
कानपुर में हैं वैष्णों देवी का मंदिर, दर्शन कर पुण्य कमाएं यजमान
कानपुर. संकरी सुरंग, पथरीली डगर, पानी से होकर गुजरना तो कहीं छत से लटकते पत्थर के कंगूरों से बचकर चलना, भूल भुलैया से बने कई मोड़ों कों पार करने के बाद जब भक्त देवी की पीठ के समक्ष पहुंचते हैं तो मानों उनके चेहरे में खुशी की लहर दौड़ पड़ती है। क्योंकि जम्मू के कटरा की तर्ज पर कानपुर में मां वैष्णों का विराट मंदिर स्थापित है, जहां भक्त गुफाओं से होकर 1000 हाथों वाली माता महिसासुर मर्दानी के दर्शन कर पुण्य कमाते हैं। वैष्णो देवी की यह गुफा उनके एक भक्त ने सात साल पहले बनायी थी । अब तो हर नवरात्र को यहां उन सैंकड़ों भक्तों का जमावड़ा लगता है जो किसी वजह से त्रिकुटा की पहाड़ी पर बने असली वैष्णों देवी मदिर तक नहीं पहुंच पाते है।
एक हजार हाथधारी मां महिसासुर विराजी
बर्रा थानाक्षेत्र के दमोदर नगर स्थित माता वैष्णो देवी मंदिर के अंदर एक गुफा बनी है। यहां नवरात्रि में दूर-दूर से भक्तों की भीड़ आती है और गुफा से गुजरने के बाद माता के दर्शन कर मनचाहे फल की प्राप्ति हो जाती है। मंदिर का निर्माण बुलंदशहर से आए माता के भक्त जयदेव सिंह राणा द्वारा सन् 2000 में दुर्गा मां से मांगी गई एक मन्नत पूरी होने पर करवाया गया था। पूरे मंदिर में करीब 900 भगवान की मूर्तियां स्थापित हैं और यहां पर एक मात्र हजार हाथ वाली माता महिसासुर मर्दानी की मूर्ति भी विराजमान है। जिसका दुर्गा सप्तसती में वर्णन भी किया गया है।
रहस्य और रोमांच से भरी है गुफा
लम्बी कतार में प्रतीक्षा के बाद जब भक्त मानवनिर्मित गुफा के अन्दर पहुंचते है तो उन्हें रहस्य और रोमांच के साथ - साथ अनोखे भक्ति भाव का अहसास होता है । कभी उन्हें घुटनों के बल चलकर आगे बढ़ना होता है तो कभी झर-झर बहते कृत्रिम झरने से होकर गुजरना होता । गुफा के हर मोड़ पर देवी देवताओं की प्रतिमाओं के दर्शन होते है । सबसे ज्यादा रोमांचक अनुभव होता है सहस्त्रबाहु यानि एक हजार हाथ वाली देवी प्रतिमा के दर्शन करना । इस गुफा मन्दिर के दर्शन करने के लिये नब्बे साल की वृद्धा सुनीता शर्मा के साथ दिब्यांग भी मां के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। भक्त सुनीता शर्मा ने बताया कि जिन्हें कभी वैष्णों देवी के दर्शन करने का सौभाग्य नहीं मिला हो , वे इस गुफा मन्दिर में आ जाए तो फिर माता उन्हें जल्दी ही जम्मू भी बुला लेती हैं।
चुनरी अर्पण करने से प्रसन्न हो जाती हैं मां
मंदिर के पुजारी महंत रामजी ने बताया कि कोई भक्त मातारानी के दरबार में आकर चुनरी से तीन गांठ लगाए तो उसकी मन्नत पूरी हो जाती है। मन्नत पूरी हो जाने पर भक्त यहां आकर गांठ खोलते हैं। पुजारी के मुताबिक मंदिर में दो बार आरती की जाती है, जिसमें बहुत कम लोग ही भाग ले पाते हैं। पुजारी ने बताया कि गुफा को प्राकृतिक रूप दिए गया है। गुफा में प्रवेश करते ही ऐसी अनुभूति होती है, मानों कि देवी मां साक्षात दर्शन दे रही हों। मंदिर में 1000 हाथ वाली देवी मां की विशेष मूर्ति के अलावा सभी पुराणों का सार भी यहां मौजूद है। जो गरीब लोग जम्मू नहीं जा सकते वो यहां आकर उसी तरह का आनंद प्राप्त करते हैं जैसा जम्मू में मिलता था।
Updated on:
29 Sept 2017 12:18 pm
Published on:
29 Sept 2017 11:53 am

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