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स्कूली बच्चों से भरी बस पलटी, दो दर्जन नौनिहाल जख्मी

नशे में धूत चालक तेज रफ्तार में भगा रहा था बस, पुलिस ने फंसे बच्चों को बाहर निकाल अस्पताल में करवाया एडमिट

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school bus crashes in ghatampur 24 children injured in kanpur news

स्कूली बच्चों से भरी बस पलटी, दो दर्जन नौनिहाल जख्मी

कानपुर। घाटमपुर थानाक्षेत्र के अमौर गांव के पास सोमवार को दिल दहला देने वाला हादसा हुआ। यहां स्कूली बच्चों से भरी बस पलट गई, जिसके चलते 2 दर्जन से ज्यादा नौनिहाल बुरी तरह से जख्मी हो गए। स्थानीय लोगों की सूचना पर पुलिस को सूचना ने बस के अंदर फंसे बच्चों को बाहर निकाला और उन्हें अस्पताल में एडमिट करवाया। वहीं चालक व परिचालक मौके से भाग खड़े हुए। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधक खटारा बसों में भूसे की तरह बच्चों को ठूंस-ठूंस कर भरते हैं। कईबार शिकायत की गई, लेकिन उनके कानों में जूं नहीं रेंगी। इस दौरान अभिभावकों ने रोड जाम करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस के समझाने के बाद वो शांत पड़े।

नशे में थे चालक-परिचालक
साढ़ चौकी क्षेत्र के कुंदौली स्थित सीपीसी इंटर कॉलेज की बस सोमवार की सुबह रोजाना की तरह साढ़ इलाके के आधा दर्जन से ज्यादा गांवो के 70 से 80 बच्चों को लेकर सरसौल मार्ग से स्कूल आ रही थी। बस की स्पीड तेज होने के चलते चालक का स्टेयरिंग पर से नियंत्रण खो बैठा और बस सड़क किनारे जा पलट गई। बस के अंदर बच्चे फंस गए और बचाने की गुहार लगाने लगे। स्थानीय लोगों ने किसी तरह से एक-एक कर बच्चों को बाहर निकालना शुरू कर दिया। कुछ देर के बाद पुलिस मौके पर आई और रेस्क्यू ऑपरेशन के जरिए सभी बच्चों को बस से बाहर निकाला और घायलों को अस्पताल में एडमिट करवाया। । प्रत्यक्षदर्शियों की माने तो हादसे के बाद बस चालक व परिचालक बच्चों को उसी हाल में छोड़कर भाग निकले। यहीं नहीं ग्रामीणों का ये भी कहना है कि दोनों नशे की हालत में थे ।

70-80 बच्चे सवार थे
बच्चों के अभिभावकों ने बताया कि बस 30 सीटर है, लेकिन कॉलेज प्रबंधक इसमें 70 से 80 बच्चों को भूसे की तरह ठूंस-ठूंक कर भरा था। हमलोगों ने कईबार इस पर एतराज किया तो प्रबंधक बच्चों को स्कूल से बाहर करने की धमकी देते। साढ़ निवासी पुष्पेंद्र सिंह ने बताया कि जब सुबह बस बच्चों को लेने के लिए गांव आई तो चालक व परिचालक शराब के नशे में थे। हमने फोन के जरिए तत्काल स्कूल प्रबंधक को जानकारी दी। कुछ ही देर के बाद पता चला कि बस पलट गई है। वहीं दूसरे अभिभावक रजनीश शुक्ला ने बताया कि हमलोग मुहंमांगी फीस और आने-जाने का किराया स्कूल को देते हैं, बावजूद हमारे बच्चों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

बवाल बढ़ता देख प्रबंधक फरार
उधर स्कूल प्रबंधक सुधीर सिंह को हादसे की खकर लगी तो वो अपनी लग्जरी कार के जरिए मौके पर पहुंचे। कुछ बच्चे दर्द से कराह रहे थे, लेकिन प्रबंधक उनके पास नहीं गए। प्रबंधक पुलिसवालों से बातचीत करने में व्यस्थ दिखे। प्रबंधक का यह रूप देख अभिभावक भड़क गए और उन्हें पकड़ने के लिए बड़े। पुलिस ने किसी तरह से प्रबंधक को अभिभावकों के चंगुल से बचा कार के जरिए बाहर निकालवा दिया। अभिभावकों ने साढ़ चौकी में जाकर स्कूल प्रबंधक के खिलाफ तहरीर सौंपी। उधर मौके पर पहुंचे साढ़ चौकी इंचार्ज राजकुमार सिंह ने बताया कि चालक की लापरवाही से हादसा हुआ है। तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर पूरे प्रकरण की जांच की जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

मानकों को ताक पर रख दौड़ रहे वाहन
जिले में खटारा स्कूल वाहन मानकों को ताक पर रखकर फर्राटा भर रहे हैं। स्कूली वाहनों में न तो अग्निशमन यंत्र हैं और न ही जीपीएस सिस्टम, फिटनेस की बात तो दूर की कौड़ी है। यही नहीं अनफिट वाहनो में बच्चों को ठूंस कर भरा जाता है। स्कूल वाहनों में बच्चों की सुरक्षा के लिए तो कोई इंतजाम नहीं हैं, लेकिन बच्चे क्षमता से अधिक बैठाए जाते हैं। खटारा टेंपो और वाहनों में बच्चों को बैठाकर ले जाया जाता है। नियमानुसार स्कूल वैन में दस से अधिक बच्चों को नहीं बैठाया जा सकता है, लेकिन इनमें 20-20 बच्चे बैठाए जा रहे हैं। पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट और शासन की ओर से स्कूल वाहनों में अग्निशमन यंत्र और जीपीएस लगाने के निर्देश दिए थे, लेकिन जिले में किसी भी स्कूल ने निर्देशों का पालन नहीं किया

स्कूल वैनों में लगी एलपीजी गैस किट
बच्चों को स्कूल तक ले जाने वाली स्कूल वैन में अवैध एलपीजी गैस किट का उपयोग किया जा रहा है। यह सब अवैध तरीके से हो रहा है। लेकिन फिर भी प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं करता। एलपीजी से दौड़ती कारों से कभी भी हादसा हो सकता है। शहर में दौड़ रहे स्कूल वाहनों के चालक भी प्रशिक्षित नहीं हैं। अधिकांशतः वाहनों में चालकों के पास ड्राइविंग लाइसेंस तक नहीं है। स्कूली वाहनों में हादसे के दौरान प्राथमिक चिकित्सा की दृष्टि से फर्स्ट एड किट होना जरूरी है, लेकिन जिले में दौड़ रहे स्कूली वाहनों में प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स भी नदारद है।