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कनपुरियों को रेलवे के चेयरमैन से आस, दक्षिण भारत के लिए देंगे ट्रेन की सौगात

कानपुर आ रहे हैं अष्वनी लोहानी, रेलवे स्टेशनों का करेंगे निरीक्षण, पिता के संस्थान यूपीटीटीआई भी जाएंगे

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Railway station's chairman Lohani will be coming to Kanpur

कनपुरियों को रेलवे के चेयरमैन से आस, दक्षिण भारत के लिए देंगे ट्रेन की सौगात

कानपुर। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्वनी लोहानी शनिवार को कानपुर आ रहे हैं। वो शहर को कई सौगातें दे सकते हैं। इसी के चलते करीब एक लाख से ज्यादा यात्रियों को उनसे आस है कि वो दक्षिण भारत के लिए एक ट्रेन चलाए जाने का ऐलान कर सकते हैं। चेन्नई में कारोबार करने वाले राहित अस्थाना ने बताया कि देश के चार बड़े रेलवे स्टेशन में शुमार कानपुर सेंट्रल से सीधे चेन्नई, बेंगलुरू और हैदराबाद के एक भी ट्रेन नहीं है। इन जगहों के लिए रोजाना एक य दो ट्रेन सेंट्रल स्टेशन से गुजरती हैं, जिनमें पहले से ही सीट भरी होती हैं। कईबार की गई की, लेकिन किसी ने सुनवाई नहीं की। लोहानी के आने के बाद हमलोगों को एक ट्रेन मिलने की उम्मीद बढ़ी है।

यात्रियों की बढ़ी उम्मीद
चेयरमैन रेलवे बोर्ड (सीआरबी) अश्वनी लोहानी एक दिनी दौरे के लिए कानपुर आ रहे हैं। वह कानपुर में सेंट्रल रेलवे स्टेशन सहित रेलवे के विभिन्न विभागों का निरीक्षण करेंगे। संभावनाएं जताई जा रहा हैं कि वह कई विकास योजनाओं की घोषणाएं कर सकते हैं। इसी के तहत दक्षिण भारत के शहरों को जाने वाले यात्री भी खासे खुश हैं। उन्हें आस है कि लोहानी कानपुर से सीधे चेन्नई, बेंगलुरू और हैदराबाद के बीच ट्रेल चलाए जाने की घोषणा कर सकते हैं। बेंगलुरू में जॉब करने वाले आजादनगर निवासी दीपक मिश्रा कहते हैं कि सेंट्रल स्टेशन से सीधे कोई ट्रेन नहीं होने के चलते हमें एरोप्लेन का सहारा लेना पड़ता है। कभी-कभी टिकट नहीं मिलने से ट्रेन के जरिए कानपुर आना पड़ता है। इस दौरान हमें तीन ट्रेनें बदलनी पड़ती हैं।

ये योजनाएं अधर में लटकी
सेंट्रल स्टेशन को विश्वस्तरीय बनाने की घोषणा पिछले दो सालों से की जा रही हैं। इसके लिए मास्टर प्लान भी तभी बनाया गया है, जो कि अभी तक रेलवे बोर्ड में लंबित पड़ा है। री-डेवलपमेंट के प्रस्ताव को भी अब जाकर हरी झंडी मिली है, लेकिन योजना को अमलीजामा पहनने में अभी भी समय है। दो साल पहले स्टेशन परिसर के सारे प्लेटफार्मो पर स्वाचालित सीढ़ियां और लिफ्ट की व्यवस्था की गई थी, लेकिन स्वचालित सीढ़ियां केवल सिटी साइड हैं और लिफ्ट के लिए गड्ढे खोदकर डाल दिए गए हैं। इसके अलावा सारे प्लेटफार्मो पर ट्रेनों की लाइव जानकारी देने की बात कही गई थी, पर यह योजना पूरी तरह से ठंडे बस्ते में हैं। बेस किचन को लेकर चर्चाएं काफी समय से चल रही हैं, लेकिन अब तक जमीन का निर्धारण भी नहीं हो सका। स्टेशन परिसर में अधिकांश बैंकों के एटीएम की स्थापना करके एटीएम हब तैयार करना था, लेकिन अभी भी जमीन में एक पैसे का कार्य नहीं हुआ।

नाम का महिला स्टेशन
रेलवे ने महिलादिवस के अवसर पर गोविंदपुरी रेलवेस्टेशन को महिलाओं के हवाले किया था। यहां टिकट से लेकर यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी महिलाओं के हाथों में सौंपी गई थी। छह माह बीत गए, पर जीआरपी में एक भी महिला सिपाही की तैनाती नहीं हुई। इसके अलावा कहा गया था कि छह महीने में यह स्टेशन टर्मिनल के रूप में विकसित किया जाएगा। दिल्ली से हावड़ा की ओर जाने वाली राजधानी एक्सप्रेस का ठहराव यहां करने की घोषणा की गई थी। संयोग से शनिवार को छह महीने की मियाद पूरी हो रही है। एक अदद महिला रेलवे स्टेशन की घोषणा के अलावा गोविंदपुरी रेलवे स्टेशन की सूरत में कोई बदलाव नहीं आया है। राजधानी एक्सप्रेस तो दूर किसी अतिरिक्त मेल ट्रेन का ठहराव भी गोविंदपुरी में नहीं बढ़ाया गया। महिला रेलवे स्टेशन में महिला शौचालय का इंतजाम भी छह महीने में नहीं हो सका है। यहां दो नए प्लेटफार्म बनाने की योजना भी थी, जो कि ठंडे बस्ते में है।

दाग मिटा दें सरकार
कानपुर सेंट्रल देश का सबसे गंदा स्टेशन है। इसका खुलासा खुद रेलवे के एक सर्वे में हुआ था। रेलवे ने इंटरेक्टिव वाइस रेस्पांस सिस्टम (आईवीआरएस) के माध्यम से बीती 11 से 17 मई के बीच यह सर्वे कराया। इसके लिए आईआरसीटीसी की वेबसाइट या फिर काउंटरों से बुक होने वाले टिकट पर सफर करने वाले यात्रियों के मोबाइल नंबर एकत्र किए गए। इन यात्रियों से अलग-अलग बात की गई। उसके आधार पर सर्वे रिपोर्ट तैयार की गई। इसमें देश के टॉप 10 गंदे रेलवे स्टेशनों की सूची भी जारी की गई है। इस सूची में कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पहले स्थान पर है। यात्रियों की कहना है कि लोहानी जी को आगे आकर स्टेशन को साफ-सुधरा बनाए जाने के आदेश देने चाहिए। राजू प्रजापति कहते हैं कि साफ-सफाई के नाम पर हर साल 20 करोड़ रूपए खर्च किए जाते हैं, लेकिन प्लेटफार्म हालात जस के ता रहते हैं।

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