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कानपुर

इस धार्मिक स्थल के पीछे है पुरानी कहानी, इस राजा के द्वारा बसाया गया था गांव

ग्रामीण के मुताबिक दिल्ली हावड़ा रेलवे लाइन किनारे बसे इस गांव का इतिहास बहुत ही समृद्ध रहा है।

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कानपुर देहात-जनपद के झींझक क्षेत्र में स्थित खम्हैला गांव का प्राचीन इतिहास बहुत ही समृद्ध रहा है। गांव का प्राचीन खम्हैल देवी का स्थल ग्रामीणों की बड़ी आस्था का केंद्र है। ग्रामीण चंद्रकांत त्रिपाठी के मुताबिक दिल्ली हावड़ा रेलवे लाइन किनारे बसे खम्हैला गांव का इतिहास बहुत ही समृद्ध रहा है। मान्यता और यहां वर्तमान में उपस्थित बुजुर्गों के अनुसार यह गांव राजा जयचंद के गुरु खंभेद के द्वारा बसाया गया था। गांव में पहले से ही एक बहुत ही समृद्ध मारवाड़ी मंदिर स्थित है। यहां पर उत्तर पूर्व की दिशा में एक बहुत ही बड़ा टीला था, जिसे यहां के लोग खेड़ा कहते थे। आज उस टीले पर एक बस्ती बसी हुई है। वर्तमान में इस गांव में खम्हैल देवी का मंदिर है। वह मंदिर एक पीपल के पेड़ के नीचे चारों तरफ बनाए गए घेरे में रखी हुई पत्थर की सिलाओं के द्वारा निर्मित है और उन्हीं सिलाओं का पूजन ग्रामीण हर एक नवरात्रि में तथा शेष अन्य दिनों में करते हैं। ग्रामीण आशू शुक्ला ने बताया कि अभी कुछ लोगों की मंशा के अनुरूप मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए यहां खुदाई शुरू हुई तो उसमें प्राचीन पत्थर की मूर्तियां निकली हैं, जो ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं। ग्रामीण ने बताया कि मान्यता के अनुसार राजा जयचंद्र के समय में युद्ध के दौरान खम्हैल देवी का सिर यही रह गया और उनका धड़ सदलपुर ब्लाॅक क्षेत्र के निटर्रा गांव में है, जहां उनका भव्य मंदिर बना है।