कानपुर.नवरात्र के दूसरे दिन मां दुर्गा के दूसरे स्वरुप ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से दुख रोग और विकार दूर हो जाते हैं। यह बात पंडित बलराम तिवारी ने कही। पंडित जी ने बताया कि मां का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी है। इनका यह रूप पूर्ण ज्योतिर्मय है। इनके दाहिने हाथ में जपमाला एवं बाएं में कमंडल रहता है। इनकी उपासना से तप, त्याग और संयम की वृद्धि होती है। माता ब्रह्माचारिणी को प्रसन्न करने के लिये शक्कर, दूध, दही, खीर का भोग लगाया जाता है। मां को सफेद पुष्प और स्फटिक की माला पसंद है। मां ब्रह्मचारिणी की प्रतिमा की षोडशोपचार अर्थात गंध, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य, इन पांच सामग्री से पूजा की की पूजा अर्चना करें। मां ब्रह्मचारिणी का ध्यान कर दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।