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रामनाथ कोविंद के परिवार में सावन महीने का विशेष महत्व, भाभी निभा रही हैं जिम्मेदारी

पूजा की दृष्टि से भावी राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के परिवार के लिये भी सावन का महीना विशेष महत्वपूर्ण है। कोविंद के पिता स्व. मैकूलाल से लेकर आज उनकी भाभी विधावती उस परिपाटी को बखूबी निभा रही हैं।

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Nitin Srivastva

Jul 09, 2017

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अरविन्द वर्मा

कानपुर देहात. हिंदू धर्म मे सावन के माह का अलग महत्व है। जिसमें लोग पूरे माह अपनी मान्यता के अनुसार व्रत रखना, मंदिरों में रोजाना पूजा अर्चना करना और कांवड़िए कांवड़ के साथ गंगा घाट से जल लेकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। वहीं पूजा की दृष्टि से भावी राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के परिवार के लिये भी सावन का महीना विशेष महत्वपूर्ण है। कोविंद के पिता स्व. मैकूलाल से लेकर आज उनकी भाभी विधावती उस परिपाटी को बखूबी निभा रही हैं। झींझक में रहकर वह अपने घर के बाहर बने शिवलिंग पर रोजाना सुबह शाम पूजा अर्चना करती हैं। लेकिन सावन के माह में विशेष तौर पर वह बेलपत्री पर ऊं लिखकर और फल, गंगाजल व दूध का भोग लगाती हैं। पूरे महीने वह भगवान शिव की आराधना करती हैं। उनका कहना है कि लल्ला (रामनाथ कोविंद) खुद भी ईश्वर में बहुत विश्वास रखते हैं और ससुर स्व. मैकूलाल सावन के पूरे माह पूजन किया करते थे, ये प्रथा तब से चली आ रही है।


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विशेष तरह से पूजा करते थे रामनाथ कोविंद के पिता मैकूलाल

रामनाथ कोविंद के पिता ईश्वर में बहुत विश्वास रखते थे। खासतौर पर सावन का महीना उनकी पूजा के लिये विशेष महत्वपूर्ण था। उनके पूजन का विधि विधान लोगों से भिन्न था। वह सावन के हर सोमवार को शिव मंदिर में बेलपत्री पर अनार की कलम से ऊं शब्द लिखकर भगवान शिव पर चढ़ाया करते थे और मंत्रों का जाप करते थे। उनके देहांत के बाद यह प्रथा आज भी उनके परिवार में चली आ रही है। परिजन बताते हैं कि एक डाल में तीन बेलपत्री होती थीं और सभी बेलपत्रियों पर अनार की कलम से ओम शब्द लिखकर भरा जाता था। इसमें काफी समय लगता था, लेकिन वह पूरे मनोयोग से इस पूजन कार्य को सम्पन्न करते थे। उनके परिवार के वरिष्ठ सदस्य आज भी सावन के हर सोमवार को 11 बेलपत्री पर ऊं लिखकर एवं उपवास रखकर भगवान शिव की पूजा आराधना करते हैं।



अब उस परिपाटी को निभा रही हैं विधावती

कोविंद के पिता का स्वर्गवास होने के बाद उस दायित्व को कोविंद के बड़े भाई मोहनलाल व उनकी पत्नी ने फिर शिवबालक राम ने निभाया। लेकिन तीनों लोगो के देहांत के बाद अब परिवार के बड़े सदस्य के रूप मे झींझक में रह रही उनकी भाभी विधावती इसे निभा रही हैं। वृद्धावस्था के चलते वह अपने घर के बाहर बने शिवलिंग पर उसी विधि विधान से पूजा करती हैं। उनका मानना है कि सावन के सोमवार को भगवान शिव बेलपत्री में विराजमान होते हैं, तो वह रविवार को बेलपत्री तोड़ लेती हैं और ओम लिखकर सोमवार को चढ़ाती हैं।




अब राष्ट्रपति के रूप मे उनका स्वागत करने को आतुर है भाभी

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भाभी विधावती का कहना है कि राज्यपाल बनने के बाद रामनाथ सबसे पहले उनके घर आए और उनके हालचाल पूछे थे। उस हर्षोल्लास के माहौल को वह नहीं भूल पा रही हैं। अब उनके राष्ट्रपति बनने के बाद उनका स्वागत करने का इंतजार है। इसके लिये उन्होंने भगवान शिव व पथरी देवी पर नारियल चढ़ाकर रखा हुआ है। उनकी मनोकामना पूरी होने पर वह बड़ी पूजा करने के लिये व्याकुल हैं।


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