महूइब्राहिमपुर. (हिण्डौनसिटी)होली के पांच दिन बाद रंग पंचमी पर शनिवार को भरे हनुमानजी के वार्षिक मेले में आस्था का सैलाब उमड़ा। मंदिर चौक और गांव के चौराहों से लेकर शोभायात्रा मार्ग के मकान। दुकानों की छतें भीड़ अटी रहीं। बालाजी के जयकारों के बीच के सुबह से रात तक महू इब्राहिमपुर व महूखास के बालाजी मंदिरों पर दर्शनार्थियों की भीड़़ रही। मेला में शोभायात्रा में सजी एक दर्जन से अधिक सजीव झांकियां मुख्य आकर्षण रहीं। जिन्हें देखने के लिए चौरासी क्षेत्र के गांवों से लोग पहुंचे।
महू गांव की बसावट के समय से करीब 8 सदी पुराने ऐतिहासिक मेले को लेकर गांव महू इब्राहिमपुर, महू खास व महू दलालपुर में शनिवार को उत्सव का सा माहौल रहा। मेल से कई दिन पहले शुरू हुई सजावट और रोशनी से गांव के मंदिर जगमग रहे। वहीं बाजार,चौराहों व आमरास्तों की सजावट की गई। सुबह से ही मंदिर में दर्शनार्थियों की आवक शुरू हो गई। श्रद्धालुओं ने खुले आसमान में चबूतरे पर विराजित हनुमानजी की प्रतिमा की पूजा कर परिक्रमा लगा मनौती मांगी। दोपहर में महूइब्राहिमपुर गांव के सीतारामजी मंदिर के शोभायात्रा की शुरुआत हुई। चार बैण्डों की मधुर स्वर लहरियों के साथ हनुमानजी के झांकी झांकी की अगुआई में निकली शोभायात्रा देखने के लिए रास्ते भीड़ से अट गए। शोभायात्रा मंदिर से निकल कर सुहागन मार्केट, त्रिपोलिया बाजार ,मेन मार्केट होते हुए महूखास के राधा रमन मंदिर परिसर में पहुंची। शोभायात्रा के दौरान चौरासी क्षेत्र से आई एक दर्जन ठड्डा गायन मंडलियों ने धार्मिक एवं पौराणिक वृतांतों पर ठड्ड़ा गायन किए। मेला आयोजन समिति के अध्यक्ष महेश गर्ग ने बताया कि शाम को हुए स्वागत समारोह में गांव के पंच पटेलों ने मेले में आए विभिन्न विभागों के अधिकारियों का सम्मान किया।
ये सजी सजीव झांकियां
शोभायात्रा में देवी देवताओं के अलावा राष्ट्र प्रेम जगाने वाली सजीव झांकियां सजाई गई। सेना के हूबहू टेंक जैसे मॉडल बजरंग टेंक की झांकी निकाली गई। मेले में शिव पार्वती, भोलेनाथ की बारात, कमांडे, बजरंग टेंक, सुभाष चंद बोस, झांसी की रानी, होली खेलते राधा-कृष्ण, लवकुश, गणेश-पार्वती, रिद्धी-सिद्धि ,डकैत की सजीव झांकी सजाई गई।
अनूठा रहा संयोग-
महू के हनुमानजी के मेले में दूसरे वर्ष भी अनूठा संयोग रहा। शोभायात्रा के दिन शनिवार होने से भक्तों की मंदिर में भीड़ रही। वहीं वर्ष 2022 में मंगलवार को शोभायात्रा निकली थी। ग्रामीणों ने बताया कि हनुमानजी की पूजा के लिए मंगल और शनिवार का खास महत्व होता है।