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चरम पर चुनाव प्रचार, चर्चा में डूबीं गांवों की चौपाल

Election campaign at its peak, village chaupal engulfed in discussion 1.46 लाख मतदाता करेंगे 375 प्रत्याशियों के भाग्य का फैंसला -हिण्डौन पंचायत समिति में 39 ग्राम पंचायतों में 192 बूथों पर छह अक्टूबर को होगा मतदान

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चरम पर चुनाव प्रचार, चर्चा में डूबीं गांवों की चौपाल

चरम पर चुनाव प्रचार, चर्चा में डूबीं गांवों की चौपाल

हिण्डौनसिटी. पंचायत समिति हिण्डौन की 39 ग्राम पंचायतों में 192 मतदान केन्द्रों पर छह अक्टूबर को होने वाले सरपंच व वार्ड पंच के चुनाव की चौसर पूरी तरह से बिछ चुकी है। पंचायत का मुखिया बनने के लिए 375 प्रत्याशी चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे हैं। मतदान में महज एक दिन शेष बचा है। ऐसे में अब दावेदार क्षेत्र के 1 लाख 46 हजार 100 मतदाताओं से मान मनोव्वल में लगे हैं। इसके लिए वे हर हथकंडा अपना रहे हैं। क्षेत्र में अति संवेदनशील व संवेदनशील श्रेणी के 27 बूथों पर भारी पुलिस जाप्ता के बंदोबस्त किए गए हैं। बीएलओ से लेकर पटवारी और ग्राम विकास अधिकारियों तक को विशेष निगरानी के निर्देश दिए हैं। पुलिस व प्रशासन के आला अधिकारियों द्वारा चुनाव प्रक्रिया में हल्की सी चूक होने पर भी बड़ी कार्रवाई की हिदायत दी गई हैं।

सोशल मीडिया का हो रहा भरपूर उपयोग-
पंच-सरपंच चुनाव में सोशल मीडिया का रंग छाया हुआ है। गांव-गांव तक स्मार्ट फोन और सस्ते इंटरनेट डाटा की पहुंच ने प्रत्याशियों के प्रचार को ‘स्मार्ट’ बना दिया है। सरपंच का चुनाव है तो अब वोटर से राम-राम करने के लिए सुबह-सुबह निकलने की जरूरत नहीं रही है। वॉटसएप व फेसबुक पर प्रत्याशी सुबह की राम-राम के बाद चुनाव के वादे और गांव के विकास के लिए घोषणा-पत्र भी जारी कर रहे हैं। चुनाव प्रचार चरम पर है और गांवों की चौपालें चुनावी चर्चा में डूबी हुई हैं।

खर्च सीमा 50 हजार और खर्च कर रहे लाखों रुपए-
सरपंच के चुनाव के लिए चुनाव खर्च सीमा 50 हजार रुपए निर्धारित है। लेकिन गांवों में प्रत्याशियों के पोस्टर और बैनरों की बहार है। इतना ही नहीं निर्वाचण आयोग की ओर से प्रत्येक प्रत्याशी को एक वाहन की अनुमति दी गई है, लेकिन एक-एक प्रत्याशी के लाउड स्पीकर और पोस्टर-बैनर लगे 10 से 15 वाहन क्षेत्र में दिन-रात घूम रहे हैं। विशेष बात यह है कि वोटरों को लुभाने के लिए प्रत्याशी उन्हें मीट और मदिरा का प्रलोभन भी दे रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि गांवों में जमकर शराब का वितरण किया जा रहा है।

वादों की बहार, घोषणा-पत्र भी इस बार
अब तक के चुनावों में सरपंच प्रत्याशी वोटरों से मिल कर वादे करते रहे हैं। लिखित घोषणापत्र अब तक नजर नहीं आते थे। इनके लिए जरूरी भी नहीं है, क्योंकि यह चुनाव राजनीतिक दलों पर सिंबल पर नहीं होता है, लेकिन इस बार के चुनाव में घोषणा-पत्र भी दिख रहे हैं। फेसबुक पेज बना है तो उस पर रोज कुछ न कुछ अपलोड किया जा रहा है। क्षेत्र में ऐसी कई ग्राम पंचायतें हैं, जिनके प्रत्याशी फेसबुक व व्हाटसएप पर गांव में सडक़, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, परिवहन, कृषि आदि से जुड़े करीब 20 से 30 विकास के वादों के साथ भ्रष्टाचार मुक्त गांव की सरकार देने का वादा कर रहे हैं।

पति या बेटे का चेहरा भी साथ में-
क्षेत्र में 19 ग्राम पंचायत महिला व 20 ग्राम पंचायतें पुरुष वर्ग के लिए आरक्षित हैं। महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों पर महिला प्रत्याशियों के अलावा पति और पुत्र का भी फोटो भी पोस्टर, बैनरों में छपवाए गए हैं। सरकारी सेवा में कार्यरत कई लोगों ने अपनी मां या पत्नी को चुनाव मैदान में उतार रखा है। यही नही वे अपनी जान पहचान व दबदबा का पूरा उपयोग करते हुए चोरी छिपे चुनाव प्रचार भी कर रहे हैं।