
मुख्यमंत्री जी बारिश ने नौकरशाही की खोली पोल, मोहल्लों और बस्तियों से लोग कर रहे पलायन
कानुपर। उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने शपथ लेने के बाद कहा था कि उनकी सरकार में करप्ट अधिकारियों और काम न करने वाले मंत्रियों के लिए कोई जगह नहीं होगी। लेकिन महज चार दिन की बारिश ने नौकरशाही के साथ उनके मंत्रियों की पोल खोल कर रख दी है। नगर निगम, जिला प्रशासन व स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते कानपुर की करीब 60 फीसदी आबादी पानी का दंश झेल रही है। साउथ की अधिकांश मलिन बस्तियों में पानी ने धावा बोलकर उन्हें ध्वस्थ कर दिया, जिससे वहां अब इंसान नहीं, सिर्फ पानी ही पानी नजर आ रहा है। लोग अपने घर-गृहस्थी का समान छोड़कर पलायन कर गए हैं। लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों के साथ ही नगर निगम ने जिंदगी नर्क बना दी है। साउथ के लोगों का आरोप है कि कईबार मंत्री सत्यदेव पचौरी से शिकायत कर नाले व नालियों के निर्माण की बात कही गई, लेकिन उन्होंने सुधि नहीं ली।
पांडु नदी ने बस्तियों को किया ध्वस्थ
लगातार हो रही बारिश ने शासन-प्रशासन की पोल खोल कर रख दी है, वहीं आमशहरी को झंकझोर दिया है। मोहल्लों में जलभराव के अलावा मलिन बस्तियों में जल निकासी की व्यवस्था नहीं होने के चलते लोग अपनी घर-गूहस्ती का समान छोड़कर पलायन कर गए। साउथ के बर्रा आठ वरुण विहार बस्ती ,गुजैनी रावणदासपुरम ,केशव नगर ,भीम नगर ,बाबा नगर ,नारायणपुरी ,कर्रही,चंदीपुरवा खाड़ेपुर इलाके में बारिश के पानी के चलते लोग रिश्तेदारों के घर चले गए हैं। वहीं बर्रा वरुण विहार बस्ती और गुजैनी रावणदासपुरम इलाके में बनी बस्तियों में पांडु नदी का पानी आने के चलले गरीबो के सैकड़ो घर बह गए।यहां के लोग जो भी थोड़ा बहुत समान निकाल सके उसे लेकर सड़कों पर तंबू तानकर रहने को मजबूर हैं। साथ ही बहुत से परेशान लोग यहां से पलायन भी कर रहे हैं।
मंत्री, सांसद, विधायक झूठें
रावणदासपुरम इलाके के लोगों ने बताया कि कानपुर नगर से योगी सरकार में दो मंत्री, दो सांसद और सात विधायक हैं, बावजूद किसी नेता ने सुधि नहीं ली। रमेश कहते हैं कि इससे अच्छी तो अखिलेश सरकार थी। समस्या आने पर स्थानीय जनप्रतिनिधि तो आकर दुख-दर्द साझा करते थे। लेकिन अमीरों की पार्टी भाजपा के नेता सत्ता के नशे में डूबे हैं और जिन्हें 2019 लोकसभा के चुनाव में परिणाम भुगतना पड़ेगा। पहली बार मलिन बस्तियों ने कमल को इकतरफा वोट देकर सांसद, विधायक व पार्षद चुना, पर तीन दिन बीत गए, लेकिन एक नेता झांकने तक नहीं आया। जबकि नगर निगम व उनके अधिकारी एसी में अराम फरमा रहे हैं। रजनी कहती हैं कि पानी ने मेरी पूरी जीवन भर की कमाई बहा ले गई। दो बेटियां हैं, जो दो दिन से भूखी हैं। बुधवार की सुबह मंदिर के बाहर जाकर भीख मांगा तो बीस रूपए मिले उसे पूड़ी लेकर आई हूं।
बारिश के चलते यातायात बेपटरी
शहर में आइटीएमएस के तहत 72 चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल और 10 चौराहों पर हाईटेक कैमरे लगवाए गए थे, लेकिन सावन की पहली बारिश ने पूरा सिस्टम बिगाड़ दिया। मंगलवार को बड़े चौराहे पर न तो कैमरे काम करते दिखे और न ही सिग्नल। इसकी वजह से सिपाही और होमगार्ड हाथ के इशारे से यातायात संचालित करते रहे। कई बार यहां जाम भी लगा। दक्षिण में भी किदवईनगर, जूही, गोविंदनगर, टीपीनगर समेत कई स्थानों पर जलभराव ने यातायात व्यवस्था बिगाड़ दी। जूही पुल के नीचे पानी भरने से वाहन नहीं निकल सके। इसी तरह गोविंदनगर पुल के पास भी पानी भरने से भीषण जाम की स्थिति बनी रही। एसपी ट्रैफिक सुशील कुमार ने बताया कि बारिश में कई स्थानों पर तार टूटने व अन्य दिक्कतों के चलते सिग्नल खराब हुए। उन्हें तत्काल ठीक कराने के लिए टीम भेजी गई। जलभराव के चलते कई स्थानों पर जाम लगा। सिपाहियों ने भीगते हुए जाम खुलवाया।
दस साल का तोड़ा रिकार्ड
शहर में 185.6 मिमी. बारिश हुई। ये दस साल में दूसरी बड़ी बारिश थी जबकि इससे पहले वर्ष 2008 में 6 जुलाई को एक दिन में 209.4 मिमी. बारिश दर्ज की गई थी। खास बात यह है कि 31 जुलाई को तो दस साल के रिकार्ड में कभी इतनी बारिश हुई ही नहीं। पूरे जुलाई माह की बात करें तो इस बार आंकड़ा 2010 में हुई 386.2 मिमी. बारिश के करीब पहुंचा हालांकि उसके मुकाबले .2 मिमी. बारिश कम ही हुई। चंद्रशेखर आजाद (सीएसए) कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिकों ने दावा किया कि दस साल में दूसरी बड़ी बारिश है। मौसम वैज्ञानिक डॉक्टर नौशाद ने बताया कि आगामी तीन अगस्त तक शहर में ठीकठाक बारिश की संभावना है। औसतन 50 मिमी. बारिश रोजाना होने के आसार हैं।
आरक्षण केंद्र बना टॉपू
सिटी साइड स्थित रेलवे के आरक्षण केंद्र की इमारत का निर्माण 1955 में हुआ था। पहले यहां पार्सल घर था, जिसे बाद में आरक्षण केंद्र की शक्ल दे दी गई। कहने को इस इमारत के मेंटीनेंस पर रेलवे के निर्माण विभाग ने लाखों रुपये खर्च किए हैं लेकिन बारिश आते ही मेंटीनेंस की पोल खुल गई है। पूरी इमारत की छत टपक रही है। सबसे अधिक नुकसान रिकार्ड रूम को हुआ है। आरक्षण से जुड़े चार महीने के रिकार्ड का बड़ा हिस्सा भीगने से खराब हो गया है। वहीं आरक्षण रिकार्ड को तैयार करने वाली स्टेशनरी भी गीली हो गई है। आरक्षण के काम में लगे कर्मचारियों ने बताया कि केवल तीन दिन की स्टेशनरी बची है। अगर और माल समय पर नहीं आया तो आरक्षण का काम बंद करना पड़ सकता है। केवल इतना ही नहीं जिस तरह से पानी टपक रहा है, उससे आरक्षण केंद्र के कंप्यूटर व नेटवर्किंग भी खतरे में पड़ गई है।
गंगा भी उफनाई
बारिश के चलते गंगा का जलस्तर अप स्ट्रीम पर 112.30 सेंटीमीटर पहुंच गया। नरौरा बांध से तेजी से आ रहे पानी और बारिश के चलते गंगा का जलस्तर बढ़ता जा रहा है। डाउन स्ट्रीम में 111.65 मीटर सोमवार को शाम तक पहुंच गया। चेतावनी बिंदु 113 मीटर पर है जबकि खतरे का निशान 114 मीटर पर है। पुलिस-प्रशासन ने गंगा के किनारे बसे तीन दर्जन से ज्यादा गांवों को खाली करा लिया है और वहां पर रेस्क्यू टीमें लगा दी गई हैं। बारिश से परेशान लोगों को मलहम लगाने के लिए कानपुर जिलाधिकारी विजय विश्वा सपंत ,एसएसपी ,नगर आयुक्त व नगर निगम की टीमें निरीक्षण को निकलीं। डीएम और उनकी टीम ने सबसे अधिक समय कानपुर दक्षिण के इलाकों में किया ।जहां की स्थितियां देखकर जिलाधिकारी ने नगर निगम अधिकारियों ,को जमकर फटकार लगाते हुए सुधार लाने के निर्देश जारी किए ।
Updated on:
04 Aug 2018 01:47 pm
Published on:
01 Aug 2018 01:08 pm
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