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मिर्जापुर से कानपुर आकर सेठ बने थे विजयपत सिंघानिया के बाबा

सिंघानिया की कामयाबी की कहानी यूपी के कानपुर शहर से शुरू होती है।

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Alok Pandey

Aug 10, 2017

आलोक पाण्डेय

कानपुर. पिता-पुत्र के झगड़े में देश के अमीर घरानों में शामिल सिंघानिया परिवार की चर्चा गली-गली है। रेमंड ग्रुप के मालिक गौतम सिंघानिया और पैसे-पैसे के लिए मोहताज उनके पिता विजयपत सिंघानिया की कामयाबी की कहानी यूपी के कानपुर शहर से शुरू होती है। किसी वक्त विजयपत सिंघानिया के बाबा कमलापत सिंघानिया बेहद साधारण स्थिति में कानपुर आए थे, लेकिन उनके मंसूबे और हौसले गगनचुंबी थे। पहले कपास की खरीद-फरोख्त का मामूली काम शुरू करने के बाद कर्ज की रकम से कपास से कपड़ा बनाने वाली जेके कपास स्पिनिंग मिल की बुनियाद रखी। इसके बाद सिंघानिया परिवार ने पलटकर नहीं देखा। कामयाबी की रफ्तार ऐसी थी कि एक दशक में सिंघानिया खानदान ने बड़ा साम्राज्य खड़ा कर लिया था। 60 और 70 के दशक में बिरला और टाटा के बाद सिंघानिया परिवार का देश में तीसरा नंबर था।

जुग्गीलाल और कमलापत के नाम पर ग्रुप का नामकरण

जेके ग्रुप यानी जुग्गीलाल-कमलापत ग्रुप। इतिहास की किताब बताती है कि आजादी के पहले के दौर में उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर के विख्यात मारवाड़ी बिजनेस घराने सेवाराम रामऋखदास से नाता रखने वाले जुग्गीलाल सिंघानिया के बेटे कमलापत सिंघानिया कारोबार की तलाश में 31 बरस की उम्र में वर्ष 1915 में कानपुर पहुंचे थे। कानपुर का चुनाव इसलिए, क्योंकि अंग्रेजों ने यूपी के इसी शहर में यातायात तथा उद्योग के लिहाज से अन्य सुविधाओं को मुहैया कराया था। कमलापत ने शुरुआती दिनों में कपास की खरीद-फरोख्त का काम किया, इसके बाद कर्ज की रकम से अपने पिता जुग्गीलाल और अपने नाम को मिलाकर जेके समूह की बुनियाद रखी। पहली मिल यानी जेके कपास स्पिनिंग मिल को जरीब चौकी के निकट कालपी रोड पर स्थापित किया गया था। इसके बाद जेके जूट मिल, जेके रेयॉन मिल, जेके सिंथेटिक मिल, जेके ऑयल मिल, जेके पेपर, जेके टायर की शृंखला बनती चली गई।

कमलापत के दूसरे बेटे कैलाशपत की संतान है विजयपत

ंवंशवृक्ष की बात करें तो कमलापत सिंघानिया के तीन पुत्र हुए। पदमपत सिंघानिया, कैलाशपत सिंघानिया और लक्ष्मीपत सिंघानिया। वर्ष 1884 में पैदा हुए कमलापत सिंघानिया की मृत्यु 53 बरस की अवस्था यानी वर्ष 1937 में हुई थी। मृत्यु से पहले ही कमलापत सिंघानिया ने अपने बिजनेस साम्राज्य को तीनों बेटों में बांट दिया था। बाद में पदमपद सिंघानिया का परिवार कानपुर में टिका रहा, जबकि कैलाशपत सिंघानिया मुंबई चले गए और लक्ष्मीपत सिंघानिया दिल्ली। कैलाशपत सिंघानिया के दो पुत्रों- अजयपत सिंघानिया और विजयपत सिंघानिया ने रेमंड ब्रांड से कपड़ों के कारोबार को आगे बढ़ाया। अजयपत सिंघानिया की मौत के बाद विजयपत सिंघानिया कारोबार को अकेले देखने लगे, क्योंकि अजयपत के बच्चे अनंत और अक्षय छोटे थे। विजयपत सिंघानिया के दो पुत्र हुए- मधुपति सिंघानिया और गौतम सिंघानिया। मधुपति सिंघानिया भी जल्द दुनिया छोड़ गए तो विजयपत सिंघानिया छोटे बेटे गौतम पर आश्रित हो गए।

जायदाद के लिए विजयपत के खानदान में मुकदमेबाजी जारी है

कैलाशपत सिंघानिया की मौत के बाद अजयपत और विजयपत ने कारोबार को आगे बढ़ाया। इसी दरम्यान अजयपत की मौत के बाद विजयपत ने अकेले कारोबार संभाला। आरोप है कि बाद में अजयपत के बच्चे अनंत और अक्षय बालिग हुए तो उन्हें समुचित हिस्सेदारी नहीं मिली। ऐसे में अनंत और उनकी मां वीणादेवी ने मुंबई की अदालत में मुकदमा दाखिल कर दिया। अनंत के भाई अक्षय ने भी बंबई हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। गुजरते वक्त के साथ मुकदमे की तारीख बढ़ रही थी, इसी दौरान विजयपत के बड़े बेटे मधुपति सिंघानिया के बच्चों- अनन्या, रसालिका, तारिनी और रायव्रतहरि ने भी हिस्सेदारी के लिए विजयपत सिंघानिया और रेमंड ग्रुप पर मुकदमा ठोंक दिया। गौतम सिंघानिया की फिलहाल एक पुत्री निहारिका है।