
सैफुउल्ला डिप्टी तो गौस था कमांडर इन चीफ, जाजमऊ को बनाया आईएस का हेडक्वार्टर
कानपुर. आईएस के आंतकियों के इरादे इतने खतरनाक थे कि वो देश की लाइफ लाइन कही जाने वाली रेल को बड़े पैमाने में विस्फोटकों के जरिए क्षतिग्रस्त करना चाहते थे। आईएस के आंतकियों ने कानपुर के जाजमऊ को अपना हेडक्वार्टर बनाया था। लखनऊ में मारे गए आतकी सैफुउल्लाह आईएस का डिप्टी तो गौस मोहम्मद कमांडर-इन-चीफ था। गौस मोहम्मद ने युवाओं को आतंक के रास्ते पर धकेलने के लिए हिजरत को जरिया बनाया और पूरे देश में टेरर फैलाने के लिए आतंक के सामान की मैन्युफैक्चरिंग भी यहीं करवा रहा था। उसने युवाओं को आईएस की मैग्जीन से बम बनाने की ट्रेनिंग दी थी। यह सब खुलासे भोपाल उज्जैन पैसेंजर ट्रेन की जांच करने वाली नेशनल इंवेस्टिगेटिव एजेंसी की चार्जशीट में हुआ है, जिसे एनआईए ने कोर्ट में सबमिट किया है।
देश की लाइफ-लाइन पर थी आंतकियों की नजर
एमपी की राजधानी भोपाल में उज्जैल पैसेंजर में बम रखने के आरोप में वहां की एटीएस ने कई संदिग्धों को पकड़ा। इसके बाद आईएस के खुरान माड्यूल का खुलाशा हुआ। एटीएस के हत्थे लगे सभी संदिग्ध जाजमऊ के निवासी निकले। पूछताछ के दौरान उन्होंने सरगना गौस मोहम्मद और सैफुउल्ला के बारे में जानकारी दी। इसी के बाद यूपी एटीएस ने सैफुउल्ला को इनकाउंटर में मार गिराया और कुद दिन के बाद आईएस के कमांडर गौस मोहम्मद को धरदबोचा। गौस की गिरफ्तारी के बाद आईएस की कमर एनआईए और एटीएस ने तोड़ दी। कानपुर के साथ ही अन्य इलाकों से एक दर्जन संदिग्धों को एनआईए ने अरेस्ट किया। जिसने पूछताछ के बाद पता चला कि आंतकी रेल पटरियों को विस्फोट के जरिए उड़ाकर बड़े पैमाने पर तबाही मचाना चाहते थे।
सैफुउल्ला ने घाटमपुर ने प्लांट किया था बम
गौस मोहम्मद ने बन बनाने और अन्य आंतकियों को इसके लिए ट्रेंड करने के लिए जाजमऊ निवासी आतिफ को जिम्मेदारी दी हुई थी। उसने कई तरह के बम बनाने के लिए बॉम्ब गाइड भी तैयार की जिसे उसके लैपटॉप से बरामद किया। इस गाइड के जरिए उसने कई लोगों को बम बनाने के तरीके भी बताए। अगस्त 2016 में आतिफ ने उन्नाव के कटरीपीपरखेड़ा में अपने बनाए बम की टेस्टिंग भी की। इसके बाद आतिफ, सैफुल्लाह और दानिश ने प्लास्टिक बम बना कर वारदात के इरादे से घाटमपुर में रेल की पटरी के पास उसे रखा। हालांकि वह ब्लास्ट फेल हो गया था। सीडीआर में इन तीनों की मोबाइल लोकेशन भी उस दिन घाटमपुर में मिली है।
गूगल की मदद से तैयार किया था काला झंडा
इस्लामिक स्टेट और जेहाद की अवधारणा से प्रभावित होकर जाजमऊ के केडीए निवासी आतिफ ने गूगल की मदद से आईएस का काला झंडा बनाया। झंडे के लिए काले कपड़े, सफेद पेंट का इंतजाम दानिश ने किया। जिसके बाद दोनों ने अरबी भाषा में लिख कर आईएस का झंडा बनाया। एक झंडे को लखनऊ में सैफुल्लाह के एनकाउंटर के बाद रिकवर भी किया गया था। जबकि आतिफ के पास से बरामद मोबाइल फोन में भी आतिफ, दानिश, हमजा अबू बकास और सैफुल्लाह की झंडे के साथ खड़े फोटो मिली।
सैफुउल्ला बस के जरिए लेकर गया था हथियार
गौस मोहम्मद और सैफुउल्ला ने जाजमऊ को हेडक्वाटर बनाने के बाद लखनऊ को बेस कैंप बनाया। वो यहां किराए का मकान लेकर रहा और युवाओं को बलगराकर उन्हें आईएस में भर्ती करने के लिए जमीन तैयार कर रहा था। सैफुल्लाह कानपुर से सड़क के रास्ते बस से हथियार और असलहे लखनऊ ले गया। जिसमें से आधा असलहा गौस मोहम्मद वापस बाइक से कानपुर ले आया। आतिफ और गौस मोहम्मद ने आईएस के जेहाद से प्रभावित होकर सीरिया जाने का फैसला भी किया था। वहां जाने के लिए दोनों कोलकाता भी गए थे और वहां से सुंदरबन की तरफ से बांग्लादेश में घुस कर सीरिया जाने की कोशिश भी की थी।
Published on:
03 Sept 2017 09:37 am
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