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कानपुर

अपने पापा की लाड़ली गुड़िया, टेंशन के वक्त दवा की पुड़िया

सात साल की मासूम के बड़े-बड़े सपने, पिता की तरह राजनीति में आकर करेगी देश सेवा

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कानपुर। मैं अपने पापा की नन्हीं गुड़िया हूं। लोगों की समस्याओं का निराकरण कर जब वो घर आते हैं तो उनकी थकान चेहरे में झलकती है, पर जैसे ही वो मुझे गोद में उठाते हैं तो सारी थकान गुम जो जाती है। वो राजनीति में हैं, गरीब, बेसहारा और देश-प्रदेश के विकास के लिए अपना योगदान देते हैं और जब भी कहीं समस्या आती है तो वो आकर मुझसे उसका हल पूछते हैं। सही और गलत की परख करती हूं और उन्हें सच के साथ चलने की सीख देती हूं। पढ़ लिखकर मैं भी अपने पापा की तरह राजनीति में आऊंगी, पैसे नहीं कमाऊंगी, महात्मा गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी, लाल बहादुर शास्त्री और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह इमानदारी से देश की सेवा करूंगी। यह शब्द एक सात साल की मासूम बेटी के हैं। जिसे इतनी कम्र उम्र में सच और झूठ की सही जानकारी है और अपने पापा की टेंशन की दवा का काम करती है।

कुछ इस तरह है ये नन्हीं परी
निवास सिविल निवासी मोहित पांडेय, जो बीजेपी के कानपुर-बुंदेलखंड परिक्षेत्र के मीडिया प्रभारी हैं और पिछले कई सालों से वो दल के साथ जुड़े हैं। बतौर मोहित पांडेय आईटी प्रोफेशनल हैं और घर का खर्चा चलाने के लिए जॉब भी करते हैं। मोहित पांडेय की बेटी तुरण्या कक्षा की दो की छात्रा है। इतनी छोटी उम्र में तुरण्या देश-विदेश के साथ ही राजनीति के बारे में सटीक जानकारी रखती हैं। तुरण्या ने बताया कि वो अपने पिता की तरह ही राजनीति में आकर गरीबों की सेवा करना चाहती हैं। तुरण्या ने एक किस्से का जिक्र करते हुए बताया कि मम्मी हमें टिफिन में हररोज खाना देती हैं। पर स्कूल के बाहर दो बच्चे मेरी ही उम्र की भिक्षा मांग रहे थे। मैंने उन्हें अपना खाना दे दिया। इसके बाद हरदिन दोनों स्कूल के बाहर मेरा इंतजार करते और मैं उन्हें अपना टिफिन पकड़ा देती।

जब बेटी बनती है मस्साब
मासूम तुरण्या देश के इतिहास और राजनेताओं के बारे में पूरी जानकारी रखती हैं। तुरण्या ने बताया कि उनके पापा शाम को जब घर आते हैं तो राजनीति की बातें मम्मी के साथ शेयर करते हैं। मैं उकनी बातों को ध्यान से सुनती हूं और फिर वो मेरे दिमाग के अंदर समा जाते हैं। तुरण्या ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दो साल से पहचानती हैं। तुरण्या ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गरीबों की सेवा करते हैं और मैं भी पढ़ लिखकर उन्हीं की तरह बनूंगी और पापा के सपने को पूरा करूंगी। तुरण्या ने बताया कि पापा जब भी उदास और निराश होते हैं तो वो मुझे चेहर पर बैठा देते हैं और कहते हैं कि मस्साब मेरी इस समस्या का हल बताईए। मैं चेयर से उतर कर सीधे पापा के कान पकड़ कर कहती हूं कि आप राजनीति के अच्छे स्टूडेंट नहीं है। नन्हीं परी की यह हरकतें पांडेय परिवार के लिए आम हो गई हैं।

बेटी अनमोल रत्न
बीजेपी नेता मोहित पांडेय कहते हैं कि आज भी कुछ लोग बेटियों के साथ भेदभाव करते हैं। जन्म के बाद उन्हें झाड़ियों में फेंक दिया जाता है। जब ऐसी खबरें अखबार में छपती हैं तो हमारे आंख में आंसू भर आते हैं। मोहित कहते हैं कि बेटी अनमोल रत्न होती है। मेरी लोगों से अपील है कि वो बोटियों को प्यार दें, उकनी बेटों की तरह परवरिस करें। मोहित कहते हैं कि जब तुरण्या का जन्म हुआ तब हम अस्पताल में नहीं थे। पार्टी के काम के चलते कानपुर से बाहर थे। पापा जी ने फोनकर बेटी के जन्म की जानकारी दी। बैठक के दौरान ही हमने वरिष्ट नेताओं को बताया कि हमारे आंगन में नन्हीं सी परी आई है। अब हम आज की मीटिंग में समय नहीं दे सकते। यह कहकर हम सीधे अस्पताल पहुंचे और नन्ही गुड़िया को देख ईश्वर के दर पर जाकर माथा टेका।

पापा सुनाते हैं लोरी, सो जाती है बेटी
तोतली आवाज में तुरण्या ने कहा कि पापा ने अपनी जरूरतों के साथ-साथ परिवार की संपन्नता के लिए जैसे जतन किए, वह कोई मैनेजमेंट संस्थान सिखा ही नहीं सकता है। तुरण्या रूक-रूक कर बोलते हुए कहती हैं कि पापा ने निःस्वार्थ प्रयास ने परिवार को एकजुट रखा और यही पापा की सबसे बड़ी कमाई और ताकत है। तुरण्या ने बताया कि पापा दिनभर कहीं रहें, पर शाम होने से पहले एकबार जरूर घर आते हैं और हमारे साथ ही भोजन करते हैं। इसके बाद वो मुझे पढ़ाते हैं और फिर गोद में लिटाकर लोरी सुना कर सुला देते हैं। फिर पार्टी के काम के लिए घर से चले जाते हैं। तुरण्या की मां वैष्णवी पांडेय बताती हैं कि हमने इससे पहले पिता और बेटी के बीच इतना प्यार नहीं देखा। वैष्णवी कहती हैं कि हम चाहते हैं कि हर पिता अपने बेटी को इसी तरह से प्यार दे और उसे पढ़ा लिखकर डॉक्टर, मास्टर, कलेक्टर या राजनेता बनाए।