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उर्सला अस्पताल के बाहर दर्द से कराहती रही युवती, धरती के भगवानों का दिल नहीं पसीजा मुख्यमंत्री जी

इलाहाबाद से आई युवती को नहीं किया एडमिट, एम्बूलेंस नहीं मिलने पर भाई ने मरीज को गोद में उठा लगा दी दौड़

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patient not admit by Ursla hospita in kanpur hindi news

उर्सला अस्पताल के बाहर दर्द से कराहती रही युवती, धरती के भगवानों का दिल नहीं पसीजा मुख्यमंत्री जी

कानपुर। शहर के दूसरे सबसे बडा उर्सला अस्पताल बेलगाम हो गया है। यहां पर इलाज की सुविधा नहीं होने पर मरीजों को एडमिट नहीं किया जा रहा है। यदि कोई मरीज विरोध करता है तो उसे जबरन वार्ड से बाहर कर दिया जाता है। ऐसा ही एक मामला रविवार को सामने आया। यहां इलाहाबाद से इलाज के लिए आई एक युवती को डॉक्टर्स ने भर्ती करने से इंकार कर दिया। परिजन उनके पैरों में लिपट गए, पर धरती के भगवानों को दिल नहीं पसीजा और मरीज को हैलट ले जाने की बात कह उसे बाहर करवा दिया। जब तीमारदारों ने एम्बूलेंस की मांग की तो कहा गया कि यहां यह सुविधा नहीं है। प्राईवेट वाहन के जरिए मरीज को ले जाइए। गरीब परिजन युवती को लिए करीब एक घंटे तक अस्पताल के बाहर लिटा कर इधर-उधर चक्कर लगाते रहे और जब मरीज की हालत ज्यादा बिगड़ने लगी तो उसके भाई ने गोद में उठा कर दौड़ लगा दी। इसी दौरान एक ऑटो वाले ने पीड़िता को हैलट पहुंचाया।
डीएम ने किया था निरीक्षण
नए जिलाधिकारी विजय विश्वास पंच चार्ज संभालते ही उर्सला का निरीक्षण किया और मरीजों की शिकायत पर अस्पताल प्रशासन को फटकार लगा सस्पेंड करने की चेतावनी दी थी। डीएम के जाते ही अस्पताल के डॉक्टर्स और अन्य कर्मचारी पुराने ढर्रे पर लौट आए। इलाज के नाम पर मरीजों के साथ वसूली शुरू हो गई। वहीं इलाज, दवा और एम्बूलेंस जैसी तमाम सरकारी सुविधा नहीं होने का हवाला देकर डॉक्टर्स मरीजों को एडमिट नहीं कर रहे हैं। इलाहाबाद से इलाज के लिए उर्सला अस्पताल आई युवती संध्या जो ब्रेन की समस्या से पीड़ित थी। संध्या के भाई आशीष मौर्या ने बताया कि यहां लाने पर डॉक्टर्स ने बहन को एडमिट करने से इंकार कर दिया। उनका कहना था कि उर्सला में न्यूरो का इलाज नहीं है। आप इन्हें हैलट ले जाइए।
फिर धक्के मार कर किया बाहर
संध्या के भाई ने बताया कि हमने डॉक्टर्स के पैर पकड़ लिए और बहन को प्राथमिक इलाज के बाद हैलट के लिए रेफर करने का फरियाद की। जिस पर डॉक्टर्स ने कहा कि इलाहाबाद से जिस अस्पताल ने आपको यहां भेजा है उसका रेफर लेटर दो। पर लेटर नहीं होने पर वो गुस्से से लाल हो गए और वार्ड ब्वाय के जरिए जबरन बहन समेत हम सभी को धक्के मारकर बाहर निकाल दिया। बहन को फुठपाथ पर लिटाकर पिता सीएसएस व निदेशक के पास शिकायत लेकर गए पर वहां दोनों अधिकारी नहीं मिले। लोगों ने कानपुर के डीएम के नंबर देकर शिकायत करने को कहा। डीएम को फोन लगाने पर उनके पीआरओ ने विजी बता कर फोन काट दिया। इसी दौरान बहन की हालत बिगड़ने लगी तो हमने 102 नबंर पर सुविधा मांगी पर वहां से भी कोई नहीं आया।
गोद में उठा कर ले चला भाई
अपनी इकलौती बहन की हालत बिगड़ते देख भाई ने उसे गोद में उठा लिया और हैलट की तरफ दौड़ लगा दी। इसी दौरान एक ऑटो वाले ने उसे सहारा दिया। आशीष अपनी बहन को लेकर हैलट आया और यहां भी डॉक्टर्स ने इलाज के बजाए रेफर लेडर की मांग कर दी। संध्या में पिता ने एक न्यूरो विशेषज्ञ के पैर पकड़ लिए और इलाज नहीं करने पर ख्ुद को मार लेनी की धमकी दी। जिससे डॉक्टर्स डर गए और युवती को एडमिट कर इलाज शुरू किया। संध्या के पिता ने कहा कि देश आजाद नहीं बल्कि गुलाम है। जनता जिन्हें चुनकर राजा बनाती है तो वह प्रजा के बजाए अपना विकास करते हैं। अब लोकतंत्र नहीं रहा। सपा, बसपा, और कांग्रेस के बाद लगा था कि योगी सरकार गरहब जनता के लिए कुछ करेगी पर ऐसा नहीं हुआ।
योगी से अच्छी तो अखिलेश सरकार
संध्या के भाई ने कहा कि हमारे क्षेत्र से विधायक चुनकर यूपी में डिप्टी सीएम की कुर्सी पर बैठे केशव प्रसाद मौर्या को मैने खुद मैसेज कर उर्सला अस्पताल के डॉक्टर्स की शिकायत की पर वहां से कोई जवाब नहीं मिला। अभिषेक कहते हैं कि कुछ भी लोग कहें, सीए योगी आदित्यनाथ से अच्छी सरकार अखिलेश यादव की थी। पहले स्वास्थ्य सेवाएं इतनी खराब नहीं थीं, जितनी अब हैं। वहीं उर्सला के बाहर खड़े एक दुकानदार ने बताया कि गुरू जब अधिकारी पैसे देकर अस्पताल में आएंगे तो दवा बेंचकर दी गई रकम को मुनाफे के साथ गरीब जनता से वसूलेंगे। कहते हैं, पहले की सरकार में अधिकारियों को कम पैसे पोस्टिंग के लिए देने पड़ते थे, लेकिन इस सरकार में खेल करोड़ों का चल रहा है। वहीं जब इस मामले में उर्सला के निदेशक से बात करनी की कोशिश की गई तो उन्होंने ऐसी जानकारी नहीं होने का हवाला देकर फोन काट दिया।