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एग्जाम के दिन ही पापा का हुआ मर्डर, फिर बेटे ने ऐसे लिया बदला, अब सेना में बना अफसर तो मां के छलके आंसू

बेटे को वर्दी में देखकर मां के आंसू छलक पड़े...

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Untold story of Colonel Shrikant in Kanpur UP hindi news

एग्जाम के दिन ही पापा का हुआ मर्डर, फिर बेटे ने ऐसे लिया बदला, अब सेना में बना अफसर

कानपुर. पिता सरकारी स्कूल में टीचर थे और वह अपने इकलौते बेटे को पढ़ा लिखाकर सेना का अफसर बनाना चाहते थे। बेटा भी अपने पिता के सपने को पूरा करने के लिए जमकर मेहनत कर रहा था। बेटे की दसवीं की परीक्षा चल रही थी। पिता सुबह के वक्त बेटे के लिए दूध लेने गए और बदमाशों ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी।

पिता की मौत की खबर सुन बेटे के पैरों तले से जमीन खिसक गई। सपना बिखर गया, पर आंसुओं के बीच उसने एग्जाम में बैठने की ठानी। परीक्षा देने के बाद वह घर आया और पिता के शव को मुखाग्नि देकर सेना में शामिल होने के लिए पसीना बहना शुरू कर दिया। 97 फीसदी अंकों के साथ हाईस्कूल और 98 प्रतिशत अंकों के साथ इंटरमीडियट की परीक्षा उत्तीर्ण की। टीईएस (टेक्नीकल एंट्री स्कीम) के जरिए आर्मी में उसका सेलेक्शन हुआ और ट्रेनिंग पूरी करने के बाद मंगलवार को कर्नल श्रीकांत अपने घर पहुंचे।

एग्जाम के दिन पिता का हुआ था मर्डर

बर्रा थाना क्षेत्र के बर्रा आठ में रहने वाली गीता देवी के पति मनोज मिश्रा की 7 मार्च 2011 को गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। परिवार में बेटा श्रीकांत मिश्रा और बेटी नयन मिश्रा हैं। श्रीकांत के पिता कानपुर देहात के मैथा ब्लॉक में एक प्राइमरी स्कूल में टीचर थे। उनकी मनोज मिश्रा नाम के बदमाश से रंजिश चल रही थी। इसी के चलते किदवाई नगर में उनकी गोली मार कर हत्या कर दी गई।

मनोज की हत्या के दिन श्रीकांत दसवीं के एग्जाम देने के लिए सुबह तैयारी कर रहे थे। पिता की मौत के बाद भी बेटे ने उनके सपने को पूरा करने के लिए परीक्षा देने की ठानी और वहां से आने के बाद पिता के शव को मुखाग्नि दी। पिता की मौत के बाद श्रीकांत पर पहाड़ टूट पड़ा। घर में मां और छोटी बहन थी तो पिता के हत्यारों को सजा दिलाने के साथ ही सेना में अफसर बनने का प्रण। श्रीकांत ने छोटी उम्र में बहादुरी का काम करते हुए पिता के हत्यारों को सजा दिलवाई और आज सेना का अफसर बनकर उनके सपने को साकार कर दिया। बेटे को वर्दी में देख मां के आंसू छलक पड़े।

पढ़ाई के साथ हत्यारोपियों को दिलवाई सजा

गीता देवी ने बताया कि जब 7 मार्च 2017 को पति की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उसी दिन बेटे श्रीकांत की 10वीं की परीक्षा थी। बेटे ने जिस हालात में पेपर दिए थे वो मैंने देखा है। उसके चेहरे पर पिता को खोने का गम और इस छोटी सी उम्र में हत्या के बाद का खौफ भी था। लेकिन बेटे ने पूरे पेपर दिए और जब रिजल्ट आया तो उसके 97 प्रतिशत नंबर थे।

गीता देवी ने बताया कि मेरे पति चाहते थे बेटा आर्मी ज्वाइन करे और मेरे बेटे ने वह कर दिखाया। मेजर श्रीकांत ने बताया कि पिता के मर्डर के बाद मैं और पूरा परिवार टूट गया था। मेरे रिश्तेदार और दोस्त पिता की हत्या का बदला लेने के लिए कहते, पर मैंने गलत रास्ते के बजाए सही रास्ते पर चलने का मन बना लिया था और पढ़ाई के साथ प्राइवेट नौकरी कर वकील की फीस देकर अपने पिता के हत्यारों को उम्रकैद की सजा दिलवाई।

पिता के दोस्त ने बढ़ाया हौसला

श्रीकांत बताते हैं कि इंटर पास करने के बाद मैं सोचने लगा कि क्या करूं, मेरे पिता के दोस्त इंद्र कुमार जो एयर फोर्स में विंग कमांडर के पद पर तैनात हैं। उन्होंने बताया कि इंटर के बाद टीईएस (टेक्निकल एंट्री स्कीम) का इंटरव्यू दिया था। इसमें रैंकिंग को देखकर सेलेक्शन होता है, 2013 में टीईएस की रैंक 85 फीसदी थी। जिसमें मुझे इस परीक्षा में बैठने का मौका मिल गया।

टीईएस की परीक्षा में हजारों परीक्षार्थी बैठे, इनमें से 450 लडकों का सेलेक्शन हुआ था। इसके बाद अन्य परीक्षाएं हुईं, जिसमें 30 स्टूडेंट्स बचे। मेडिकल आते-आते मुझ सहित छह स्टूडेंट्स का चयन आर्मी के अफसर पद पर हुआ। इसके बाद एक साल की ट्रेनिंग हुई फिर सिविल इंजीनियरिंग से चार साल का बीटेक बोध गया में किया। अभी 22 दिसंबर 2017 को ज्वाइनिंग लेटर मिला है। श्रीकांत कहते हैं कि मुझे इस बात की ख़ुशी है कि मैंने अपने पिता का सपना पूरा किया है।