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शिवपाल के चलते दोआब में फंसी बीएसपी

शिवपाल ने रमईपुर में रैलीकर यादवबेल्ट मे कर सी बड़ी सेंधमारी, प्रसपा के महेंद्र सिंह यादव के चलते बसपा की निशा सचान की बढ़ा दी मुश्किलें।

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शिवपाल के चलते दोआब में फंसी बीएसपी

कानपुर। मतदान के तहत तीन दिन पहले जिस तरह से शिवपाल यादव ने समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद चैधरी सुखराम सिंेह के साथ रमईपुर से रैली कर चुनावी समीरकरण पूरी तरह से बदल दिए हैं। अभी तक यहां पर भाजपा, बसपा व कांग्रेस के बीच मुकाबला देखनें को मिल रहा था, पर प्रसपा उम्मीदवार महेंद्र सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी के वोटबैंक में काफी हद तक सेंधमारी कर निशा सचान की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

चौधरी परिवर प्रसपा के साथ
गंगा और यमुना के मध्य दोआब में बसे अकबरपुर सीट पर मेहरबान सिंह पूरवा के चैधरी परिवार का खासा दबदबा रहा। शुक्रवार को शिवपाल की जनसभा में समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद सुखराम सिंह यादव ने जिस तरह से प्रसपा के पक्ष में वोट मांगे, इससे यादव समाज का बड़ा वोट महेंद्र सिंह के पास आता हुआ दिख रहा है। इाो बसपा प्रत्याशी निशा सचान का गणित बिगड़ता हुआ दिख रहा है।

दूसरे स्थान पर रही थी बसपा
बीते लोकसभा चुनाव के नतीजों को देखें तो यहां भाजपा का सीधा मुकाबला बसपा से हुआ था। भाजपा के देवेंद्र सिंह उर्फ भोले सिंह को 4,81,584 वोट पाकर जीत दर्ज की थी। बसपा के अनिल शुक्ला वारसी को 2,02,587 वोट मिले थे, जबकि सपा के लाल सिंह तोमर को 1,47,002 वोट मिले। कांग्रेस के राजाराम पाल को 96,827 वोट लाकर चैथे स्थान पर रहे थे। बसपा के अनिल शुक्ल वारसी भाजपा में शामिल हो गए और 2017 में उनकी पत्नी अकबरपुर रनियां से विधायक चुनी गई।

कांग्रेस मुकाबले में आई
2014 के वोट पर गौर करं तो बसपा को 202587 लाख तो सपा 147002 लाख मत मिले। इससे यहां पर भाजपा व गठबंधन के बीच ही मुकाबला माना जा रहा था, पर प्रसपा के उम्मीदवार के चलते अब लड़ाई में कांग्रेस भी आ गई है। कांग्रेस के राजाराम पाल ने अब मुस्लिम मतदाताओं को अपने पाले में लाने के लिए प्रसपा को हथियार बना रहे हैं। नवाबगंज लालफाटक निवासी असलम कहते हैं कि अकबरपुर सीट पर गठबंधन के बजाए कांग्रेस और भाजपा के बीच टक्कर है। प्रसपा के आने से यादव समाज का वोट बसपा के बजाए प्रसपा व भाजपा में बंट रहा है।

जातीय समीकरण
अकबरपुर लोकसभा सीट पर करीब 174381 लाख मतदाता है। इसमें ब्राम्हण, 352000, क्षत्रीय 190000, मुस्लिम, 105000, यादव और पिछड़ा वर्ग 600000, दलित 225000, अन्य 271000 लाख मतदाता अपने वोट की चोट करेंगे। क्षत्रीय, ब्राह्मण और यादव मतदाता काफी निर्णायक भूमिका में हैं। बतादें अकबरपुर लोकसभा सीट जिसे पहले बिल्हौर संसदीय सीट के रूप में जाना जाता था, लेकिन 2009 में परिसीमन के बाद यह अकबरपुर लोकसभा सीट के रूप में अस्तित्व में आया और कांग्रेस से राजाराम पाल 2009 में सांसद बने। 2014 बीजेपी से देवेंद्र सिंह भोले यहां जीत हासिल की।

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