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गार्डनिंग के अपने शौक को ही बनाया करियर

—बागवानी से हो रही आमदनी—विपरीत जलवायु के अधिकांश पौधे —आगरा, जयपुर व उदयपुर की नर्सरियों से लाते हैं पौध कॅरियर बनाने के लिए अपने शौक कहीं पीछे छूट जाते हैं, फिर जीवनभर उसी क्षेत्र में काम करना होता है, जिसमें अमूमन जी नहीं लगता। इससे विपरीत, हिंडौन सिटी के मुनेश धाकड़ ने बागवानी के शौक को ही कॅरियर बना लिया है और इसी क्षेत्र में नए कीर्तिमान रच रहे हैं।

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करौली

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VIKAS MATHUR

May 25, 2023

गार्डनिंग के अपने शौक को ही बनाया करियर

गार्डनिंग के अपने शौक को ही बनाया करियर

हर माह हजारों की आमदनी
घर के आंगन में बनाई बगिया की सार- संभाल से मुकेश ने पौधों के केयर टेकर के रूप में पहचान बनाई है। उन्हें कई संस्थानों के उद्यान में पौधे रोपने व उनकी संभाल करने से हर माह हजारों की आमदनी हो रही है।

तीन सौ से अधिक किस्मों के पौधे
धाकड़ कॉलोनी में रहने वाले इस बागवान ने अपने घर के आंगन और चारों ओर क्यारियां बना कर फल, फूल और छायादार किस्म के पौधे लगाए हैं। इसमें विभिन्न किस्मों के 300 से अधिक किस्मों के पेड़-पौधे हैं। घर, फ ल और फू लों से लकदक हो रहा है। इसमें सेब, चीकू, चकोतरा, काली मिर्च, इलायची, कागजी बादाम, फालसा लीची, आडूसा, अंगूर, तेजपात, रुद्राक्ष, जैतून सहित अधिकांश पेड़ -पौधे विपरीत जलवायु के इलाकों के हैं।

पिता से सीखे बागवानी के गुर
वाणिज्य के विद्यार्थी रहे मुुनेश ने बताया कि वे पिता प्रहलाद सिंह धाकड़ से पौधे रोपना और रखरखाव करना सीखा है। धाकड़ समाज की धर्मशाला में पिता के साथ पौधों की सारसंभाल करना शौक बन गया। जिससे बाद में कॅरियर के रूप में विकसित कर लिया। वह घरों में पौधे रोपने के लिए आगरा, जयपुर व उदयपुर की नर्सरियों से पौधे लाते हैं।

सौ से अधिक घरों में बनाई बगिया
मुनेश का कहना है कि उन्होंने शहर व आसपास के इलाकों में करीब 100 घरों में किचन गार्डन और बगिया विकसित की हैं। साथ ही बयाना, श्रीमहावीरजी सहित कई कस्बों के अनेक संस्थानों में बगिया लगाई हैं। इनकी वे सशुल्क साप्ताहिक देखभाल करने जाते हैं। मुनेश ने आधा दर्जन से अधिक मजदूरों को उद्यानिकी में रोजगार दिया हुआ है।

किचन गार्डन करते हैं तैयार
घर की बगियों में पौधों और उनमें लग रहे फ लों व फूलों को देख लोग अपने घरों में भी किचन गार्डन तैयार करवा रहे हैं। मुनेश इसके लिए घर-घर विजिट करते हैं। कृषक परिवार के सदस्य मुनेश अपने खेतों में पम्परागत खेती के साथ हाईटेक बागवानी कर विदेशी फ ल, फू लों कीे पौधों की नर्सरी तैयार करना चाहते हैं।

अनिल दत्तात्रेय — हिण्डौनसिटी