कानपुर। दिल्ली में हुई हिंसा के बाद 55 दिन से कानपुर के मोहम्मद अली पार्क पर चल रहे धरने पर बैठी महिलाएं गुस्से में हैं। उनका कहना है कि देश के संविधान ने हमें अहिंसा पूर्वक अपनी बात सरकार तक पहुंचाने के लिए प्रोटेस्ट का हक दिया था। लेकिन कुछ अरातकतत्वों ने दिल्ली में जिस तरह से दंगा किया, उसकी हमसभी घोर निदा करते हैं। साथ ही उपद्रवियों को गिरफ्तार को उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिले। जिससे कि कोई भी ऐसी हरकत करने से पहले सौ बार सोंचे।
मोहम्मद अली पार्क पर जारी धरना
चमनगंज स्थित मोहम्मद अली पार्क में नागरिकता संशोधन एक्ट (सीएए) के विरोध में 55 दिन से महिलाएं धरने पर बैठी हैं। महिलाओं ने कहा कि जब तक सीएए कानून वापस नहीं होता तब तक हमजोग शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जारी रखेंगे। प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना है कि जो दिल्ली में हो रहा है वह गलत है। हिंसा के पीछे अराजकतत्वों के साथ बाहरी लोगों की साजिश है। सरकार और पुलिस को हिंसा करने वालों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
हिंसा का कोई स्थान नहीं
प्रदर्शनकारी महिलाओं ने कहा कि कुछ लोगों ने मोहम्मद अली पार्क में चल रहे धरने की आड़ में हिंसा फैलाने की प्रयास किया था। हमनें पुलिस के सहयोग से उनके मंसूबों को कामयाब नहीं होने दिया। जबकि पुलिस ने हमें रात के वक्त जबरन धरना स्थल से खदेड़ा। लोगों पर लाठीचार्ज किया। बावजूद हमनें हिंसा के बजाए अहिंसा का सहारा लिया। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने दिल्ली के लोगों से अपील की है कि आपसी भाईचारा बनाए रखें। अरातकतत्वों और सियासतदानों के बहकावे में नहीं आए।
आखरी सांस तक धरना रहेगा जारी
प्रदर्शनकारी महिलाओं ने कहा कि हमें भी पुलिस ने जबरन हटा दिया थी। भीड़ सड़कों पर उतर आई थी। पुलिस ने लाठीचार्ज किया, लेकिन हमनें धैर्य के साथ भीड से सामना कर उन्हें चले जाने को कहा। जिसका नतीजा रहा कि लोग अपने-अपने घरों को लौट गए। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने कहा कि सीएए कानून देश को बांटने वाला है। जिसे हमें ये कबूल नहीं हैं। हम महिलाएं अहिंसा पूर्ण प्रदर्शन आखरी सांस तक जारी रखेंगी।