कानपुर. खूबसूरत बीवी के दीवाने थे पुत्तन सिंह चंदेल। कानपुर के बिधनू में गांव है सेन पश्चिम पारा, इसी गांव में पुत्तन और मीनाकुमारी का इश्क परवान चढ़ा था। एक दिन मीनाकुमारी के जीजा यानी पड़ोसी गांव हड़हा के शंकर सिंह मिलने आए। जीजा-साली में मजाक होता रहता था, लेकिन यह कितना गहरा और क्यों है, यह तो कोई नहीं जानता था। एक दिन पुत्तन गांव से बाहर गए तो शंकर सिंह फिर पहुंच गए। रात गुजारी, अब तो शंकर सिंह आए दिन पुत्तन चंदेल के दरवाजे पर दिखने लगे थे। खुसुर-पुसुर होने लगी, लेकिन पुत्तन नजरअंदाज करते रहे। बाद में मालूम हुआ कि पुत्तन की आंख में मीनाकुमारी धूल झोंक रही हैं। उनका अपने जीजा के साथ इश्क था। सिर्फ इश्क नहीं, अकेले-अकेले वाला रिश्ता भी। बहरहाल, पुत्तन को कुछ-कुछ आभास होने लगा तो उन्होंने शंकर सिंह पर पाबंदी लगाना शुरू कर दिया। कहते है कि इश्क नचाए जिसको यार... वह फिर नाचे बीच बाजार। शंकर सिंह इश्क में मदहोश थे। एक दिन शंकर और मीना चुपके-चुपके कुछ कर रहे थे, अचानक उनका 14 साल का लडक़ा पहुंच गया। उसने सबकुछ देख लिया। फिर क्या हुआ ? यह जानने के लिए इश्क-फरेब, थ्रिल, सस्पेंस की कहानी को आगे पढऩा पड़ेगा।