
उत्तर प्रदेश के तीन जिले मिलकर पूरा करेंगे एथेनाल की कमी
कानपुर। एथेनाल का उत्पादन कम होने की वजह से पेट्रोल में मिक्सिंग तय मानक की आधी हो पा रही है. प्राप्त जानकारी के अनुसार देश में एथेनाल की करीब 16 इंडस्ट्री लगाई जा रही हैं, जिसमें यूपी में 3 एथेनाल की फैक्ट्री लगाई जा रही है. ऐसा इसलिए ताकि एथेनाल का प्रोडक्शन ज्यादा से ज्यादा किया जा सके. अभी पेट्रोल में करीब 4.5 प्रतिशत एथेनाल मिक्स किया जा रहा है, जबकि केंद्र सरकार ने 10 प्रतिशत ब्लेंडिंग करने की इजाजत दी है.
ऐसी है संभावना
नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर प्रो. नरेंद्र मोहन अग्रवाल ने बताया कि एथेनाल की देश में जितनी खपत है, उसका 50 प्रतिशत भी उत्पादन नहीं हो पा रहा है. शुगर केन से सीधे एथेनाल बनाने के लिए यूपी के तीन जिलों में प्लांट लगाए जा रहे हैं. देश की शुगर मिलों को सिर्फ उतनी चीनी बनानी है जितनी कि देश में खपत है. देश को करीब 260 लाख मीट्रिक टन चीनी की जरूरत है. पिराई सत्र ईयर 2018-19 में भी करीब 322 लाख मीट्रिक टन चीनी का प्रोडक्शन होने की संभावना शुगर इंडस्ट्री एक्सपर्ट ने जताई है. एथेनाल के लिए केंद्र सरकार ने करीब 44 सौ करोड़ रुपए की बजट आवंटित किया है.
पेट्रोलियम इंडस्ट्री को चाहिए ये
केंद्र सरकार ने पेट्रोल में एथेनाल की 10 प्रतिशत मिक्सिंग की इजाजत दे दी है, लेकिन एथेनाल की उपलब्धता न होने की वजह से अभी करीब 5 प्रतिशत एथेनाल की ब्लेंडिंग पेट्रोल में की जा रही है. देश को करीब 500 करोड़ लीटर एथेनाल की जरूरत है जिसमें करीब 330 करोड़ लीटर एथेनाल पेट्रोल में ब्लेंडिंग के लिए चाहिए. देश की करीब 268 चीनी मिलों ने क्षमता या फिर डिस्टलरी लगाने के लिए अर्जी दी है, जिसमें खाद्य मंत्रालय ने 168 शुगर मिलों को सैद्धांतिक रूप से मंजूरी दे दी है. मेरठ, शाहजहांपुर व सीतापुर में नर्ई डिस्टलरी लगाई जा रही हैं.
Updated on:
9 Nov 2018, 12:39 PM IST
Published on:
9 Nov 2018, 12:39 PM IST
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