
उत्तर भारत में मौसम एक बार फिर बड़ा उलटफेर करने जा रहा है और इस बार बदलाव सिर्फ हल्का-फुल्का नहीं बल्कि असरदार और कई जगहों पर नुकसानदेह भी हो सकता है। मौसम वैज्ञानिकों के ताजा विश्लेषण के अनुसार, एक नया सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) और उसके साथ बन रही अनुकूल हवाओं की स्थिति 18 मार्च से 21 मार्च के बीच देश के बड़े हिस्से में तेज मौसमीय हलचल पैदा करेगी।
सीएसए के मौसम वैज्ञानिक डॉ. एस. एन. सुनील पांडेय के अनुसार, 15 मार्च को जिस तरह उत्तर भारत और पर्वतीय क्षेत्रों में तेज हवाओं, गरज-चमक और बारिश का दौर देखने को मिला था, उसी पैटर्न का एक और मजबूत सिस्टम फिर से बन रहा है। यह सिस्टम अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी के साथ मिलकर और अधिक प्रभावी हो रहा है, जिससे व्यापक स्तर पर बादल, वर्षा और आंधी की स्थितियां तैयार हो रही हैं।
सीएसए के मौसम वैज्ञानिक डॉ. एस. एन. सुनील पांडेय के मुताबिक, 18 मार्च को इसका शुरुआती असर दिखाई देना शुरू होगा, लेकिन 19 मार्च से गतिविधियां तेज हो जाएंगी। इस दिन वातावरण में अस्थिरता बढ़ेगी, नमी का स्तर ऊंचा होगा और कई राज्यों में गरज के साथ बारिश शुरू हो सकती है। 20 मार्च को यह सिस्टम अपने चरम पर होगा।
डॉ. पांडेय बताते हैं कि इस दिन देश के लगभग सभी हिस्सों—उत्तर भारत, मध्य भारत, पूर्वी भारत और कुछ दक्षिणी क्षेत्रों—में वर्षा की संभावना बन रही है। इस दौरान तेज हवाएं, बिजली गिरने की घटनाएं और कई जगहों पर ओलावृष्टि भी हो सकती है। 21 मार्च तक यह मौसम प्रणाली धीरे-धीरे कमजोर होते हुए उत्तर प्रदेश, विशेष रूप से कानपुर मंडल, पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत की ओर सिमट जाएगी। हालांकि इन क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां बनी रह सकती हैं।
इस पूरे घटनाक्रम का वैज्ञानिक कारण समझाते हुए डॉ. पांडेय कहते हैं कि पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के साथ-साथ सतह और मध्य वायुमंडल में हवाओं का टकराव (wind convergence) और तापमान में अंतर (temperature gradient) तेजी से बढ़ रहा है। यही कारण है कि आंधी और गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना ज्यादा बन रही है।इस बदलाव का एक महत्वपूर्ण असर तापमान पर भी पड़ेगा। पिछले कुछ दिनों से जो तापमान धीरे-धीरे बढ़ रहा था, उसमें अब गिरावट आएगी। अधिकतम और न्यूनतम तापमान दोनों में कमी दर्ज की जा सकती है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी और मौसम कुछ दिनों के लिए सुहावना हो जाएगा।
लेकिन इस पूरे परिदृश्य में सबसे बड़ी चिंता किसानों को लेकर जताई जा रही है। डॉ. पांडेय के अनुसार, इस समय रबी फसलें—जैसे गेहूं, सरसों और चना—पकने की अवस्था में हैं। ऐसे में तेज हवाएं फसलों को गिरा सकती हैं और ओलावृष्टि सीधे बालियों और दानों को नुकसान पहुंचा सकती है।यदि ओले गिरते हैं तो उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि आंधी के दौरान हवा की गति कई जगहों पर काफी तेज हो सकती है, जिससे पेड़ गिरने, बिजली आपूर्ति बाधित होने और कमजोर ढांचों को नुकसान होने की आशंका है।साथ ही, बिजली गिरने (lightning) की घटनाएं भी बढ़ सकती हैं, जो जानलेवा साबित हो सकती हैं। ऐसे में लोगों को सलाह दी गई है कि मौसम के इस बदले हुए मिजाज को हल्के में न लें, जबकि किसानों को अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए पहले से तैयारी कर लेनी चाहिए।
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Published on:
18 Mar 2026 05:30 am
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