
गंगा पर फोरलेन सर्वे के लिए शुरू हुई जद्दोजहद
कानपुर। तीन साल बाद एक बार फिर गंगा पर ब्रिज बनाकर ट्रांसगंगा हाईटेक सिटी से कानपुर को जोड़े जाने की कवायद शुरू हो गई. हालांकि ब्रिज के सर्वे को लेकर जोरदार झटका लगा है. दरअसल केडीए ने प्रपोज्ड फोरलेन ब्रिज के सर्वे को लेकर हाथ खड़े कर दिए हैं. इससे गेंद एक बार फिर यूपीसीडा व कमिश्नर के पाले में पहुंच गई है.
ऐसी मिली है जानकारी
वर्ष 2015 में यूपीएसआईडीसी की बोर्ड मीटिंग में गंगा बैराज रोड (सरैंया) से गंगा पर ब्रिज बनाकर कानपुर को जोड़े जाने का प्रपोजल पास हुआ था. गंगा बैराज रोड किनारे ही यूपीएसआईडीसी की ट्रांसगंगा हाईटेक सिटी बस रही है, जिसकी सीधी कनेक्टिविटी की तैयारी यूपीएसआईडीसी ने की थी.
टेंडर भी किए कॉल
तत्कालीन यूपीएसआईडीसी के एमडी मनोज सिंह ने कंसल्टेंट के लिए टेंडर भी कॉल कर लिए. उस समय इस फोरलेन ब्रिज पर 450 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान लगाया जा रहा था. इसके लिए ब्रिज कॉर्पोरेशन से सर्वे भी कराया गया था. ब्रिज कार्पोरेशन ने सरसैयाघाट, बाबा घाट और रिवर साइड पावर से गंगा पर ब्रिज बनाने के लिए सर्वे किया.
जिन्न आया बाहर
सर्वे रिपोर्ट में फोरलेन ब्रिज के लिए सबसे कम खर्च बाबाघाट से गंगा ब्रिज बनाने पर आ रहा था. हालांकि एमडी मनोज सिंह के तबादले के बाद ब्रिज फाइलों में कैद होकर रह गया. इधर यूपीएसआडीसी के यूपीसीडा में विलय के बाद एकबार फिर पुल का जिन्न बाहर आया है.
कुछ दिन पहले उठा था मामला
पुल के केडीए से सर्वे का कराने का मामला कुछ दिन पहले कमिश्नर की बैठक में उठा था. हालांकि केडीए ने ब्रिज कार्पोरेशन से सर्वे कराने को सुझाव दिया है. कारण है कि क्योंकि नदियों पर सर्वे और ब्रिज बनाने की तकनीकी विशेषज्ञता सेतु निगम के पास है. वह यूपी ही नहीं कई स्टेट में ब्रिज कार्पोरेशन ही पुल बना रहा है.
Published on:
13 Oct 2018 01:37 pm

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