
सेना के अधिकारी बनने में रहे नाकाम फिर सीए की डिग्री लेकर बने आईपीएस
सेना के अधिकारी बनने में रहे नाकाम फिर सीए की डिग्री लेकर बने आईपीएस
करौली के एसपी को पसंद है घुडसवारी
करौली जिले के पुलिस अधीक्षक मृदुल कच्छावा ऐसे पुलिस अधिकारी हैं जो चार्टड एकाउटेंट और कम्पनी सेक्रेटी की डिग्री लेने के बाद आईपीएस बने हैं।
मूलतौर पर बीकानेर के मूल निवासी मृदुल कच्छावा ने करौली जिले में एसपी के पद पर एक साल का कार्यकाल पूरा किया है। इससे पहले वे धौलपुर में भी एक साल पदस्थापित रहे थे। 32 साल के कच्छावा को शुरू में तो एनडीए परीक्षा में चयनित होकर सेना के अधिकारी बनने की लालसा थी। इसमें दो बार के प्रयास में नाकाम रहने पर उन्होंने पुलिस अधिकारी बनने की ठानी। दो बार के प्रयास में वर्ष 2015 में वे आईपीएस में चयनित हो गए। इससे पहले उन्होंने चार्टड एकाउटेंट और कम्पनी सेक्रेटी की डिग्री लेकर जर्मन की एक बैंक में मुबंई में नौकरी की थी। छात्र जीवन से उनको बॉस्केटबॉल खेलने का शौक रहा है। इसके अलावा मृदुल कच्छावा को घुडसवारी करना बेहद पसंद है और नियमित घुडसवारी करते हैं। उनको पक्षियों और जानवरों से गहरा लगाव है जिनकी फोटोग्राफी में उनको मजा आता है। ऐसे फोटो का संग्रह उनके पास काफी है। अच्छी नस्ल के डॉंग भी वे पालते हैं। उनकी पत्नी कनिका सिंह वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी पीके सिंह की पुत्री है। उन्होंने अपनी पत्नी के साथ पहला करवा चौथ का व्रत भी किया था।
'टीम भावना से काम करने की तकनीक से मिलती है सफलताÓ
एक वर्ष का कार्यकाल पूर्ण होने पर एसपी से पत्रिका का विशेष साक्षात्कार
करौली जिले में पुलिस अधीक्षक पद पर मृदुल कच्च्छावा के एक वर्ष का कार्यकाल पूरा करने पर जिले में अपराध व अपराधियों की स्थिति, एक वर्ष में मिली चुनौती और सफलताओं के साथ पुलिस के कामकाज में आ रही समस्याओं को लेकर उनसे विशेष बातचीत की पत्रिका संवाददाता सुरेन्द्र चतुर्वेदी ने।
पत्रिका- एक वर्ष में पुलिस की क्या खास उपलब्धि रही।
एसपी- कार्यग्रहण करने पर जिले में अवैध हथियार और स्मैक को प्रमुख समस्या बताया था। इन दोनों अवैध गतिविधियों पर फोकस रखा। मेरे से पहले के पांच वर्ष में जिले में स्मैक के खिलाफ छोटी-छोटी कार्रवाई होती रही थी जिनमें कुल एक किलो स्मैक जब्त की गई थी। हमने केवल एक वर्ष में ही 3 किलो 200 ग्राम स्मैक जब्त की है। कार्रवाई में विशेष तौर पर बड़े सप्लायरों को पकड़ा। दो दिन पहले हिण्डौन में 410 ग्राम स्मैक जब्त करने की बड़ी कार्रवाई पूरे सम्भाग में पहली बार हुई है। इसी प्रकार इस वर्ष के 6 माह में अवैध हथियारों के तहत 86 कार्रवाई करके 92 जने गिरफ्तार किए हैं। इनमें 42 गिरफ्तारी तो जून माह में 15 दिन के चलाए ऑपरेशन क्लीन स्वीप अभियान में की गई।
पत्रिका: एक वर्ष में कौनसे मामले चुनौती पूर्ण रहे।
एसपी- सपोटरा के बूकना गांव में पुजारी को जिंदा जलाने के आरोप का मामला देश भर में चर्चित रहा था। इस दौरान कानून व्यवस्था कायम रखने की भी चुनौती थी। इस चुनौती का धैर्यता से मुकाबला किया। एक आरोपी को तत्काल गिरफ्तार भी किया गया। मण्डरायल में पुलिसकर्मी की नृशंस हत्या करने का मामला पुलिस के लिए सीधी चुनौती थी। रात-दिन मेहनत करके आरोपी को पांच दिन में गिरफ्तार कर लिया गया। इन पांच दिनों उनको चैन से नींद नहीं आती थी। साथी का रक्त रंजित चेहरा दिखता रहता था कुछ दिन पहले बैंक में फायरिंग करके लूट की वारदात में टीम भावना से प्रयास करके एक घंटे में आरोपी को दबोचा लिया गया। वरना ये मामला जिले की पुलिस को कलंक साबित होता। कैलादेवी में नर्स ने प्रेमी संग मिलकर पति की हत्या की थी और शव को मासलपुर के जंगल में ले जाकर डाल दिया था। कांचरौली में 6 साल की बच्ची से दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी गई। हिण्डौन में व्यापारी से लूट के अलावा हिण्डौन इलाके में ब्लाइंड मर्डर की अनेक वारदात भी हुईं। सभी में अपराधियों का सुराग लगाना पुलिस के चुनौती थी। लेकिन पूरी टीम की मेहनत की सराहना करना चाहूंगा कि ज्यादातर बड़ी वारदातों का हम जल्दी खुलासा करके अपराधी पकडऩे में सफल रहे।
पत्रिका- आपकी डंडे फटकारने वाली कार्यशैली नहीं है। फिर अपराधी पकडऩे में कौनसी तकनीक अपनाते हैं।
एसपी: उनकी सबसे बड़ी तकनीक टीम भावना से काम करने और टीम के मोटीवेशन की है। इसी तकनीक से मुहिम चलाते हैं और अच्छी सफलताएं मिलती रही है। इसमें साइबर सैल की मदद भी प्रभावी रहती है।
पत्रिका- किन मामलों में सफल नहीं होने का मलाल है।
एसपी: करौली-धौलपुर जिले के नामी डकैत केशव गुर्जर को नहीं पकड़ पाने का मलाल है। धौलपुर जिले के बाद इस जिले में भी केशव को पकडऩे के प्रयास किए लेकिन दबोच नहीं सके। मौका मिला तो ये काम पूरा करेंगे।
पत्रिका: एक वर्ष में क्या नवाचार किए।
एसपी: पुलिस लाइन में कोविड वार्ड और थानों में स्वागत कक्ष तो मुख्यालय के आदेश पर बने थे। जबकि पुलिस लाइन की दशा सुधारने का अलग हटकर काम किया। पुलिस लाइन में परेड ग्राउण्ड आत्मा होती है, जिसे बेहतर स्वरूप दिया गया है। पुलिस लाइन में सफाई व्यवस्था बेहतर हुई है। पथरीले इलाके में पुलिसकर्मियों ने अथक मेहनत करके काफी पौधारोपण किया है। बैरिकों में सफाई और सुविधाओं पर ध्यान देकर आवास व्यवस्था को सुधारा गया है। भोजन की गुणवत्ता सुधरने के साथ मैस की दशा भी बदल गई है।
पत्रिका- बीते एक वर्ष में कितने अपराधी पकड़े।
एसपी- हत्या, हत्या के प्रयास, दुष्कर्म, चोरी, लूट और फर्जीकारी जैसे मामलों में 50 इनामी आरोपी गिरफ्तार किए हैं। धौलपुर में एक वर्ष में 57 को गिरफ्तार किया था।
पत्रिका- पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों की ठहराव अवधि को लेकर आपकी क्या सोच है।
एसपी- पुलिस-प्रशासन के अफसरों के ठहराव में स्थिरता होनी चाहिए। जल्दी-जल्दी तबादले उचित नहीं। किसी इलाके में भौगलिक स्थिति, सामाजिक संरचना, लोगों की मानसिकता को जानने-समझने, विश्वास जमाने में गुजर जाता है। कुछ काम करने का माहौल बनता है, तब तक स्थानान्तरण होने से कामकाज प्रभावित होता है।
पत्रिका- पुलिस के काम में कितना राजनीतिक दखल है।
एसपी: हरेक जनप्रतिनिधि की मजबूरी होती है। जो लोग चुनाव में सहयोग करते हैं, वो मदद की अपेक्षा तो रखेेंगे ही। ऐसे में राजनीतिक लोगों व जनप्रतिनिधियों की सिफारिश करना स्वाभाविक है। इसमें नियमों के तहत हम क्या मदद कर सकते हैं, वो करते हैं।
Published on:
08 Jul 2021 04:58 pm
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