विनोद निगम
कानपुर. देश में अगर नोटबंदी का तूफान न आया होता तो शायद काले धन के कुबेर बन बैठे सरकारी अफसर और कारोबारी कभी बेनकाब न होते। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के एलान के बाद अब कानपुर के कारोबारी व नौकरशाहों की काली कमाई की पोल धीरे-धीरे खुल रही है। आरटीओ सुनीता वर्मा और उनके पति वाणिज्यकर के ज्वाइंट कमिश्नर डीके वर्मा के बाद सीबीआई ने जीएसटी कमिश्नर संसार चंद, उनकी पत्नी अविनाश कौर समेत नौ अन्य अफसर व उद्योगपतियों को अरेस्ट किया है। सीबीआई ने संसार चंद को फरीदाबाद के पास दबोचा जबकि उनकी पत्नी और चार बिचौलिये, तीन सुपरिटेंडेंट और एक निजी सचिव को कानपुर से उठाया गया है। संसार चंद और उद्योगपति उद्यमी चंद्रप्रकाश उर्फ मोनू ने जीएसटी के फेर में फंसाने और बचाने के नाम पर एक पूरा गैंग खड़ा कर लिया था। गैंग की कमान इनकी पत्नी अविनाश कौर के हाथों में थी और लेनदेन गुजैनी स्थित घर पर होता था।
उत्पीडऩ शुरू कर दिया
सेंट्रल इक्साइज डिर्पाटमेंट में बतौर कमिश्नर के पर काम करने वाले संसार चंद को जीएसटी लागू होने के बाद जीएसटी का कमिश्नर बनाया गया था। कमिश्नर की कुर्सी पर बैठने के बाद इन्होंने डेढ़ करोड़ प्रतिमाह के ऊपर कारोबार करने वाले व्यापारियों का उत्पीडऩ शुरू कर दिया। जीएसटी कानून का डर दिखाकर कई नामी उद्योगपतियों से यह वसूली करते थे। इसके अलावा इनके संबंध भी कानपुर के कुछ कारोबारियों से थे, जिनके मामले यह पैसे लेकर रफा-दफा कर देते थे। कानुपर के नामी उद्योगपति ने जीएसटी कमिश्नर की शिकायत भाजपा नेताओं के अलावा खुद वित्तमंत्री से की थी। इसी के बाद सेंट्रल एक्साइज और सर्विस टैक्स विभाग के कमिश्नर संसारचंद जांच एजेंसियों के निशाने पर थे। देरशाम संसार चंद कानपुर से लखनऊ गए थे और वहां से दिल्ली के लिए निकले। जिन्हें सीबीआई ने फरीदाबाद के पास अरेस्ट कर लिया। संसार चंद के कानपुर गुजैने मोहल्ले के अलावा लखनऊ नोएडा, गाजियाबाद में मकान हैं।
दो दिन से सीबीआई ने रखे थी नजर
संसार चंद की गिरफ्तारी से पहले सीबीआई की टीम कानपुर में दो दिन से डेरा जमाए हुए थी और इनके हर मूवमेंट पर नजर रखे हुए थे। शुक्रवार को जब संसार लखनऊ के लिए निकले तो टीम ने इनका पीछा किया। दिल्ली जाने के दौरान इन्हें सबूतों के साथ धरदबोचा। सीबीआई की एक टीम अब भी कानपुर में मौजूद है और इनके साथ जुड़े अफसर व कारोबारियों को अरेस्ट कर सकती है। सूत्रों की मानें तो सीबीआई ने सर्वोदय नगर स्थित सेंट्रल जीएसटी मुख्यालय (पूर्व सेंट्रल एक्साइज, कस्टम व सर्विस टैक्स मुख्यालय) में छापा मार था और यहां से तीन सुपरीटेंडेंट अमन शाह, अजय श्रीवास्तव, राजीव सिंह चंदेल और संसार चंद की पत्नी अविनाश कौर एवं उनके निजी सचिव सौरभ पांडेय सहित उद्यमी मनीष शर्मा (निदेशक शिशु सोप), अमित अवस्थी, अमन जैन, चंद्रप्रकाश उर्फ मोनू को गिरफ्तार किया था।
इसके चलते धरा गया यह अफसर
संसार चंद की लीला अनोखी थी। वह अपने पद पर रहते हुए सरकार के खजाने में जमकर चपत लगाई। इस दौरान इसने खूब काली कमाई से पत्नी के नाम जेवरात बनवाए और लॉकरों में रखवा दिए। जीएसटी कमिश्नर बनने के बाद संसार चंद ने अपना एक गिरोह तैयार कर लिया। जिसमें विभाग के अफसर, कर्मचारियों के अलावा कई बड़े कारोबारी शामिल थे। संसार चंद जीएसटी के नाम पर बड़े कारोबारियों को फंसाते और बचने के तरीके उनके गुर्गे पीडि़तों को बताते। जेल जाने के डर से कारोबारी इनके झांसे में आ जाते और पैसा देकर अपना पीछा छुड़ा लेते। एक कारोबारी ने बताया कि सेंट्रल इक्साइज डिर्पाटमेंट में बतौर कमिश्नर पद पर रहने के दौरान यह छोटे व्यापारियों को परेशान करते थे। उसी समय इनकी शिकायत शासन-प्रशासन तक हुई थीं।
चंद्रप्रकाश उर्फ मोनू पूरे गैंग को हैंड करता था
जीएसटी कमिश्नर की कुर्सी पर बैठने के बाद संसार चंद ने अपने करीबी कारोबारी चंद्रप्रकाश उर्फ मोनू को व्यापारियों से उगाही का जिम्मा सौंपा था। मोनू और संसार के बीच परिवारिक रिश्ते थे। मोनू ने ही बाद में उद्यमी मनीष शर्मा (निदेशक शिशु सोप), अमित अवस्थी, अमन जैन को संसार चंद से मिलवाया। पैसे का लेनदेन घर पर संसार चंद की पत्नी अविनाश कौर करती थीं। मोनू अक्सर संसार चंद के गुजैनी वाले घर पर कारोबारियों को ले जाता और वहीं पर जीएसटी से बचने के नाम पर पैसा दिलवाता था। सूत्रों की मानें तो संसार चंद्र की पत्नी का फेराफेरी में अहम रोल था। एक व्यापारी की मानें तो जीएसटी के नाम पर यह खेल कई माह से फल-फूल रहा था। शहर के जाने-माने कारोबारी ने एक भाजपा नेता से मिलकर संसार चंद की करतूत बताई और इसी के बाद इन्हें पर कार्रवाई हुई।
संसार के पहले यह अफसर किए गए अरेस्ट
आयकर अफसरों ने कानपुर की पूर्व वाणिज्यकर के एडिशनल कमिश्नर केवश लाल आरटीओ सुनीता वर्मा और उनके पति वाणिज्यकर के ज्वाइंट कमिश्नर डीके वर्मा को पद पर रहते हुए करोड़ों की हेराफेरी के आरोप में पकड़ा था। आयकर की टाम ने कानपुर और नोएडा से केशव लाल के घर से कारोड़ी की बेनामी सम्पत्ति और ज्वेरात बरामद किउ थे। नोटबंदी के बाद केशव लाल ने नकदी को निकालने के लिए खूब सोना खरीदा, पत्नी के नाम पर मकान, फ्लैट और प्लॉट लिए। केशव लाल की पत्नी के नाम ं लखनऊ, इलाहाबाद, गाजियाबाद, और नोयडा के आठ फ्लैट और मकान थे। आईटी की जांच-पड़ताल के बाद केशव लाल के पास चल-अचल संपत्ति करीब 300 करोड़ से ज्यादा की सामने आई थीं।