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उपभोक्ताओं को पता नहीं और उनके नाम से बुक हो रहे गैस सिलेंडर

Consumers do not know and gas cylinders are being booked in their names रसोई गैस की कालाबाजारी का खेल: जिले में हैं 3 लाख 25 हजार एलपीजी गैस उपभोक्ता

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उपभोक्ताओं को पता नहीं और उनके नाम से बुक हो रहे गैस सिलेंडर

उपभोक्ताओं को पता नहीं और उनके नाम से बुक हो रहे गैस सिलेंडर

हिण्डौनसिटी. अगर आप इंडेन के गैस उपभोक्ता हैं, तो सावधान हो जाएं, क्योकि आपके नाम पर रसोई गैस की कालाबाजारी हो रही है। गैस एजेंसी के कर्मचारी व होम डिलीवरी ब्वॉय आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से गैस बुकिंग कर रहे हैं। उपभोक्ताओं के मोबाइल में मैसेज आने के बाद इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है।

जालसाजी कर बुक किए जा रहे सिलेंडर अवैध रिफिलिंग करने वालों की दुकानों से लेकर होटल, ढाबे और रेस्टोरेन्टों के साथ मिठाई वि₹ेताओं के यहां खपाए जा रहे हैं। लोगों के घरों में कम वजन के सिलेंडर पहुंच रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, रसद विभाग के जिम्मेदार अधिकारी छापेमारी करना ही भूल गए हैं। बता दें कि, हिण्डौन समेत करौली जिले में 3 लाख 25 हजार एलपीजी गैस उपभोक्ता हैं।गैस एजेंसी पर काम करने वाले एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अधिकतर उपभोक्ता गैस बुकिंग कराने के बजाए नकद पैसे देकर सिलेंडर ले लेते हैं।

इसके बाद डिलीवरी ब्वॉय या गैस एजेंसी कर्मचारी उनका मोबाइल नंबर एक पर्ची में लिख लेते हैं। बाद में गोदाम में सिलेंडर व पैसा जमा करते समय बुकिंग नंबर के बजाय मोबाइल नंबर ही नोट करा देते हैं। इसके बाद गैस एजेंसी से उस मोबाइल नंबर पर ऑनलाइन सिलेंडर की बुकिंग और डिलीवरी दिखा दी जाती है। बाकायदा, उपभोक्ताओं के पास गैस सिलेंडर की बुकिंग और डिलीवरी के मैसेज भी आ रहें हैं।

इंडेन की 24 और एचपीसीएल व बीपीसीएल के 4-4 गैस वितरक

करौली जिला छह उपखण्डों में बंटा हुआ है। उपखंड करौली, हिण्डौन, टोडाभीम, नादौती, मंडरायल व सपोटरा में कुल 32 गैस वितकर एजेंसियां संचालित हैं। इनमें से सर्वाधिक 24 गैस एजेंसी वितरण इंडेन गैस कपनी के हैं। यह इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन की सहयोगी कंपनी है। जबकि 4 गैस वितरक एजेंसी एचपीसीएल( हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरशन लिमिटेड) की तथा 4 गैस वितरक एजेंसी बीपीसीएल(भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरशन लिमिटेड़) की हैं। सभी 32 गैस वितरक एजेंसी जिले के 3 लाख 25 हजार उपभोक्ताओं को एलपीजी गैस सिलेंडर उपलब्ध कराती हैं।

प्रतिस्पर्धा के कारण गैस वितरक तोड़ रहे कायदाशहर की एक गैस वितरक एजेंसी के संचालक ने बताया कि कोरोना काल में गैस उपभोक्ताओं को दी जाने वाली सब्सिड़ी बंद कर दी गई। इसके बाद गैस वितरकों में प्रतिस्पर्धा हो गई। नियमानुसार, उपभोक्ता ने जिस गैस वितरक से गैस कनेक्शन ले रखा है, उसी के यहां से सिलेंडर ले सकता है, लेकिन इन दिनों गैस एजेंसी के डिलीवरी ब्वॉय दूसरी एजेंजिसों के उपभोक्ताओं को सिलेंडरों की आपूर्ति पहुंचा रहे हैं। उपभोक्ता भी बिना झंझट के घर बैठे सिलेंडर पाकर खुश हो रहे हैं। इस वजह से गैस एजेंसियों का उचित ढंग से रिकॉर्ड संधारण नहीं हो पा रहा है। रिफिल वाऊचर समायोजित करने के लिए गैस वितरकों द्वारा उपभोक्ताओं के नाम से स्वयं ही गैस बुकिंग से लेकर डिलीवरी तक का फर्जीवाडा किया जा रहा है।

मैसेज पर ध्यान न देना भी कारण

गैस सब्सिडी बंद होने के बाद से उपभोक्ताओं ने गैस बुकिंग आदि के मैसेजों पर ध्यान देना बंद कर दिया है। इस कारण उपभोक्ताओं को पता ही नहीं चल पा रहा है कि उनके गैस सिलेंडर की कोई और बुकिंग कर रहा है। उपभोक्ताओं के मोबाइल पर सिलेंडर बुकिंग और डिलीवर्ड के मैसेज भी आ रहे हैं। ये रसोई गैस सिलेंडर कहां डिलीवर हो रहे हैं, इसकी जानकारी अफसरों के पास भी नहीं है। उल्लेखनीय है कि उज्जवला योजना के तहत गैस कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं को कुछ दिन पहले ही सरकार ने प्रति सिलेंडर 200 रुपए की सब्सिडी देनी फिर से शुरु कर दी है।


इनका कहना है

उपभोक्ताओं की बिना जानकारी के उनके रजिर्स्टड मोबाइल नंबर से गैस सिलेंडर सिलेंडर की बुकिंग और डिलीवरी के साथ रसाई गैस की कालाबाजारी का मामला संज्ञान में नहीं आया है, अगर ऐसा है, तो जांच करवा कर उचित कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

-रामसिंह मीणा, जिला रसद अधिकारी, करौली