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इन सीटों पर साइकिल के बजाए गरजेगा हाथी, कानपुर में भाजपा को टक्कर देगा यह महारथी

इस फार्मूले के तहत दिए जाएंगे टिकट, कानपुर में कांग्रेस को सपा-बसपा कर सकती है मदद

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इस फार्मूले के तहत दिए जाएंगे टिकट, कानपुर में कांग्रेस को सपा-बसपा कर सकती है मदद

कानपुर। एक वक्त था जब सपा और बसपा के कार्यकर्ता सड़क पर आएदिन लड़ते और झगड़ते रहते थे। अखिलेश सरकार के दौरान बसपा कार्यकर्ताओं पर मुकदमे भी दर्ज किए गए। लेकिन गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में मिली जीत के बाद दोनों दल के कार्यकर्ता खासे नदगद नजर आ रहे हैं और 2019 लोकसभा फतह करने के लिए रणनीति बना रहे हैं। गठबंधन की आहट देख दावेदारों की फौज कानपुर से लेकर लखनऊ और इटावा से दिल्ली तक चक्कर लगानी शुरू कर दी है। शहर की सीट पर जोर न देकर क्षत्रपों अकबरपुर और मिश्रिख सीट पर टकटकी लगा दी है। यहां से सपा और बसपा के दर्जनभर से ज्यादा दावेदारों ने पार्टी हाईकमान से टिकट की मांग की है। पर यह दोनों सीटें हाथी को मिल सकती है, जबकि कानपुर नगर की सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार श्रीप्रकाश जायसवाल भाजपा को टक्कर देते हुए नजर आ सकते हैं।
माया गुप्ता को मिल सकता है सपा से टिकट
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय नेता इस वक्त कर्नाटक में ढेरा जमाए हुए हैं और कांग्रेस को हराने के लिए रणनीति बना रहे हैं। वहीं लोकसभा 2019 फतह करने के लिए क्षत्रप यूपी में अपनी जमीन तैयार करने में जुटे हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती के बयान कि लोकसभा चुनाव में हम सपा के साथ गठबंधन करेंगे की बात सुनकर उनके दल के कार्यकर्ता सपाईयों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल पड़े हैं। वहीं दोनों दलों के दावेदार भी एक्शन में आ गए हैं और टिकट के लिए जुगाड़ लगाने लगे हैं। पर सपा और बसपा के बीच जो टिकटों को लेकर फार्मूला बना है, उसके मुताबिक अकबरपुर और मिश्रिख सीट बसपा के खाते में जाएगी, वहीं कानपुर नगर से सीट से कांग्रेस के दिग्गज नेता श्रीप्रकाश जायसवाल भाजपा को टक्कर देंगे और उनकी जीत पक्की करने के लिए सपा यहां से माया गुप्ता को चुनाव के मैदान में उतार सकती है। माया गुप्ता ने मेयर सीट पर अच्छा चुनाव लड़ा और भाजपा के बेस वोटबैंक में सेंधमारी कर एक लाख से ज्यादा वोट पाई थीं।
इस फार्मूले के तहत दो सीटों पर गरजेगा हाथी
सपा और बसपा ने जो फार्मूला तैयार किया है, उसके मुताबिक 2014 के लोकसभा चुनाव में जिद दल का प्रत्याशी दूसरे नंबर रहा होगा उसी दल को वह सीट दी जाएगी। इसी फार्मूले को यदि आधार मानकर टिकट दिए जाएंगे तो 2014 के लोकसभा चुनाव में बसपा के पूर्व सासद अनिल शुक्ला वारसी को अकबरपुर सीट पर भाजपा के देवेंद्र सिंह भोले ने पटखनी दी थी। हालाकि अब अनिल शुक्ल वारसी भाजपा में हैं। इसी तरह मिश्रिख लोकसभा सीट में बिल्हौर विधानसभा क्षेत्र आता है। इस सीट पर भाजपा की अंजूबाला ने बसपा के उम्मीदवार और तत्कालीन सासद अशोक रावत को पराजित किया था। दोनों जगह पर बसपा दूसरे नंबर पर रही थी। सपा नगर अध्यक्ष मुईन खान ने बताया कि गठबंधन का फैसला और टिकट बंटवारे के लेकर निर्णय पार्टी हाईकमान तैय करेगा। गठबंधन के बाद जिसे दल के खाते में जो सीट जाएगी, उसे ही मिलकर जिताया जाएगा।
कई बसपा नेताओं ने की दावेदारी
कानपुर सीट पर भाजपा के डा. मुरली मनोहर जोशी जीते थे। काग्रेस के तत्कालीन सासद श्रीप्रकाश जायसवाल दूसरे, बसपा के मोहम्मद सलीम तीसरे और सपा के सुरेंद्र मोहन चौथे स्थान पर रहे थे। अगर काग्रेस गठबंधन में शामिल होती है तो फिर मायावती द्वारा दिए गए फार्मूले के आधार पर कानपुर सीट काग्रेस के हिस्से में जा सकती है, अन्यथा यहा भी बसपा का दावा मजबूत होगा। ऐसे में यह कहें कि भाजपा के विजय रथ को रोकने के लिए बसपा का हाथी इस सीट पर मैदान में उतरेगा तो यह कहना गलत नहीं होगा। हालाकि अभी मायावती ने गठबंधन में सीटों का फार्मूला दिया है। यह तो वक्त बताएगा कि किस दल का उम्मीदवार किस सीट पर होगा। फिलहाल इस फार्मूले के सामने आने के बाद बसपा के नेता खुश हैं कि उनके हिस्से में ये तीनों सीटें आएंगी। बसपा से टिकट पाने को चार पूर्व विधायक सामने आए हैं। मिश्रिख सीट पर बसपा के पूर्व सासद ने भी टिकट के लिए दावा ठोंका है। कई पदाधिकारी और दूसरे दलों के नेता भी बसपा से टिकट पाने को जुगत लगा रहे हैं।