
रार छोड़ गले मिले रामगोपल और शिवपाल, अखिलेश खुश तो खौफजदा भगवा बिग्रेड
कानपुर। पिछले दो सालों से यादव परिवार के अंदर जबरदस्त घमासान मचा रहा। मुलायम सिंह यादव कभी प्रोफेसर रामगोपाल और अखिलेश यादव को बाहर करते तो कभी अंदर। इससे ऊब कर समाजवादी पार्टी के चाणक्य की चाल में सुल्तान और शिवपाल चारो खाने चित हो गए। अखिलेश को पार्टी का राष्ट्रीय बनवाया तो नंबर दो की कुर्सी पर खुद विराजमान हो गए। गुरू भाई नेता जी को संरक्षक तो शिवपाल को जसवंत नगर के अंदर तक सीमित कर दिया। पर विधानसभा और निकाय चुनाव सपा बुरी तरह हार गई। इसी के चलते दोनों भाईयों के बीच पड़ी दरार को कम करने के लिए सपा प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम और पूर्व मंत्री रामसेवक को मुलायम सिंह ने लगाया। रामसेवक ने प्रोफेसर का जन्मदिन धूम-धाम के साथ मनाए जाने का इंतजाम किया और इसके लिए अमर आशियाना होटल को बुक कराया। यहां पर शिवपाल अपने बड़े भाई के पैर छुए तो छोटे को उन्होंने गले लगाया और एक-दूसरे को खिलाया। वहीं लखनऊ में बैठकर पूरे घटनाक्रम पर नरेश उत्तम नजर लगाए रहे और अखिलेश को पल-पल की जानकारी देते रहे। दोनों के एक हो जाने से अखिलेश खुश हैं तो वहीं भाजपा खौफजदा। क्योंकि शिवपाल की पकड़ आज भी जमीन में काम करने वाले कार्यकर्ताओं से सीधी है।
इन दो नेताओं ने निभाया अहम किरदार
सपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायत अपने चचरे भाई व पार्टी के महासचिव प्रोफेसर रामगोपाल यादव को फुटबाल बना दिया था। आज पाटी के अंदर तो कल साइकिल से उतार दिए जाते थे। थक-हार कर चेले ने अपने गुरू भाई पर राजनीति का बाण चला उन्हें और शिवपाल यादव को बैकफुट पर ला दिया और समाजवादी पार्टी के नंबर दो की कुर्सी पर विराजमान हो गए। अखिलेश यादव हर फैसले अपने चाचा रामगोपाल से बात करने के बाद लेने लगे। गुरू भाई मुलायम सिंह को संरक्षक तो छोटे भाई शिवपाल को जसवंत नगर तक सीमित कर दिया। 2016 से लेकर मार्च 2018 तक जमकर यादव परिवार के बीच गृह युद्ध चला और जिसका खामियाजा पार्टी को उठाना पड़ा। विधानसभा से लेकर निकय में चुनाव में साइकिल पंचर हो गई। लोकसभा चुनाव के चलते मुलायम के करीबी नरेश उत्तम तो मुलायम के मित्र रामसेवक को प्रोफेसर और शिवपाल को एक करने की जिम्मेदारी दी गई और दोनों नेताओं ने मिलकर व्यूह रचना तैयार की। शुक्रवार को सारे गिले-शिकवे दूर कर प्रोफेसर रामगोपाल ने अपने छोटे भाई को गले लगाया तो उन्होंने साइकिल की रफ्तार तेज करने का ऐलान कर दिया।
प्रोफेसर से पहले पहुंचे शिवपाल
प्रोफेसर रामगोपाल से पहले सुबह साढ़े सात बजे सपा नेता शिवपाल सिंह यादव पहुंच गए। पंदह मिनट के बाद कुद मिनट के बाद रामगोपाल भी आ गए। होटल के मुख्य गेट पर मंत्रोच्चारण के साथ पंडित जी ने प्रोफेसर रामगोपाल का तिलक किया। उसके बाद प्रोफेसर रामगोपाल, शिवपाल सिंह, पूर्व राज्यमंत्री रामसेवक गंगापुरा और पूर्व राज्यमंत्री केपी सिंह एक साथ हॉल में पहुंचे। यहां प्रोफेसर रामगोपाल और शिवपाल ने एक साथ केक काटा। दोनों दिग्गजों ने एक-दूसरे को केक खिलाया। शिवपाल ने रामगोपाल को गले लगाकर बधाई दी। करीब 20 मिनट तक दोनों नेताओं ने गुफ्तगू की। शिवपाल सिंह, बड़े भाई प्रोफेसर रामगोपाल को गेट तक छोड़े गए। इसके बाद प्रो.फेसर रामगोपाल शिकोहाबाद में कार्यक्रम के लिए निकल गए। करीब एक घंटा बाद शिवपाल भी शिकोहाबाद कार्यक्रम में शामिल होने के लिए निकल गए। इस बीच दोनों गुटों के नेता भी होटल में मौजूद रहे और एक-दूसरे को गले लगाकर चुनाव में एक साथ उतरने का वादा कर अपने-अपने घर चले गए।
प्रोफेसर का सियासी सफर
समाजवादी पार्टी के प्रमुख नेताओं में से एक रामगोपाल यादव का जन्म 29 जून को 1946 उत्तर प्रदेश के इटावा (सैफई) जिले में हुआ था। वह समाजवादी पार्टी संरक्षक मुलायम सिंह यादव के छोटे भाई हैं। साल1969 से 1974 तक यादव ईटावाह के स्नातकोत्तर महाविद्यालय में प्रोफेसर रहे, इसके बाद 1974 से 1994 तक इटावा के ही चैधरी चरण डिग्री कॉलेज के प्रधानाध्यापक रहे। राम गोपाल की उच्च शिक्षा कानपुर विश्वविद्यालय में पूरी हुई। प्रो .रामगोपाल यादव 1969 में केके पीजी कॉलेज में फिजिक्स के लेक्च्रर बने। बाद में उन्होंने राजनीतिक विज्ञान विभाग के अध्यक्ष के तौर पर शिक्षण कार्य किया। इसके बाद वह चौधरी चरण सिंह डिग्री कॉलेज के प्राचार्य रहे। राम गोपाल समाजवादी पार्टी के टिकट पर राज्यसभा के सासंद भी हैं। वर्तमान में वह समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता व महासचिव हैं।
यह भोजन करते हैं प्रोफेसर
नाश्ते में दलिया और फल, दोपहर में धुली मूंग की दाल और तीन बार बिना चीनी की चाय। इस दिनचर्या पर ज़ोर देते हुए प्रोफेसर के क़रीबी उन्हें ’सादगी भरा’ बताते हैं। लेकिन रामगोपाल की छवि एक ’कड़क’ पार्टी नेता की रही है और उनके इर्द-गिर्द रहने वालों ने उन्हें भावुक होते यदा-कदा ही देखा है। रामसेवक ने बताया 2010 में जब उनकी पत्नी फूलन देवी का लंबी बीमारी के बाद दिल्ली के एम्स अस्पताल में देहांत हुआ तब उन्हें फूट-फूट कर रोते देखा गया था। इसके बाद कई आरोपों के कारण पार्टी से जब उन्हें पहली बार निष्कासित किया गया तो 2016 में उन्होंने हमसे कहा था कि नेतीजी ने हमें फुटबाल बना दिया। आज पार्टी के अंदर तो कल साइकिल से उतार देते हैं। अब रामसेवक कुछ करना पड़ेगा और इसी के बाद चाणक्य रूप धारण कर एक चाल में बड़े और छोटे भाई को चित कर साइकिल के सर्वे-सर्वा प्रोफेसर बन गए।
नेता जी प्रोफेसर साहब कह कर पुकारते है
रामसेवक ने बताया कि नेताजी ने रामगोपाल यादव को ’प्रोफ़ेसर साहब’ कह कर संबोधित करते हैं। रामसेवक बताते हैं कि रामगोपाल तब ख़ासे नाराज़ हो उठते हैं जब उनके पास सिफ़ारिश करवाने की मंशा से लोग पूरी फ़ाइल भेज देते हैं। उनका मानना है कि ’जो 30 सेकंड में अपनी बात दूसरे को समझा न सके तब दिक्कत है। रामसेवक बताते हैं कि 2012 विधान सभा चुनावों में जब सपा को उम्मीद से ज़्यादा सीटें मिलीं तब रामगोपाल ने पार्टी के नेताओं की बैठक में खड़े होकर कहा कि इसका श्रेय अखिलेश को है और उन्हें ही मुख्यमंत्री बनना चाहिए। दबे स्वर के विरोध के बावजूद, सभी को इसे मानना ही पड़ा। अखिलेश यादव को राजनीति में लाने में सपा के दो बड़े नेताओं की अहम भूमिका रही है जिसमें स्वर्गीय जनेश्वर मिश्र के अलावा रामगोपाल यादव का भी योगदान है।
Published on:
30 Jun 2018 10:01 am

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