22 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

हिरणों की सुरक्षा भगवान भरोसे सरकार संवेदनशील न विभाग गंभीर

God protects the deer from the Government Depressive Department.Deaths in the attacks of dogs in the rain.40 years have been depleted in three years बारिश में श्वानों के हमलों में हो रही मौत-तीन वर्ष में 40 हिरण हुए कालकल्वित

2 min read
Google source verification
hindaun karauli news

हिरणों की सुरक्षा भगवान भरोसे सरकार संवेदनशील न विभाग गंभीर

हिण्डौनसिटी.
बारिश के दौरान इरनिया-विनेगा हिरन विचरण क्षेत्र सहित आस पास के दर्जन भर गांवों के खेतों में कुलांचें भरने वाले काले व भूरे हिरणों की सुरक्षा भगवान भरोसे हैं। विचरण क्षेत्र में श्वानों हमलों के डर के बीच किस हिरण की कुलांच कब थम जाए पता नहीं। वन विभाग के रिकॉर्ड अनुसार तीन वर्ष में श्वानों के हमलों से 40 हिरनों की मौत हो चुकी है। जबकि विचरण क्षेत्र के ग्रामीणों की मानें तो यह संख्या एक सौ के पार है।
मानसून की शुरुआत में दो दिन हुई बारिश में ही 9 हिरण कालकलवित हो गए। बारिश में चिकनी मिट्टी में खुर धंधसने से श्वानों से हिरणों को हमला कर मार डाला।
श्रीमहावीरजी के पास स्थित इरनिया विनेगा, बरगमा, हिंगोट, दानालपुर, पटोंदा, कांदरोली, कजानीपुर, खेड़ीचांदला, नगला मीना आदि गांवों की 9 पंचायतों के चरागाह व खेतों में बड़ी संख्या में काले व भूरे हिरण विचरण करते देखे जा सकते हैं। क्षेत्र में हिरणों की सुरक्षा के लिए खास बंदोवस्त नहीं हैं। वन विभाग भी कई किलोमीटर में फैले विचरण क्षेत्र में चंद वन रक्षक तैनात कर सुरक्षा के जिम्मे की इतिश्री कर लेता है।

निहत्थों पर सुरक्षा का जिम्मा-
यू तो वन विभाग ने हिरण विचरण क्षेत्र में तीन केटल गार्ड, एक वनपाल, दो वनरक्षक सहित करीब आधा दर्जन कर्मचारी लगाए हुए हैं। लेकिन विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो बारिश के समय हिरणों विचरण क्षेत्र में तीन दर्जन से अधिक हिंसक श्वान शिकार की फिराक में घूमते देखे जा सकते हैं। ऐसे में निहत्थे वनकर्मियों द्वारा श्वानों से हिरणों की सुरक्षा हो पाना कठिन है।

ग्रामीणों ने उठाया बीड़ा, बनाई सुरक्षा समिति-
हिरणों की मौत पर सरकार के संवेदनशील नहीं होने पर विचरण क्षेत्र के ग्रामीण खुद सुरक्षा पर चिंतित हुए हैं। इरनिया विनेगा क्षेत्र के ग्रामीणों ने हिरणों की सुरक्षा के लिए वन एवं वन्यजीव सुरक्षा समिति का गठन कर रखा है। ग्रामीण बताते हैं कि बारिश के मौसम में व फसल कटाई के बाद प्रति वर्ष करीब दो दर्जन हिरण श्वानों का शिकार हो जाते हैं। काले हिरणों के संरक्षण लिए आज तक किसी योजना को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका।

रिजर्व क्षेत्र के प्रस्ताव ठंडे बस्ते में-
वन विभाग ने इरनिया, विनेगा, नगलामीना, गांवड़ी, दानालपुर, पटोंदा, बरगमा, हिंगोट, कजानीपुर आदि 9 ग्राम पंचायतों की ओर से आए प्रस्तावों को मंजूर कर वन्यजीव सुरक्षा अधिनियम 1972 की धारा 36 सीडी के तहत हिरणों के संरक्षण के लिए 5 हजार 650 हेक्टेयर भूमि को श्रीमहावीरजी कम्युनिटी रिजर्व घोषित करवाने के लिए उच्चाधिकारियों को भिजवाया था। ये प्रस्ताव 7 वर्ष से ठंडे बस्ते में हैं।
खास बात यह है कि वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री सहित कई मंत्री, सांसद, विधायक, कलक्टर विचरण क्षेत्र का दौरा कर हिरणों के संरक्षण की प्रतिबद्धता जता चुके हैं।


संसाधनों व बजट का अभाव
श्वानों के हमलों से प्रति वर्ष हो रही हिरनों की मौत होने पता है। इनकी सुरक्षा के लिए विचरण क्षेत्र में वनकर्मी लगाए हुए हैं। हिंसक श्वानों को पकडऩा मुश्किल हो रहा है। हरिनों की सुरक्षा में संसाधनों व बजट का अभाव भी एक समस्या है।
-राजेंद्र शर्मा, क्षेत्रीय वन अधिकारी
वन विभाग, हिण्डौनसिटी।