करीब साढ़े तीन बीघा में बने इस मंदिर मे फिर करीब 5 वर्ष बाद भगवान बाला जी की स्थापना भी की गयी। उनकी अनुकम्पा से आज औरैया, इटावा, फर्रुखाबाद, उन्नाव, कन्नौज, फिरोजाबाद, दिल्ली, देवरिया आदि अन्य दूर दराज जिले के लोग यहा अक्षयवट वृक्ष के दर्शन करने के लिये आते हैं।