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विपक्ष को घेरने के लिए रचा चक्रव्यूह, 2019 फतह करने के लिए उतरा संघ

संघ की नाखुशी के चलते चला हथौड़ा, कई पदाधिकारियों को पदों से हटाया गया

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विपक्ष को घेरने के लिए रचा चक्रव्यूह, 2019 फतह करने के लिए उतरा संघ

कानपुर। यूपी में मायावती के बड़ते कद को देख संघ एक्शन में आ गया है और 2019 फहत करने के लिए जमीन पर उतर कर दलितों को अपने साथ जोड़ रहा है। इसके अलावा संघ के स्वमंसेवक दलित बाहूल्य गांवों में जाकर युवाओं को जोड़ने के साथ भाजपा संगठन व जनप्रतिनिधियों पर भी नजर रख रहे । कानपुर-बुंदेलखंड के किले को बचाने के लिए संघ के इशारे पर महामंत्री ओमप्रकाश को हटा दिया गया। अब उनकी जगह ब्रज क्षेत्र के भवानी सिंह को यहां का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। साथ ही क्षेत्रीय संगठन महामंत्री पद पर काबिज विवादित पदाधिकारियों को पद से हटा दिया गया है। इसी के तहत कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के महामंत्री ओमप्रकाश को यह पद छोड़ना पड़ा। अब यहां की जिम्मेदारी ब्रज क्षेत्र के भवानी सिंह को दी गई है। ओमप्रकाश पिछले दो सालों से यह पद था। इनके हटने से क्षेत्रीय अध्यक्ष मानवेंद्र सिंह पर जिम्मेदारी ज्यादा बढ़ गई है। संघ अपने स्वमंसेवकों को भाजपा संगठन के अंदर प्रवेश कराने जा रहा है। आने वाले वक्त में स्वमसेवकों के हाथों में संगठन की जिम्मेदारी मिलना तय है।
उरई जाकर बनाई थी रणनीति
भाजपा की नजर उत्तर प्रदेश के दलित बाहूल्य बुंदेलखंड के सात जिलों में है। इसी के चलते संघ प्रमुख ने उरई में शाखा का आयोजन कराए जाने के आदेश दिए। पिछले माह वह खुद कानपुर आए और उरई जाकर वहां संघ के प्रान्त प्रचारकों के साथ बैठक की और जमीनी इनपुट मिलने के बाद उन्होंने ओमप्रकाश को हटाए जाने का फरमान प्रदेश अध्यक्ष को सुना दिया। 18 लाख दलित बाहूल्य जिलों की सभी सीटों पर भाजपा का कब्जा है और इन्हें बरकरार रखने के लिए भाजपा ने यहां ज्यादा से ज्यादा युवाओं को संगठन में लाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए हैं। सूत्रों की मानें तो संघ कानपुर-बुंदेलखंड के 10 में से सात वर्तमान सांसदों के कार्यो से नाखुश है और इन पर टिकट नहीं मिलने की तलवार लटक रही है। संघ ने भाजपा से नए चेहरों की खोज का हुक्म सुना दिया है
भवानी सिंह को मिली जिम्मेदारी
भाजपा अपने मजबूत गढ़ कानपुर-बुंदेलखंड को बचाने के लिए भवानी सिंह को संगठन मंत्री बनाया है। भवानी सिंह बृज की जिम्मेदारी संभालेंगे। इनका मुख्यालय आगरा होगा। कानपुर बुंदेलखंड के क्षत्रीय अध्यक्ष मानवेंद्र सिंह ने बताया कि भावानी सिंह के आने से भाजपा यहां की 10 में 10 सीटों में जीत दर्ज करेगी। अभी दस क्षेत्र में भाजपा के पास 9सीटें हैं। साथ 52 में से 47 विधानसभा सीटों पर कमल की जीत हुई है। भाजपा ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव में पहली बार कानपुर-बुंदेलखंड की धरती से बसपा का पूरी तरह से सफाया कर दिया था। यहां से एक भी बसपा का प्रत्याशी चुनाव नहीं जीता। 2017 में मिली हार के बाद बसपा ने फिर से बुंदेलखं डमें अपनी जड़ों को मजबूत किया है और इसी के चलते मोहन भागवत के कहने पर उरई में संघ की शाखा का आयोजन किया गया।
संघ के स्वयसेवकों को मिलेगी जिम्मेदारी
प्रदेश के कई क्षेत्रीय मंत्री बदलने के साथ ही संघ 2019 से पहले अपने स्वमंसेवकों को भाजपा के अंदर दाखिल करा जीत की बुनियाद रखेगा। संगठन सूत्रों ने बताया कि यह निर्णय संघ का है। तय हुआ है कि अब पूर्णकालिक स्वयंसेवकों को ही संगठन में अहम जिम्मेदारी दी जाएगी। दरअसल, विपक्षी एकता और उपचुनावों में हाल ही में भाजपा को मिली हार को लोकसभा चुनाव के लिहाज से बड़ी चुनौती के रूप में लिया जा रहा है। जिला विस्तारक के रूप में पूर्णकालिक स्वयंसेवकों को राजनीतिक जिम्मेदारी पहले ही दी जा चुकी थी। अब चर्चा है कि जिस तरह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कुशल संगठनकर्ता रहे सुनील बंसल को प्रदेश महामंत्री संगठन का दायित्व दिया गया, उसी तरह भाजपा संगठन में संघ के अन्य अनुषांगिक संगठनों से रणनीतिकारों को भाजपा के काम में लगाया जा सकता है। संभव है कि अतिरिक्त प्रभार अस्थायी हो और यहां भी स्थायी संगठन मंत्री को भेजा जाए। इसके अलावा प्रदेश से लेकर जिलों तक बड़े फेरबदल जल्द ही संभावित हैं।