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राजस्थान के इस जिले में बाजरा की बम्पर पैदावार: 1 लाख 30 हजार हैक्टेयर में लहला रही फसल

Bumper yield of millet in this district of Rajasthan: Crop growing in 1 lakh 30 thousand hectares-एक हैक्टेयर में होगी 16 क्विंटल बाजरा की उपज

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 राजस्थान के इस जिले में बाजरा की बम्पर पैदावार: 1 लाख 30 हजार हैक्टेयर में लहला रही फसल

राजस्थान के इस जिले में बाजरा की बम्पर पैदावार: 1 लाख 30 हजार हैक्टेयर में लहला रही फसल


हिण्डौनसिटी. जिले में वर्षों बाद मेहरबान हुए मानसून के कारण इस साल बाजरे की बंपर पैदावार की उम्मीद है। फिलहाल खेतों में बाजरे की फसल लहलहा रही है। जो जल्द ही कृषि उपज मंडियों में चमक बिखेरेगी। कृषि विभाग के एक अनुमान के मुताबिक जिलेभर में 1 लाख 30 हजार हैक्टेयर में करीब 312 करोड़ रुपए की बाजरा लहलहा रहा है। दरअसल इस बार रिमझिम के बजाए झमाझम बारिश का दौर चला, जिससे खरीफ की फसल पिछले वर्षों की अपेक्षा काफी अच्छी है।

कृषि विशेषज्ञों की मानें तो अब अगर बारिश नहीं हुई तो जिले में 20 लाख 80 हजार ंिटल बाजरे की पैदावार होने का अनुमान है। फिलहाल मंडी में बाजरा का भाव 1460 से 1550 रुपए प्रति क्विन्टल चल रहा है।

अगर नया बाजरा आने तक मंडी भाव यही रहा तो जिले में करीब 312 करोड़ रुपए का बाजरा पैदा होने की उम्मीद है। कोरोना काल में आर्थिक मंदी झेल रहे किसानों के पास बाजरे की अच्छी फसल होने से पैसा आने और बाजार चमकने की खासी उम्मीद है।

653 एमएम हुई बारिश, जब जरुरत, तब बरसे बादल-
सूत्रों के अनुसार वर्ष करौली जिले में 2019-20 में अगस्त माह तक 333 एमएम बारिश हुई थी। जबकि वर्ष 2020-21 में बारिश का यह आंकडा औसत से कम 215 मिमी पर अटक गया था। लेकिन इस वर्ष बादलों की मेहरबानी से जिलेभर में अब तक रिकॉर्ड 653 एमएम बारिश दर्ज की जा चुकी है।

विशेष बात यह रही कि जब-जब फसलों के लिए पानी की जरुरत थी, तब -तब बारिश हुई। जिससे फसलें अपने रुआब पर आ गई। फसल की बुवाई के बाद से ही यह क्रम जारी रहा है। जिसके कारण फसल को जरूरत के हिसाब से पानी मिलता रहा। नतीजतन सिंचित व गैर सिंचित क्षेत्र के खेतों में बाजरे की फसल अच्छी है।

एक हैक्टेयर में 16 क्विंटल बाजरे की पैदावार-
कृषि विभाग के अधिकारी व किसानों के मुताबिक जिले की जलवायु में प्रति हैक्टेयर में करीब 16 क्विंटल बाजरे की पैदावार आसानी से हो जाती है। करौली जिले में 1 लाख 30 हजार हैक्टेयर में बाजरे की बुवाई हुई है। इसके आधार पर करीब 20 लाख 80 हजार क्विंटल बाजरा पैदा होने का अनुमान है। वर्तमान में बाजरे का बाजार भाव 1460 से 1550 रुपए प्रति क्विंटल है। इस भाव के अनुसार जिले में करीब 312 करोड़ रुपए से अधिक कीमत का बाजरा पैदा होने की उम्मीद है।

खेती पर निर्भर बाजार की चाल
व्यापारियों का कहना है कि जिस तरह खेती मानसून की बारिश पर निर्भर है, उसी तरह व्यापारी का कारोबार भी किसान की फसल पर टिका है। अच्छी फसल होगी तो बाजार में खरीददारी बढ़ेगी। जिसके कारण सभी तरह के रोजगार बढ़ेंगे। कोरोना के कारण मंडी बाजार में सुस्ती का आलम है। बाजारा की बम्पर आवक होने से मंडी में खुशहाली आएगी।

इनका कहना है-
अच्छी बारिश होने से जिले में इस बार बाजरे की फसल काफी अच्छी है। एक हैक्टेयर में अनुमानित 15 से 16 ंिटल बाजरा पैदा होने का अनुमान है। सितम्बर माह के अंत में मंडियों का बाजार बाजरे से लकदक नजर आएगा। किसान और व्यापारियों को काफी फायदा मिलेगा।-
मोहनलाल मीना, सहायक निदेशक, कृषि विभाग, हिण्डौनसिटी।

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