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दूसरे शहरों से निरस्त कराई बुकिंग, आठ दिन में हुई 10 रोगियों की डायलिसिस

हिण्डौनसिटी. जिला स्तरीय चिकित्सालय में डायलिसिस सुुविधा शुुरू होने के बाद किडनी रोगियों को बाहर जाने से निजात मिल गई है। दूसरे शहरों के अस्पतालों में बुक स्लॉट निरस्त कर वाले से स्थानीय चिकित्सालय में रोगियों की संया बढ़ गई है। एक सप्ताह में चिकित्सालय में 10 रोगी डायलिसिस करवा चुके हैं। इसमें शहर के अलावा भरतपुर व दौसा जिला के सीमावर्ती कस्बों के रोगी भी लाभावित रहे हैं।

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हिण्डौनसिटी. जिला स्तरीय चिकित्सालय में डायलिसिस सुुविधा शुुरू होने के बाद किडनी रोगियों को बाहर जाने से निजात मिल गई है। दूसरे शहरों के अस्पतालों में बुक स्लॉट निरस्त कर वाले से स्थानीय चिकित्सालय में रोगियों की संया बढ़ गई है। एक सप्ताह में चिकित्सालय में 10 रोगी डायलिसिस करवा चुके हैं। इसमें शहर के अलावा भरतपुर व दौसा जिला के सीमावर्ती कस्बों के रोगी भी लाभावित रहे हैं।

गौरतलब है कि राज्य सरकार ने पिछले वर्ष फरवरी माह में जिला चिकित्सालय के लिए 22 लाख रुपए की लागत से दो हीमो डायलिसिस मशीनें उपलब्ध कराई थीं। हालांकि, तकनीकी कारणों से ये मशीनें 14 महीनों तक बंद पड़ी रहीं। इस संबंध में राजस्थान पत्रिका ने शृंखलाबद्ध समाचार प्रकाशित किए। इके बाद बाद बीते सप्ताह इंस्टॉलेशन प्रक्रिया पूरी करने के बाद डायलिसिस सुविधा शुरू हो गई। क्षेत्र के मरीज, जो पहले डायलिसिस के लिए जयपुर, भरतपुर, करौली और गंगापुर जैसे शहरों में स्लॉट बुक कराते थे, अब उन्हें स्थानीय स्तर पर उपचार मिल रहा है। डायलिसिस नर्सिंग तकनीशियन अजय चेतीवाल ने बताया कि 5 कई से जिला चिकित्सालय में विधिवत डायलिसिस यूनिट संचालित हुई थी। चार दिन दोहरे रोगी व दो दिन एकल रोगी की स्लॉट बुक कर अब तक 10 रोगियों के डायलिसिस की गई है। इधर डायलिसिस यूनिट प्रभारी डॉ. प्रेमसिंह गोगा ने बताया कि तकनीशियन के कई वर्ष के कार्यानुभव से जिला चिकित्सालय में सभी रोगियों के सफल डायलिसिस हो रहे है।

लंबी दूरी की यात्रा से मिली मुक्ति : पहले हिण्डौन और आसपास के क्षेत्रों के किडनी रोगियों को डायलिसिस के लिए सप्ताह में दो बार लंबी दूरी तय कर अन्य शहरों में जाना पड़ता था। इस दौरान मरीजों और उनके परिजनों को शारीरिक थकान और आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ता था। वर्धमान नगर निवासी सियाराम शर्मा बताया, कि जयपुर जाकर डायलिसिस कराने में पूरा दिन लग जाता था। अब जयपुर के 4 घंटे के सफर के समय में स्थानीय चिकित्सालय में डायलिसिस करवा का घर पहुंच जाते हैं।

संख्या बढ़नेे से विस्तार की उमीद

चिकित्सालय सूत्रों के अनुसार डायलिसिस के लिए रोगियों की संख्या बढ़ने से यूनिट के विस्तार की उमीद है। वर्तमान में जिला चिकित्सालय में दो बैड की डायलिसिस यूनिट है। स्लॉट बुकिंग में वेटिंग होने से बैडों की संया में इजाफा होगा। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने बजट में जिला चिकित्सालय में 10 बैड की डायलिसिस यूनिट की घोषणा की हुई है।

इनका कहना है

डायलिसिस यूनिट शुरू होने से जिला चिकित्सालय की चिकित्सा सेवाओं में विस्तार हुआ है। साथ ही किडनी रोगियों को स्थानीय स्तर पर सुविधा मिलने से राहत मिली है। अभी ओपीडी समय में यूनिट संचालित है।

डॉ. पुष्पेंद्र कुमार गुप्ता, पीएमओ जिला चिकित्सालय, हिण्डौनसिटी