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पूरे यूपी में यह इकलौता परशुराम मंदिर है

समूचे उत्तर प्रदेश में सिर्फ एक परशुराम मंदिर है, जो परसौरा गांव में स्थित है। हिंदू धर्म मे परशुराम जी को भगवान का दर्जा दिया गया है। 

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Hariom Dwivedi

May 09, 2016

Lord parshuram temple

Lord parshuram temple

कानपुर देहात. जय शिव शंकर, जय भोलेनाथ, जय परशुराम के जयकारों से सारा माहौल गुंजायमान हो जाता है। त्रेता युग से लेकर कलियुग तक कई शताब्दियों के इस सफर मे आज भी जनपद के रसूलाबाद क्षेत्र के परसौरा गांव मे परशुराम जयंती के दिन हजारो श्रद्धालुओं का तांता लगता है। इस गांव में ब्राह्मण कुल में जन्में परशुराम जी का प्राचीनकाल से नाम सुना जा रहा है। जिनका वर्णन धार्मिक ग्रंथों में विस्तार से उल्लिखित है।

समूचे उत्तर प्रदेश में सिर्फ एक परशुराम मंदिर है, जो परसौरा गांव में स्थित है। हिंदू धर्म मे परशुराम जी को भगवान का दर्जा दिया गया है। कहा जाता है कि इनकी एक प्रतिमा श्रीनगर जम्मू के बीच स्थित रघुनाथ मंदिर मे स्थापित की गयी है। लेकिन उनका जन्म स्थान परसौरा गांव मे होने की वजह से उनकी जयंती के दिन इस गांव मे दूर दराज से लोग उनके दर्शन के लिये आते हैं। महिलायें ढोल मजीरा गाजे बाजे के साथ मंगल गीत गाती हैं, तो पुरुष भी हवन पूजन कर उनका स्मरण करते हैं। श्रद्धालु सुबह 3 बजे से ही कतार में उनके दर्शन के लिये खड़े हो जाते हैं। भारी जन सैलाब होने के चलते अफरा तफरी का माहौल प्रतीत होता है। उनके जयकारों से पूरा गांव सराबोर हो जाता है। मंदिर से पांच सौ मीटर की दूरी पर शिवनाला एक स्थान है, जहां मां रेणुका मटकी मे जल भरने जाया करती थी। महिलायें आज भी उस नाले का जल भरकर घर लाती है। कहते है उस जल को पीने से लोग अमृत्व की ओर अग्रसर होते है।

कुछ खास इतिहास है इस मंदिर का
त्रेता युग मे भगवान राम के पूर्व परशुराम का जन्म हुआ था। पिता यमदग्न के शिव भक्त होने के चलते परशुराम भी शिव शंकर के भक्त हो गये थे। शिव भक्ति मे इतने लीन हुये कि उन्होने उसी समय परसौरा मे शिव मंदिर बनवाया था, जो आज परशुराम मंदिर के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि मंदिर के अंदर भगवान शिव की एक लाट है। जो आज भी दिन मे 7 बार रंग बदलती है, जिसे देखने के लिये श्रद्धालु नजरें गडाये बैठे रहते हैं।

फागुन माह की विशेषता है यहां
परसौरा से करीब 1 किलोमीटर दूरी पर स्थित जंतर खेडा स्थान है, जहां परशुराम के पिता यमदग्न ऋषि रहा करते थे। रात दिन ईश्वर के ध्यान मे रहना ही सिर्फ उनका काम था। एक दिन स्वप्न मे भगवान शिव ने उनसे अपनी स्थापना कराने की बात कही। तब जाकर उन्होंने जंतर खेड़ा में एक मंदिर बनवाया, जिसे आज यमदग्न मंदिर के नाम से जाना जाता है। परशुराम मंदिर मे दर्शन के बाद लोग इस मंदिर मे भी दर्शन के लिये जाते है। यहाँ फागुन के महीने मे विशाल मेले का आयोजन किया जाता है।

परसौरा मंदिर पहुंचे उपजिलाधिकारी राजीव पांडे ने बताया कि, इस मंदिर मे हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिये आते हैं। आज भी यह मंदिर ज्यों का त्यों खड़ा हुआ है। सिद्ध पीठ स्थान है, श्राद्धालुओं को परेशानियां न उठानी पडे। इस वजह से मंदिर की चाक चैबंद व्यवस्था के लिये पुलिस की समुचित व्यवस्था की गयी है।

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