई भी कुर्बानी देने को तैयार है। हर साल उफनाती गंगा में छलांग लगाकर नया कीर्तिमान बनाना उसकी इस जिद का हिस्सा है।

इस जल यात्रा को पूरा करने के लिए स्थानीय प्रशासन ने डाक्टर की एक टीम को साथ में लगाया है। साथ ही श्रद्धा को पानी में रहने वाले जीव जन्तुओं से भी खतरा है और इसे दूर करने के लिए जल पुलिस की एक टीम पूरे सफर में इस नन्ही जल परी की हिफाजत के लिए साथ में चलेगी। अभी हाल में श्रद्धा के पानी में तैरते वक्त एक मगरमच्छ ने उस पर हमला कर दिया था। हालांकि तैराकी में मगरमच्छ को मात देते हुए वो बच गयी थी।