
अपराधी और सफेदपोश थे हमनाम, जन्मतिथि भी एक, फिर दुबई में ऐसा फंसे कि......
कानपुर। नाम व्यक्ति की पहचान है। नाम उसे दुनिया भर में प्रसिद्धि दिलाता है और नाम उसे दुनिया की नजरों में गिराता भी है। कानपुर के चार्टर्ड एकाउंटेंट अरुण गुप्ता का नाम ही उनके लिए मुसीबत बन गया। उनके साथ उनके नाम की वजह से ऐसा कुछ हुआ, जिसे वो सारी उम्र नही भूल सकेंगे। वह अपनी शादी की 25वीं सालगिरह मनाने दुबई गए थे और वहां उन्हें पत्नी व बच्चों के साथ एयरपोर्ट पर ही अपराधी मानकर पकड़ लिया गया गया। बेचारे अरुण गुप्ता ने अपने सारे दस्तावेज दिखाए, दलीलें भी पेश कीं पर उन्हें नहीं छोड़ा गया। उनके परिवार को तो वापस कानपुर भेज दिया गया पर शीर्ष खुफिया एजेंसी ने रेड कार्नर नोटिस का हवाला देते हुए अरुण गुप्ता के दुबई छोडऩे पर रोक लगा दी। विदेश में 45 दिन तक अपराधी के रूप में रहने के बाद वह बेगुनाह साबित हो पाए।
अपराधी के जैसा नाम बना मुसीबत
अरुण गुप्ता ने बताया कि दिसंबर में उनकी शादी के 25 साल पूरे हुए थे। इस मौके पर अपने दो बेटों व पत्नी के साथ दुबई घूमने निकले थे। दुबई एयरपोर्ट पहुंचे तो इमीग्रेशन अधिकारियों ने वहीं रोक लिया और कहा कि वह पहले भी दुबई आ चुके हैं। अरुण ने अपने पासपोर्ट सहित सभी दस्तावेज दिखाए और कहा कि चेक कर लीजिए। लेकिन अधिकारी नहीं माने और कहा कि उनके खिलाफ दुबई में फ्रॉड के मामले में रेड कार्नर नोटिस है और दो आपराधिक मामले दर्ज हैं। बाद में पता चला कि जिस व्यक्ति ने चेक बाउंस के जरिए फ्रॉड किया था, उसका भी नाम अरुण गुप्ता था और दोनों की जन्मतिथि एक थी। अरुण गुप्ता एक जैसे नाम और एक जैसी जन्मतिथि के चलते बुरी तरह फंस गए थे।
पाकिस्तानी अधिकारी ने दिया साथ
अरुण गुप्ता ने बताया कि उन्हें खुद को बेगुनाह साबित करने में ४५ दिन लग गए। बेगाने देश में अरुण की इस जंग में दुबई के अतीक भाई और पाकिस्तानी जांच अधिकारी अल हाशमी ने हर कदम पर उनका साथ दिया। अरुण ने बताया कि एक तरफ मैं दुबई की कैद में तड़प रहा था तो दूसरी तरफ मेरा परिवार कानपुर में बेबस था। पत्नी ने विदेश मंत्रालय से गुहार लगाई, तब वहां का दूतावास सक्रिय हुआ। मैंने हिम्मत नहीं हारी और लड़ाई लड़ता रहा। अतीक भाई ने इस जंग में मेरा आखिरी तक साथ दिया। बेगाने देश में अतीक भाई अरुण के लिए सच्चे मित्र बनकर सामने आए। किसी के परिचय के जरिए दोनों एक दूसरे के संपर्क में आए। बंधक अरुण को अपने घर लेकर आए। इस शर्त पर कि रोजाना कोर्ट में वह हाजिरी लगाने आएंगे।
जांच रिपोर्ट मानने को तैयार नहीं थी कोर्ट
दुबई में अपराधी माने गए अरुण गुप्ता तभी बेगुनाह साबित हो सकते थे जब सीईजी, इमीग्रेशन और पुलिस यानी तीन विभागों की रिपोर्ट उनके पक्ष में आए। हालांकि बारीक जांच, दस्तावेज और लंबी पूछताछ की प्रताडऩा के बाद तीनों ने रिपोर्ट अरुण के पक्ष में दे दी लेकिन दुबई कोर्ट के जज ने ये कहते हुए खारिज कर दी कि दो व्यक्तियों का नाम और जन्मतिथि एक नहीं हो सकती। यही अपराधी है। साथ ही जांच अधिकारी को बदलकर एक पाकिस्तानी अल हाशमी को नए सिरे से जांच के आदेश दिए। अल हाशमी ने अरुण की खुलकर मदद की।
सीए का गुस्सा काम आया
वीजा से ज्यादा दिन रुकने पर उन पर 200 दिरहम रोज की पेनाल्टी भी लगाई गई, जिसे जमा करने वह इमीग्रेशन पहुंचे तो अधिकारी ने ये कहते हुए फिर देश छोडऩे पर रोक लगा दी कि सारी एनओसी और कोर्ट के आर्डर फर्जी हैं। इस पर अरुण गुप्ता का धैर्य जवाब दे गया और वह अधिकारी पर बरस पड़े। उनके तेवर देख इमीग्रेशन विभाग बैकफुट में आ गया और फाइनल मुहर लगाकर भारत जाने का रास्ता साफ कर दिया।
Published on:
18 Nov 2019 01:14 pm
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