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लाॅकडाउन में बेजुबानों का सहारा बने फैजान, खुद के पैसे से गायों को करा रहे भोजन

फैजान बचपन से गायों की करते आ रहे हैं सेवा, लाॅकडाउन के चलते बेजुबानों को नहीं मिल रहा था खाना तो उठाया बीणा।

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लाॅकडाउन में बेजुबानों का सहारा बने फैजान, खुद के पैसे से गायों को करा रहे भोजन

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कानपुर।कोरोना वायरस के चलते देश में 3 मई तक लाॅकडाउन चल रहा है, जिसके कारण लोग अपने-अपने घरों में कैद हैं तो वहीं सड़कों पर घुमने और मंदिरों में भक्तों के प्रसाद से पेट भरने वाले बंदर भूख के चलते तड़प रहे हैं। इन्हीं बेजुबानों को शहर के कुछ युवा सहारा बनकर सामने आए हैं और खुद के पैसे से भूसा, घास, बिस्कुट, बे्रड सहित तमाम खाने की समाग्री खरीदकर इनका भेट भर रहे हैं। ऐसे ही एक कोरोना यो़द्धा मोहम्मद फैजान से हम आपको रूबरू कराने जा रहे हैं जो पिछले 40 दिनों से इस नेक कार्य में तनमन से जुड़े हैं।

इलाज के साथ भोजन
जौहर फैंस एसोसिएशन टीम के सदस्य मोहम्मद फैजान ने बताया कि वह बचपन से गाय की सेवा करते आ रहे हैं। ख्ुाद गाय भी घर पर रखी हुई है। कहते हैं, लाॅकडाउन के चलते सड़क पर घूमने वाली गायों को भोजन नहीं मिल पाने से कई बीमार पड़ गई। हमने खुद के पैसे से गायों का इलाज करवाया और फिर प्रण किया कि अब हमारे क्षेत्र में एक भी बेजुबान भूखा नहीं रहेगा। सुबह के वक्त जगने के बाद मंडी से घास और भूसा खरीदकर लाते हैं और गायों को परभेट भोजन कराते हैं।

लोगों ने भी दिया साथ
फैजान ने बताया कि हमने अपने मोहल्ले के लोगों से अपील की इस संकट की घड़ी में आप भी हमारा साथ दें। हमने सभी से कहा कि घर में पकने वाला भोजन यदि बच जाए तो उसे फेंकने के बजाए डिस्बेन में डाल दें। लोगों ने हमारी बात मानी और हर घर के बाहर डिस्बेन में गायों के लिए भोजन की व्यवस्था कर दी। फैजान बताते हैं कि करीब 100 से ज्यादा गायों को वह हरदिन भोजन कराते हैं। सुबह के वक्त गाय हमें देखकर एक जगह एकत्र हो जाती हैं।

हर्ष भी बेजुबानों का बने सहारा
ऐसे ही एक और कोरोना योद्धा हर्ष प्रताप सिंह हैं तो लाॅकडाउन के बीच बेजुबानों का सहारा बने हैं। हर्ष प्रताप सिंह कहते हैं कि लाॅकडाउन के चलते बेजुबान जानवर भूख से तड़प रहे हैं। इनकी भूख हमें अंदर से झकझोर दिया और फिर हमने अपने अन्य साथियों की मदद से किसानों के खेतों में जाकर सब्जी और भूसा खरीदकर लाते हैं और इन्हें खिलाते हैं। हर्ष अपने साथियों के साथ रोजाना सड़को पर घूमते रहते है और उनको जंहा पर भी कोई जानवर मिलता है उसको हरी सब्जी ब्रेड व दूध खिलाकर उनकी भूख मिटा रहे है ।

लेकिन बेजुबान भूखे
हर्ष कहते हैं कि लॉक डाउन में जब लोग जरूरतमंदों तक भोजन पहुंचा रहे हैं, तो ऐसे में हमें ख्याल आया कि जुबान वालों तक खाना तो पहुंच रहा है, लेकिन बेजुबान भूखे रह जा रहे हैं.। बस यहीं से हमनें बेजुबानों के लिए भोजन की जुगाड़ करना शुरू किया। हर्ष बताते हैं कि अभी न केवल भोजन जुगाड़ करते हैं, बल्कि बेजुबान जानवरों के बीच बांटते भी हैं। कहते हैं कि जानवरों की इस समस्या को ध्यान में रखते हुए मैंने जिला नियंत्रण कक्ष से घर-घर जाकर भोजन एकत्र करने और उन्हें जानवरों के बीच वितरित करने की अनुमति ली है।