
71 साल के इस बुजुर्ग ने कर दिया हैरान करने वाला कमाल, ताइक्वांडो में मनवाया अपना लोहा, चैम्पियनशिप में सेलेक्ट
कानपुर. कौन कहता है, आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों..। दुष्यंत के इस शेर से प्रेरणा लेकर, कानपुर के 71 साल के एक बुजुर्ग ने वह कार्य किया, जिसका लोहा पूरा शहर मानता है। इस उम्र में जब लोग लाठी का सहारा लेकर चलते हैं, बाजपेयी मार्शल आर्ट में देश के लिये गोल्ड मैडल लाने का दमखम भर रहे है। भारतीय खेल प्राधिकरण ने इस साल वियतनाम में होने वाले एशियन ताईकवाण्डो चैम्पियनशिप में भाग लेने के लिये 71 वर्षीय राम गोपाल बाजपेयी के नाम को हरी झण्डी दे दी है। इसी के बाद वह सुबह से लेकर देरशाम तक जमकर पसीना बहा रहे हैं और उन्हें उम्मीद है कि वह सेना लेकर ही देश आएंगे।
कई मेडल अपने नाम कर चुके हैं बाजपेयी
जिस उम्र में इन्सान को चलने के लिये लाठी का सहारा लेना पड़ जाता है, उम्र की उस दहलीज को पार कर चुके 71 साल के राम गोपाल बाजपेयी प्राचीन युद्धकला पूमसे का अभ्यास कर रहे हैं। उनकी ये तैयारी मई माह में वियतनाम में होने वाली एशियन ताईकवाण्डो चैम्पियनशिप के लिये है। बाजपेयी ने साल 2016 में हुगली में हुई नेशनल चैम्पियनशिप में गोल्ड मैडल जीता था और उनके इस प्रदर्शन को देखते हुए साई यानि भारतीय खेल प्राधिकरण ने उन्हें पिछली 12 अप्रैल को टायल के लिये बुलाया और एशियन ताईकवाण्डो चैम्पियनशिप के लिये फिट करार दिया। टीम में चयन के बाद बाजपेयी नियमित प्रक्टिस कर रहे हैं और युवाओं को भी इस खेल की शिक्षा-दिक्षा दे रहे हैं।
ब्लैक बेल्ट कर चुके हैं हासिल
राम गोपाल के खाते कई उपलब्धियॉ दर्ज हैं। अपनी युवावस्था में उन्होने मार्शल आर्ट के महान कलाकार ब्रूस ली की फिल्म “एण्टर दि ड्रैगन“ देखी थी। कुछ साल बाद उन्होने भारत में ताईक्वाण्डो के पितामह जिमी जिगतियानी की देखरेख में मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण लिया और 1987 में ब्लैक बेल्ट हासिल की। बारह साल पहले बीएसएनएल से रिटायरमेण्ट के बाद उन्होने पूरा जीवन इस युद्धकला के नाम कर दिया और आज भी वो इसमें नित नये आयाम बनाने को आतुर हैं। राम गोपाल बाजपेयी बताते हैं कि एण्टर दि ड्रैगन फिल्म देखकर उसके हर एक्शन को अपने दिमाग के अंदर उतारा और जमकर पसीना बहाया। जिसके कारण मैं एक अच्छा ताईकवाण्डो खिलाड़ी बन सका।
बीएसएनएल के रिटायर्ड कर्मचारी हैं बाजपेयी
बाजपेयी ने बताया कि बीएसएनएल में बतौर टेक्नीशियन के पद पर नौकरी के साथ शुरूआत की। घर की आर्थिक स्थित खराब होने के चलते जो वेतन मिलता वह पिता को दे देते। बाजपेयी ने बताया कि घर में बिजली कनेक्शन नहीं था, जिसके कारण पढ़ाई-लिखाई के लिए साइकिल के टॉयरों का सहारा लेना पड़ा। बीएसएनएल में जौब मिली, लेकिन योग्यता अनुसर कार्य नहीं मिला। जिसके कारण हमने नौकरी के साथ-साथ आगे की बढ़ाई जारी रखी। बीएसएनएल की विभागीय परीक्षाएं देते हुए डिवीजनल इन्जीनियर के पद तक पहुंचे। पॉच क्षेत्रीय भाषाओं के जानकर बाजपेयी अब तक देश के सभी राज्यों की स्पर्धाओं के अलावा नेशनल टूर्नामेण्ट में अपना सिक्का जमा चुके हैं। बाजपेयी ताईकवाण्डो में अपना लोहा बनवाने के लिए सुबह से लेकर देरशाम तक पक्टिस करते हैं। साथ ही यवुओं को भी इस खेल के गुर सिखा रहे हैं।
एशियन गेम्स में उम्र बनी रोड़ा
उन्हें पता है कि एशियन चैम्पियनशिप में उनका मुकाबला कोरिया, चीन और जापान के मॅझे हुए खिलाड़ियों से होगा। पर वह इन्हें पटखनी देने के लिए फिल्मों के साथ युवाओं के साथ सुबह दो घंटे और शाम को तीन घंटे पसीना बहाते हैं। इस खेल की पिछली स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों के नाम कोई छोटी उपलब्धि भी दर्ज नहीं है, इसलिये साई यानि भारतीय खेल प्राधिकरण वियतनाम टूर को लेकर कोई बहुत उत्साहित नहीं हैं लेकिन इस 71 वर्षीय खिलाड़ी के जज्बे को खेल अधिकारी भी सलाम कर रहे हैं। एशियन ताईकवाण्डो चैम्पियनशिप के बाद 12 अगस्त से जकार्ता में एशियन गेम्स भी होने हैं। लेकिन भारतीय खेल प्राधिकरण इस स्पर्धा में 17 से 30 वर्ष आयु वर्ग के खिलाड़ी ही भेजता है। सरकार की इस नीति के चलते बाजपेयी एशियाड में भाग नहीं ले पायेगें और उन्हें इसका मलाल भी है। बाजपेयी कहते हैं कि उम्र बढ़ गई, पर मैं अभी बूढ़ा नहीं बल्कि जवान हूं।
Published on:
18 Apr 2018 09:25 am
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